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पटना पुस्तक मेला: बच्चों की भाषणकला ने सबको किया दंग

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पटना पुस्तक मेला: बच्चों की भाषणकला ने सबको किया दंग

प्रतीकात्मक तस्वीर

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित 23वें पटना पुस्तक मेले में स्कूली बच्चों की भाषणकला देख अभिभावक और शिक्षक भी दंग रह गए. छठे दिन 'मेनस्ट्रीम मीडिया बनाम अल्टरनेटिव मीडिया' पर परिचर्चा का आयोजन किया गया और कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया. 'कुशल युवा-सफल बिहार' थीम पर आधारित सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) द्वारा आयोजित पटना पुस्तक मेले में स्कूली बच्चों के लिए भाषणकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. 

30 छात्रों ने चर्चा में लिया हिस्सा
'मसि संस्था' द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में पटना के विभिन्न स्कूलों से आए करीब 30 बच्चों ने शिरकत की. इस प्रतियोगिता में बच्चों के लिए हालांकि चार विषय दिए गए थे, लेकिन अधिकांश बच्चों ने 'मेरे सपनों का भारत' विषय पर अपनी भाषणकला का प्रदर्शन किया. कृष्णा निकेतन स्कूल की टुम्पी सांकृत्या, यशस्वी चौहान और अंजलि ने कहा कि उनके सपनों का भारत यशस्वी और गुरु भारत है, जो भ्रष्टाचारमुक्त, आरक्षणमुक्त, जतिवादमुक्त, बेरोजगारमुक्त है. 

इस प्रतियोगिता का परिणाम 12 फरवरी को प्रकाशित किया जाएगा. गौरतलब है कि इस पुस्तक मेले में बच्चों पर खास फोकस किया गया है.


'एटम बम है सोशल मीडिया'
'मेनस्ट्रीम मीडिया बनाम अल्टरनेटिव मीडिया' पर परिचर्चा में भाग लेते हुए दूरदर्शन के समाचार संपादक संजय कुमार ने कहा कि मीडिया में आज भी सकारात्मक तत्व मौजूद हैं, लेकिन मीडिया में दलितों की कम भागीदारी चिंता बढ़ाती है.पत्रकार इर्षादुल हक ने कहा, "मीडिया को देखने का नजरिया बदलना चाहिए. मीडिया अब अर्थतंत्र में बदल गया है. खबर एक उत्पाद बनकर रह गया है." उन्होंने सोशल मीडिया को 'एटम बम' बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ा है. 

'इंद्रप्रस्थ' और 'शब्द ज्योति' का लोकर्पण
पटना पुस्तक मेले के भोजपुरी मुक्ताकाश मंच से भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक पूर्व अधिकारी और लेखक के काव्य संग्रह 'इंद्रप्रस्थ' का लोकर्पण किया गया. इस मौके पर उपस्थित कवि मदन कश्यप ने पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि इस पुस्तक में स्त्री केंद्र में है. उसकी व्यथा आज भी जीवित है. पत्रिका 'पाखी' के संपादक और साहित्यकार प्रेम भारद्वाज ने कहा, पुस्तक 'इंद्रप्रस्थ' में इंद्रसत्ता, भूख और छल की व्याख्या करता है. उन्होंने पुस्तक की एक पंक्ति 'प्रेम इस धरती का उपहार है' का जिक्र करते हुए कहा कि यह पुस्तक इसी के इर्द-गिर्द घूमती है. इसके अलावा ज्योति नारायण की पुस्तक 'शब्द ज्योति' का भी लोकार्पण डॉ़ उषा किरण खान और शेफाली राय द्वारा किया गया. 

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नाटक का भी हुआ मंचन
कला जागरण द्वारा अंतोन चेखव के लिखे नाटक 'भोंदू' का मंचन किया गया. हीरालाल राय के निर्देशन में इस नाटक के द्वारा एक ऐसे व्यक्ति की कहानी दिखाई गई है, जिसका जीवन अपने आप तक ही सीमित है. इस नाटक में कुणाल, रवि, अभिषेक, मौसमी, करिश्मा ने बेजोड़ अभिनय किया. 

पटना पुस्तक मेला चार फरवरी को शुरू हुआ, जो 14 फरवरी तक चलेगा. इस पुस्तक मेला में देश के नामीगिरामी 300 से ज्यादा प्रकाशक भाग ले रहे हैं. 
 

 


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