निर्मल वर्मा की जिंदगी और लेखनी में झांकने की खिड़की है 'संसार में निर्मल वर्मा'

निर्मल वर्मा को जानने, उनके साहित्य को समझने और लेखनी की बारीकियों पर रोशनी डालने का काम करती है 'संसार में निर्मल वर्मा.'

निर्मल वर्मा की जिंदगी और लेखनी में झांकने की खिड़की है 'संसार में निर्मल वर्मा'

गगल गिल ने संपादित की है 'संसार में निर्मल वर्मा'

खास बातें

  • हिंदी के प्रख्यात लेखक थे निर्मल वर्मा
  • उनके इंटरव्यू का संग्रह है 'संसार में निर्मल वर्मा'
  • गगन गिल ने संपादित की है किताब
नई दिल्ली:

निर्मल वर्मा हिंदी साहित्य के ऐसे लेखक हैं, जिन्हें जितना पढ़ते जाओ, उतना ही उनमें डूबते जाओ. उनकी कहानियों और उपन्यासों में एकांत है, विदेशी प्रवास है, जीवन का बहुत ही उदास करने वाला अध्याय भी है, और यह एकांकीपन के अलग ही संसार में ले जाने वाला भी है.  निर्मल वर्मा को जानने, उनके साहित्य को समझने और लेखनी की बारीकियों पर रोशनी डालने का काम करती है 'संसार में निर्मल वर्मा.' जिसे गगन गिल ने संपादित किया है. इस किताब में इतने ढेर सारे इंटरव्यू हैं कि जो हमें निर्मल वर्मा के करीब, और बहुत ही करीब लेकर जाते हैं. जिसमें विनोद भारद्वाज, करण थापर, तरुण तेजपाल, तवलीन सिंह, राहुल देव, यतींद्र मिश्र, यू.आर. अनंतमूर्ति, अशोक वाजपेयी तथा ढेरों अन्य दिग्गज लोगों के साथ इंटरव्यू है. जिसे गगन गिल ने बहुत ही करीने के साथ लगाया है, और पाठकों के लिए इसमें उनपर बनी डॉक्युमेंट्री की पटकथा भी दी गई है.

'ससार में निर्मल वर्मा' में करण थापर से बातचीत के दौरान निर्मल वर्मा अपने जीवन से जुड़ी कई अहम जानकारी देते हैं. जैसे उन्होंने 11 साल की उम्र में पहली कहानी लिखी थी, और वह भी अपनी स्कूल की पत्रिका के लिए. करण थापर से बातचीत करते हुए निर्मल बताते हैं कि आखिर चेकोस्लोवाकिया उनके लिए क्यों महत्वपूर्ण था, वे कहते हैं, 'मैं मानता हूं कि चेकोस्लोवाकिया मेरे लिए एक खिड़की, एक अलग अनुभव, एक अलग संसार में पहुंचाने वाली दहलीज रहा...मुझे अब भी याद है कि जब मै आधी रात को मॉस्को हवाई अड्डे जा रहा था तो रास्ते को देखते हुए सोच रहा था कि टॉलस्टॉय के उपन्यास 'वॉर एंड पीस' का नायक इसी रास्ते पर चलते हुए नताशा के प्रेम में पड़ा होगा...' 

वहीं, निर्मल वर्मा विनोद भारद्वाज से बातचीत में बताते हैं, 'हिंदी में जैनेंद्र और अज्ञेय का मुझ पर गहरा असर रहा.' और उन्होंने उनकी किताबों को स्कूल के दौरान ही पढ़ लिया था. यही नहीं, निर्मल वर्मा से जब ऐसे शहर के बारे में पूछा जाता है जहां वह हमेशा के लिए रहना चाहते हैं तो वह कहते हैं, 'लंदन मुझे ऐसा शहर लगता है...लंदन में जितनी आजादी और प्राइवेसी मिली, वह कहीं नहीं मिलती...' इस तरह 'संसार में निर्मल वर्मा' हिंदी के इस साहित्यकार के जीवन में झांकने उसे समझने का एक शानदार जरिया है और उनपर शोध करने वालों के लिए तो यह एक ऐसी किताब भी जिसे कतई नजरअंदाज ने किया जा सकता है. 

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