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नफरत की ताकतों को शिकस्त देने के लिए मोहब्बत की ताकतों को मजबूत करना होगा: वसीम बरेलवी

वसीम बरेलवी को पिछली सरकार ने कला साहित्य के क्षेत्र में विधानपरिषद के लिये नामित किया था. उनका कहना है कि कवियत्री महादेवी वर्मा के बाद वह दूसरे साहित्यकार है जो कला साहित्य के क्षेत्र से उप्र विधानपरिषद में नामित किये गये हैं.

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नफरत की ताकतों को शिकस्त देने के लिए मोहब्बत की ताकतों को मजबूत करना होगा: वसीम बरेलवी
विधायक और मशहूर शायर वसीम बरेलवी का मानना है कि हिन्दुस्तान के समाज में जितनी भी नफरतें और कड़वाहटें हैं, उनका सिर्फ एक इलाज है मोहब्बत. मोहब्बत की ताक​तों को इतना मजबूत करना पड़ेगा कि समाज में फैली नफरत की शिकस्त हो जाये क्योंकि हिन्दुस्तान की सरजमी बहुत देर तक इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती. उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश इसलिये विश्व गुरू कहलाता है क्योंकि हमारे पास पांच हजार साल पुरानी आपसी भाईचारे की संस्कृति है, सहनशीलता है, हमारी एक विचारधारा है. इतनी भाषाओं, मजहब, अलग-अलग संस्कृति के बावजूद हम एक थे, एक हैं और हमेशा एक रहेंगे. दुनिया का कोई भी ऐसा देश बता दें जहां इतनी विभिन्नताओं के बाद भी इतनी संस्कृतियां एक साथ समाहित हैं.’’ उप्र विधानपरिषद के नामित सदस्य जाहिद हसन वसीम बरेलवी आज परिषद में हो रहे सदस्यों के हंगामे के बीच में एक कोने में खामोशी से बैठे माहौल देख रहे थे.

बाद में वसीम बरेलवी ने अपने मन की बातें करते हुए देश में फैल रही नफरत की राजनीति पर दिल खोल कर बात की और उम्मीद जाहिर किया कि जल्द ही नफरत का यह माहौल खत्म हो जायेगा क्योंकि हमारा मुल्क सभी मजहबों, संस्कृतियों, भाषाओं को एक साथ लेकर चलने वाला देश है. इस मौके पर जो बातें उन्होंने कहीं वे इस तरह हैं- 


बरेलवी ने अपनी बात की शुरूआत एक शेर से की 

‘‘वह मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया था, मैंने उसके हाथ चूमे और बेबस कर दिया.’’ 


उन्होंने कहा- 
‘‘मैंने कौमी एकता को जिया ही नहीं बल्कि अपनी आत्मा में समा लिया है. मुल्क में नफरत की ताकतों को शिकस्त देने के लिये मोहब्बत की ताकतों को मजबूत करना होगा क्योंकि हमारे मुल्क की सरजमी नफरत को बहुत देर बर्दाश्त नहीं कर सकती है.’’ 

नफरत की उम्र कम है-
'नफरत के बल पर कोई चीज चलाई जायेगी तो उसकी उम्र बहुत कम होगी, हम मोहब्बत के पैरोकार हैं. टकराव और सदभाव दो चीजे हैं जब टकराव से घर नहीं चल सकता तो समाज क्या चलेगा. मौजूदा माहौल में हमे यह सोचना है कि कैसे इस वक्ती टकराव को सदभाव में बदला जाये.' 

कालिदास, प्रेमचंद्र और गालिब का वंशज हूं- 
‘‘मैं कालिदास, प्रेमचंद्र और गालिब का वंशज हूं, हमें सारी नफरतों का जवाब मोहब्बत से देना होगा. जितना हम मोहब्बत और रचनात्मकता की ताकतों को मजबूत करेंगे, उतना ही हम समाज की नकरात्मकता को दूर भगा सकेंगे. हमारे लिये पहली प्राथमिकता समाज है, समाज को चलाने वाली सरकारें तो आती जाती रहती हैं. समाज को जिंदा रखने के लिये हमें उन सभी ताकतों के हाथ मजबूत करने होंगे जो हिन्दुस्तान की सदियों पुरानी विचारधारा में यकीन रखते हैं. जिसकी वजह से हमारा मुल्क पूरी दुनिया में विश्वगुरू कहलाता है. हमारा मुल्क अगर इतना सहनशील नहीं होता तो इतनी भिन्न-भिन्न सस्कृतियां एक साथ समाहित ना हो पातीं.’’ 

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मुल्क के मौजूदा हालात 
हमारी 5000 साल पुरानी सभ्यता है, हमने बहुत कुछ सहन किया है, हम अपने मुल्क हिंदुस्तान को जिंदा रखना चाहते हैं. आजकल जो भी लोग नफरत की राजनीति कर रहे हैं वह वक्ती चीज है, इससे मुल्क में कुछ बदलने-बिगड़ने वाला नहीं है. ‘‘हमें खराब जहनियत को बदलना होगा, हमें सबको एकसाथ लेकर चलना है, हमें उम्मीद ही नहीं यकीन है कि यह देश बहुत दिन नफरत बरदाश्त नहीं कर सकता. क्योंकि यह हमारे मुल्क की मिट्टी के मिजाज के खिलाफ है. हमारे आपस के सदियों के रिश्ते आप कुछ दिन में खत्म नहीं कर सकते हैं.’’ 


अपनी बात को एक शेर से खत्म करते हुए वसीम बोले- 

‘‘कौन सी बात कहा कैसे कही जाती है, यह सलीका है तो हर बात सुनी जाती है.’’ 


गौरतलब है कि वसीम बरेलवी को पिछली सरकार ने कला साहित्य के क्षेत्र में विधानपरिषद के लिये नामित किया था. उनका कहना है कि कवियत्री महादेवी वर्मा के बाद वह दूसरे साहित्यकार है जो कला साहित्य के क्षेत्र से उप्र विधानपरिषद में नामित किये गये हैं.


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