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मेरा अगला उपन्यास राम पर नहीं बल्कि रावण पर आधारित होगा: अमीश

अमीश ने कहा, मैं अपने उपन्यास के लिए पौराणिक चरित्रों का चयन इसलिए करता हूं क्योंकि ऐसे चरित्र के जरिये बहुत कुछ सीख सकते है और इनसे मिलने वाली शिक्षा के जरिये हम खासकर युवा पाठक अपनी जिंदगी को और बेहतर बना सकते हैं.

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मेरा अगला उपन्यास राम पर नहीं बल्कि रावण पर आधारित होगा: अमीश
पौराणिक चरित्रों को नया आयाम देने वाले अंग्रेजी के लेखक अमीश ने कहा है कि सीता के बाद उनका अगला उपन्यास राम पर नहीं बल्कि रावण पर आधारित होगा. वह पौराणिक चरित्रों को इसलिए अपना विषय बनाते हैं, क्योंकि पाठक खुद को इनसे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं.

अमीश ने कहा, मैं अपने उपन्यास के लिए पौराणिक चरित्रों का चयन इसलिए करता हूं क्योंकि ऐसे चरित्र के जरिये बहुत कुछ सीख सकते है और इनसे मिलने वाली शिक्षा के जरिये हम खासकर युवा पाठक अपनी जिंदगी को और बेहतर बना सकते हैं. पाठक भी ऐसे किरदारों से जुड़ाव महसूस करते हैं. अंग्रेजी में पौराणिक पात्रों के चित्रण के बारे में उन्होंने कहा, किस भाषा में बात कही जा रही है, इसका अधिक महत्व नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि उपन्यास की विषयवस्तु हमारी (भारतीयता) जड़ों से जुड़ी हुई हो और मेरा मानना है कि जड़ों से जुड़ा हुआ विषय हमेशा पाठक को आकषर्ति करता है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, मेरा गृहनगर बनारस है और मेरी परवरिश ऐसे माहौल में हुई जिसके कारण पौराणिक चरित्र बतौर लेखक मुझे बेहद आकर्षित करते हैं. 

सीता: वारियर ऑफ मिथिला का हिन्दी अनुवाद जल्द
सीता: वारियर ऑफ मिथिला के बारे में अमीश ने कहा, यह रामचंद्र श्रृंखला की अगली कड़ी है और इन दोनों किताबों को मैं रामायण के प्रति श्रृद्धांजलि का जरिया मानता हूं. तुलसी का रामचरित मानस इस पौराणिक गाथा को अलग तरह से प्रस्तुत करता है. हर भाषा की अलग-अलग रामायण है और उसका प्रस्तुतिकरण अलग-अलग तरह से किया गया है. बचपन से ही रामायण और इसके पात्र मुझे बेहद आकषर्ति करते हैं. सायन आफ इक्ष्वाकु के रामचंद्र श्रृंखला के अगले अंग्रेजी उपन्यास सीता: वारियर आफ मिथिला का हिन्दी अनुवाद पाठकों के सामने आने वाला है.

भारतीय भाषाओं के साहित्य की सही तरीके से मार्केटिंग की जरूरत
भारतीय साहित्य के बारे में अमीश ने कहा, देश की तमाम भाषाओं में बेहतरीन साहित्य लिखा जा रहा है. मगर भारतीय प्रकाशन अपने साहित्य की सही तरीके से मार्केटिंग नहीं करते हैं, जिसके कारण भारतीय लेखकों के रचनाकर्म का प्रचार प्रसार अधिक नहीं हो पाता है. केवल महानगरों को देखकर यह नहीं कहा जाना चाहिए कि भारत में केवल अंग्रेजी में ही बेहतर साहित्य लिखा जा रहा है. उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि यदि भारतीय भाषाओं के साहित्य की सही तरीके से मार्केटिंग की जाये तो यह अधिक लोगों तक पहुंच सकता है. अंग्रेजी साहित्य के युवा पाठकों को आकषर्ति करने संबंधी सवाल जवाब में उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजी की अहमियत अधिक हो गयी है जिसके कारण युवा पीढ़ी अंग्रेजी साहित्य की तरफ अधिक जा रही है. इसके साथ ही, यह भी हकीकत है कि इस वक्त नयी पीढ़ी के लिए अंग्रेजी रोजगार की भाषा है.

उन्होंने कहा कि नयी पीढ़ी के दिमाग में यह बात भी रहती है कि अंग्रेजी साहित्य पढ़ने से उनकी अंग्रेजी में सुधार आयेगा. यह बात ठीक है रोजगार को ध्यान में रखकर अंग्रेजी साहित्य पढ़ते रहें, लेकिन दिल की भाषा (हिन्दी) को कभी नहीं भूलना चाहिए.

एक सवाल के जवाब में अमीश ने कहा कि पौराणिक गाथाओं को लेकर साहित्य सृजन करने वाले किसी साहित्यकार के समतुल्य उनका नाम बिल्कुल नहीं रखा जाना चाहिए, क्योंकि वह खुद को बहुत छोटा रचनाकार मानते हैं.
 

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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