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हिन्दी की बेस्टसेलर किताबों शामिल हैं कलाम से लेकर जावेद अख्तर और चेतन भगत की​ किताबें

हिन्दी समाचार पत्र दैनि​क जागरण ने हिन्दी में प्रकाशित किताबों की बेस्टसेलर सूची तैयार की है ​जिसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है— कथा, कथेतर और अनुवाद. प्रत्येक श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकने वाली दस किताबों को शामिल किया गया है.

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हिन्दी की बेस्टसेलर किताबों शामिल हैं कलाम से लेकर जावेद अख्तर और चेतन भगत की​ किताबें

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की 'मेरी जीवन यात्रा', गीतकार जावेद अख्तर की 'लावा', क​वि और सियासतदान कुमार विश्वास की 'कोई दीवाना कहता है', लेखक चेतन भगत की 'वन इं​डियन गर्ल' और पत्रकार रवीश कुमार की 'इश्क में शहर होना' हिन्दी की उन बेस्ट सेलर सूची में शा​मिल हैं, ​जिसे देश के एक प्रमुख हिन्दी दैनिक समाचार पत्र ने जारी किया. हिन्दी समाचार पत्र दैनि​क जागरण ने हिन्दी में प्रकाशित किताबों की बेस्टसेलर सूची तैयार की है ​जिसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है— कथा, कथेतर और अनुवाद. प्रत्येक श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकने वाली दस किताबों को शामिल किया गया है.

राष्ट्रीय राजधानी में हुए एक कार्यक्रम में दैनि​क जागरण के प्रधान संपादक और सीईओ संजय गुप्त तथा लेखक नरेंद्र कोहली ने इन तीन श्रेणियों में सूची को जारी किया. कथा की सूची में सत्य व्यास की पुस्तक 'दिल्ली दरबार' को पहला स्थान मिला, जबकि​ रवीश की 'इश्क में शहर होना' इस सूची मे छठे स्थान पर रही.

कथेतर रचनाओं की सूची में पहला स्थान दीप​ त्रिवेदी की पुस्तक 'मैं मन हूं' को मि​ला है. इसी सूची में आम आदमी पार्टी के नेता और कवि कुमार विश्वास की 'कोई दीवाना कहता है' छठे और गीतकार जावेद अख्तर की 'लावा' ने आठवां स्थान हा​सिल किया. अंतिम श्रेणी अनुवाद की है इसमें पहले स्थान देवदत्त पटनायक की 'देवलोक देवदत्त पटनायक के संग' रही, जबकि चेतन भगत की ' वन इंडि​यन गर्ल' को आठवां और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की 'मेरी जीवन यात्रा' नौवें स्थान पर रही.
 


दैनिक जागरण ने निल्सन बुकस्कैन बेस्टसेलर के साथ मिलकर यह सूची तैयार की है. 39 हिंदी भाषी शहरों के पुस्तक विक्रेताओं से आंकड़े जमा करने के बाद इस सूची को तैयार किया गया है. इस सूची में उन्हीं किताबों को शामिल किया गया है जिन का पहला संस्करण एक जनवरी, 2011 या उसके बाद प्रकाशित हुआ है.

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गुप्त ने कहा कि यह सूची अप्रैल और जून के बीच की है और हर तीन महीने पर सूची जारी की जाएगी. गुप्त ने कहा, “आज आम धारणा यह है कि अंग्रेजी हिंदी को चुनौती दे रही है. ऐसे में कैसे हिंदी को सम्मान के साथ देखा जाये, इससे जुड़े लोग, इससे जुड़ी हमारी संस्कृति एवं देश को सम्मान मिले, यह प्रश्न हमारे सामने था. हिंदी को आगे ले जाने के लिए हिंदी साहित्य को मान और बढावा देना महत्पूर्ण है. हमने निल्सन के साथ मिलकर काम किया ताकि एक विश्वनीय सूची तैयार कर सकें.'

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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