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चुनाव प्रचार अभियान में मीडिया की भूमिका की पड़ताल करती 'व्हेन इंडिया वोट्स'

डॉ. समीर कपूर और प्रो. जयश्री जेठवानी की नई किताब “व्हेन इंडिया वोट्स” में इन सब विषयों का विवेचनात्मक खाका खींचा गया है.

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चुनाव प्रचार अभियान में मीडिया की भूमिका की पड़ताल करती 'व्हेन इंडिया वोट्स'
नई दिल्ली :

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कई स्तर पर सरकारें चुनी जाती हैं. अपने नीति निर्माता व सत्ता संचालक का चुनाव करने के लिए भारत में चुनावों का आयोजन त्योहार की तरह होता है और इस त्योहार का सबसे आकर्षक व महत्वपूर्ण पक्ष प्रचार अभियान होता है. चुनाव प्रचार अभियान के मामले में भी भारत विश्व में अनूठा है. करीब आठ दशक के चुनावी इतिहास में इस देश ने प्रचार अभियान के विविध रूप व आयाम देखें हैं. भारत में चुनाव प्रचार अभियान भी प्रवाहमान धारा की तरह अपने तट व दृश्य बदलते रहे हैं, क्योंकि समय-समय पर प्रचार के माध्यमों और मुद्दों में भी बदलाव आया है. खासकर संचार क्रांति के बाद बदलते संचार माध्यमों के समानुपात में प्रचार अभियान भी अपने आयाम बदलते रहे हैं. देश में प्रचार अभियान की यात्रा पंचायतों, सभाओं और जुलूस से शुरू होकर अखबार, परचा-पेपर, से होती हुई आज सबसे उन्नत संचार माध्यमों डिजिटल व सोशल मीडिया के दौर में पहुंच चुकी है. कभी देश में सरकार के नियंत्रण वाला एक टीवी चैनल व रेडियो चैनल था, जिसका चुनावी उपयोग कम ही होता था. लेकिन आज के टीवी चैनलों का चुनाव में वृहत स्तर पर हस्तक्षेप बढ़ा है.  

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चैनलों ने कई बार आम व विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल के खिलाफ हवा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. आज संचार के ऐसे माध्यम भी उपलब्ध हैं जिन्हें मुक्त के साथ ही निरंकुश माध्यम भी कहा जा सकता है. हालांकि इससे संचेतना का स्तर काफी बढ़ा है. आज देश के लगभग हर हाथ में फोन है और उसमें उसे अपनी क्षेत्रीय भाषा में पल-पल की जानकारी मिलती रहती है. साथ ही उसके पास ऐसे विकल्प भी मौजूद हैं जहां से वह इन सूचनाओं का सत्यापन भी कर सकता है व सोशल मीडिया पर अन्य लोगों से बीच चर्चा के लिए प्रस्तुत भी कर सकता है. लेकिन हर हाथ तक सूचनाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने वाले यह माध्यम राजनीतिक दलों के लिये भी अचूक हथियार साबित हुए हैं. दलों ने सभी संचार माध्यमों का भरपूर चुनावी सदुपयोग भी किया है. डॉ. समीर कपूर और प्रो. जयश्री जेठवानी की नई किताब “व्हेन इंडिया वोट्स” में इन सब विषयों का विवेचनात्मक खाका खींचा गया है. लेखकों ने ईमानदारी व बारीकी से लोकतंत्र, प्रचार अभियान व मास मीडिया के अंतर संबंध को समझने में सहायक तथ्यों को प्रस्तुत किया है. साथ ही देश के दो प्रमुख दलों भाजपा व कांग्रेस के पिछले तीन दशक के सफल प्रचार अभियानों का चित्रण भी प्रस्तुत किया है.  

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इस किताब में 1984 के बाद के चुनाव प्रचार अभियानों की शैली, बयानबाजी, और मुद्दों के परिवर्तन को अधिक गहनता से उकेरा है. जिसके तहत 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव प्रचार और स्पष्ट बहुमत के रूप में उसकी परिणति, वीपी सिंह की अगुवाई में बोफोर्स कांड के विरोध में प्रचार, विश्व हिन्दू परिषद् का राम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन और भाजपा के त्रयी में से एक लालकृष्ण आडवानी द्वारा सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकाल कर उसका राजनीतिक लाभ लेना,  नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्रित्व काल में डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा आर्थिक उदारीकरण को बढ़ावा देने और सामाजिक प्राथमिकताओं व विकास के 'गुजरात मॉडल' के लिए जिसे मोदी अब राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं, जैसे सफल चुनावी व राजनीतिक अभियानों की चर्चा की गई है. खास बात यह है कि इस किताब में लेखकों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि कैसे मीडिया के एक हिस्से द्वारा लगातार पीएम मोदी के तिरस्कार के बावजूद बड़े पैमाने पर लोगों के साथ उनके सीधे संचार और सोशल मीडिया के उपयोग से उन्होंने 2014 में चुनाव प्रचार की बनावट को बदल दिया.  

किताब : व्हेन इंडिया वोट्स

लेखक : डॉ. समीर कपूर और प्रो. जयश्री जेठवानी

प्रकाशक : रूपा पब्लिकेशन

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मूल्य : 295 रुपये



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