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विश्व पुस्तक मेला : मैत्रेयी पुष्पा ने राजेंद्र यादव को याद किया

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विश्व पुस्तक मेला : मैत्रेयी पुष्पा ने राजेंद्र यादव को याद किया
नयी दिल्‍ली:

किताबों का महाकुंभ विश्व पुस्तक मेले के तीसरे दिन भी राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर पुस्तक-प्रेमियों उत्साह देखने लायक था. मैत्रेयी पुष्पा ने प्रसिद्ध कथाकार राजेंद्र यादव पर लिखी किताब 'वह सफर था कि मुकाम था' पर प्रेम भारद्वाज से चर्चा की. राजकमल प्रकाशन ने अपने स्टॉल पर पाठकों के लिए एक अनोखी स्कीम भी चलाई है. एक सेल्फी पॉइंट 'हिंदी हैं हम' पर फोटो लेके 'फेसबुक पर हैश राजकमलबुक्स' पोस्ट करने पर किताबों पर 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

'वह सफर था कि मुकाम था' पर संपादक प्रेम भारद्वाज ने कहा, "राजेंद्र यादव के साथ मैत्रेयी जी की मैत्री जानी पहचानी है. लेखन की पहली पायदान से अब तक कि उनकी यात्रा के अनेक मोड़ों पड़ावों गतिविधियों के साक्षी रहे हैं राजेंद्र यादव. एक शायर ने कहा है 'इक जरा सी मुलाकात के कितने मतलब निकाले गए."

राजेंद्र यादव से मैत्रेयी के संबंध इतने अनौपचारिक, घरेलू और आत्मीय थे कि वहां न कुछ पर्सनल था न पोलिटिकल. मैत्रेयी जी के लिए वे फ्रेंड फिलॉस्फर और गाइड सब थे, पर आबोहवा में उनके चर्चे होते रहे.


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मैत्रेयी पुष्पा ने कहा, "राजेंद्र यादव से मिलने पहले में मैं लिखती तो थी, मगर कुछ इस तरह रोती जाती थी और लिखती रहती थी और सोचती थी कि शायद ऐसे ही उपन्यास लिखते हैं. मेरे उपन्यास प्रकाशित भी हुए, मगर जब मैं राजेंद्र यादव से मिली तो उन्होंने मुझसे कहा, तुम मेरे पास एक विद्यार्थी की तरह आई हो और मैंने जो उसके बाद लिखा वो मैंने राजेंद्र यादव के पास आके ही लिखा."

10 जनवरी को राजकमल प्रकाशन स्टॉल कार्यक्रम:
1-2 बजे मैनेजर पांडे, आलोचक की किताब मुगल बादशाहों की हिंदी कविता पर मृत्युंजय, कवि, आलोचक की बातचीत, 3-4 बजे वर्षा दास के दो नाटक- 'खिड़की खोल दो' व 'प्रेम और पत्थर' का लोकार्पण. लोकपर्ण कृति जैन करेंगी.



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