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जीवन के रंगमंच को अलविदा कह गईं बंगाल की रंगकर्मी सोवा सेन...

सोवा ने मृणाल सेन की 'एक अधूरी कहानी' और 'एक दिन प्रतिदिन', गौतम घोष के 'देखा' और दत्त की 'झार एवं बैशाखी मेघ' जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया था.

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जीवन के रंगमंच को अलविदा कह गईं बंगाल की रंगकर्मी सोवा सेन...
पश्चिम बंगाल की दिग्गज रंगकर्मी सोवा सेन का रविवार को निधन हो गया. अधिक उम्र से जुड़ी बीमारियों के चलते उनका निधन हुआ. रंगमंच और फिल्मों के दिग्गज कलाकार दिवंगत उत्पल दत्त की विधवा सोवा (93) के परिवार में उनकी बेटी हैं. सोवा ने रंगमंच पर अपने लंबे करियर के दौरान 'नाबन्ना' (1944) और 'कलोल' (1965) जैसे कई लोकप्रिय नाटकों में अभिनय किया है. 

बेथुन कॉलेज से स्नातक करने के बाद सेन जननाट्य संघ से जुड़ीं और 'नाबन्ना' में मुख्य महिला किरदार निभाया. वह 1953-54 में दत्त के लिटिल थिएटर ग्रुप (एलटीजी) से जुड़ीं और 1960 में दत्त से शादी कर ली.

एलटीजी का नाम बाद में पीपुल्स थिएटर ग्रुप पड़ा. उन्होंने इस ग्रुप के अधिकांश नाटकों में काम किया जिनमें बैरिकेड, तिनर तालोयारा और तितुमीर जैसे नाटक भी शामिल हैं.

सोवा ने मृणाल सेन की 'एक अधूरी कहानी' और 'एक दिन प्रतिदिन', गौतम घोष के 'देखा' और दत्त की 'झार एवं बैशाखी मेघ' जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया था.

सोवा ने 1983 में बसु चटर्जी की हिंदी फिल्म 'पसंद अपनी अपनी' में महत्वपूर्ण किरदार निभाया.

सोवा को 10 अप्रैल 2010 को मदर टेरेसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सेन के निधन पर शोक जताया.

ममता ने ट्वीट कर कहा, "दिग्गज रंगकर्मी सोवा सेन के निधन पर दुखा हुआ. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं दोस्तों के साथ हैं."

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव सूर्या मिश्रा ने सेन को बंगाल के थिएटर की दिग्गज कलाकार बताया.

मिश्रा ने कहा, "सोवा सेन लोगों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी."

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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