NDTV Khabar

‘ए सूटेबल ब्वॉय’: आखिर क्यों व्हिस्की के क्रेट में भेजनी पड़ी इस किताब की  हस्तलिपी!

विक्रम सेठ की लिखी ‘ए सूटेबल ब्वॉय’जल्द बीबीसी के पीरियड ड्रामा में रूपांतरित होने जा रही है. लेखक ने दिलचस्प खुलासा करते हुए कहा है कि इसकी हस्तलिपी इतनी बड़ी थी कि इसे ब्रिटेन में प्रकाशकों के पास व्हिस्की के क्रेट में भेजना पड़ा था.

49 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
‘ए सूटेबल ब्वॉय’: आखिर क्यों व्हिस्की के क्रेट में भेजनी पड़ी इस किताब की  हस्तलिपी!

अंग्रेज़ी भाषा के लंबे उपन्यासों में से एक है 'ए सूटेबल ब्वॉय' (विक्रम सेठ की फाइल फोटो)

मशहूर लेखक विक्रम सेठ की साहित्यिक दुनिया अब पर्दे पर नजर आएगी. बीबीसी वन की आठ कड़ियों वाले टीवी धारावाहिक की शूटिंग भारत में होगी और पहली बार इसमें पूरी तरह से बीबीसी की गैर श्वेत कास्ट काम करेगी. साल 1993 में प्रकाशित हुआ उपन्यास ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ 1,350 पन्नों का है और यह उपनिवेशवाद के बाद के भारत पर आधारित है. इस उपन्यास की देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासी प्रशंसा हुई थी.

बिहार के काल्पनिक शहर ब्रह्मपुर के परिवार की कहानी
बेटी के लिए योग्य वर की तलाश में जुटी मां और इसके ईर्द-गिर्द बुनी गई कहानी में पटना, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर का भी ज़िक्र है.  सेठ ने कहा, ‘‘ मैंने तफसील से उन संदर्भों और पहचान चिन्हों का जिक्र किया है--ब्रह्मपुर (पटना में बांकीपुर), सब्जीपुर क्लब (बांकीपुर क्लब ऑफ पटना) प्रभा शूज कंपनी (बाटा) और फिर कलकत्ता, लखनउ, इलाहाबाद, कानपुर जैसे शहरों के साथ जुड़ाव है लेकिन इसके मूल में पटना है.’’

सेठ ने मुस्कुराहट के साथ कहा, ‘‘ लोग अक्सर मुझ से पूछते हैं कि ‘लता’ (नायिका) का चरित्र मेरी मां पर आधारित है. नहीं, रूपा मेहरा का निश्चित रूप से मेरी नानी से बहुत मिलताजुलता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे पटना से बहुत प्रेम है और काफी यादें हैं। अलग अलग जगह के पाठक चरित्रों से खुद को जोड़ते हैं इसी तरह से मेरे चरित्र और जिस ब्रह्मांड की कल्पना मैंने की है वह, व्यवस्थित तरीके से बढ़ते हैं.’’ 

अपने किरदारों से गप्पे लड़ाते हैं विक्रम सेठ
लेखक विक्रम सेठ के छोटे भाई शांतम सेठने बताया कि विक्रम हमेशा से अपने किरदारों की दुनिया में डूबे रहे जिसकी वह कल्पना करते थे. उन्होंने कहा, ‘‘ जब हम राजाजी मार्ग के बंगले में रहते थे तो उन्होंने अपने कमरे में ब्रह्मपुर (उनके उपन्यास में वर्णित शहर) का मानचित्र बनाया था और हमेशा अपने किरदारों से बातचीत किया करते थें जैसे वह अब भी करते हैं. शिमला में एक बार मां घर जल्दी आ गईं तो उन्होंने उनसे कहा कि आप क्यों जल्दी घर आ गईं? मेरे सारे चरित्र चले गए.’’

कवि-उपन्यासकार विक्रम सेठ लीला सेठ के सबसे बड़े बेटे हैं.  लीला सेठ ने पांच अगस्त 1991 से 20 अक्तूबर 1992 तक हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के तौर पर सेवा दी थी.

किताब लिखने में लगे 8 साल
अब 64 वर्ष के हो चुके सेठ को इस पुस्तक को पूरा करने में करीब आठ साल का वक्त लगा था और यह अंग्रेजी भाषा में एकल खंड में प्रकाशित सबसे लंबे उपन्यासों में से एक है. उन्होंने 90 के दशक के शुरू में इसके कुछ हिस्से शिमला में लिखे थे. 


एजेंसी से इनपुट

 


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement