NDTV Khabar
होम | साहित्य

साहित्य

  • Book Review: 'बेरंग' जिंदगी के 'रंग' हज़ार, कुछ ऐसी ही है गोर्की-एल्विन की कविता-संग्रह
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के रहने वाले दो युवा, जिनकी उम्र भले ही ज्यादा नहीं हो लेकिन उन्होंने जीवन के छोटे-बड़े कठिनाइयों से गुजरकर अपने अनुभवों को कविता के माध्यम से पिरोया है. गोर्की सिन्हा और एल्विन दिल्लु ने संयुक्त रूप से कविता संग्रह रची है, जिसका नाम 'रंग बेरंग' है.
  • अनुच्छेद 35A समानता के अधिकार का मौलिक उल्लंघन है: अरुण जेटली
    अनुच्‍छेद 35ए जो कश्‍मीर के निवासियों को विशेष अधिकार देता है, उसे हटाए जाने के कयासों और राज्‍य के राजनीतिक दलों द्वारा ऐसे किसी भी संभावित कदम के कड़े विरोध के बीच सोनिया सिंह की किताब 'डिफाइनिंग इंडिया : थ्रू दीयर आईज' (Defining India: Through Their Eyes) में अरुण जेटली ने स्‍पष्‍ट किया है कि इस विवादास्‍पद अनुच्‍छेद पर बीजेपी सरकार क्‍या सोच रही है.
  • Book Review: खाने से जुड़ी वो 50 आदतें जो आपकी दादी-नानी अपनाती आई हैं, अब जानिए इसके पीछे की सांइस
    ये 50 वही ट्रेडिशनल आदतें हैं जिन्हें आपके घर में दादी या नानी फॉलो करती आ रही हैं, और आपको भी फॉलो करने को कहा होगा. लेकिन मॉर्डन जनरेशन बिना वजह या सच जाने किसी भी आदत को नहीं अपनाती. 
  • पुस्तक समीक्षाः दलित विमर्श को आगे बढ़ाता संवाद है 'ओमप्रकाश वाल्मीकि का अंतिम संवाद'
    पुस्तक समीक्षाः किताब में समाज, जाति और धर्म से जुड़े अनेक प्रासंगिक सवाल हैं जिनका वाल्मीकि ने तार्किक एवं बेबाक जवाब दिया है. दसअसल, यह किताब मात्र संवाद भर नहीं, साहित्य में दलित विमर्श और समाज में दलितोत्थान के प्रयासों का एक पारदर्शी चेहरा है, जिसमें उनकी कमियां एवं अच्छाइयां सब स्पष्ट हो गई हैं.
  • Book Review: बिहार की राजधानी पटना के मज़ेदार किस्से और कहानी, जो हर किसी को नहीं मालूम...मिलेंगे यहां
    पटना, बिहार की राजधानी को अभी तक आपने धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन का चश्मा लगाकर देखा होगा. यहां की तंग गलियों और भीड़-भाड़ को देख आपने दूर से ही पटना की छवि उन शहरों की तरह बना ली होगी, जो शहरीकरण और विकास के बीच का सफर तय कर रही है. लेकिन किताब पटना खोया हुआ शहर आपको अलग ही पटना के दर्शन कराएगी.
  • भाजपा की सियासी यात्रा का दस्तावेज है 'बीजेपी : कल, आज और कल'
    वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी की हालिया किताब 'बीजेपी : कल, आज और कल' भाजपा की इसी सियासी यात्रा का दस्तावेज है. उन्होंने अपनी किताब में जनसंघ से लेकर बीजेपी तक की यात्रा का तो विस्तार से वर्णन किया ही है. साथ ही इस यात्रा के हर प्रमुख पड़ाव पर बारीकी से नजर डाली है.
  • केवल पीएम मोदी और सोनिया गांधी ने 'आधार' पर पूछा यह सवाल : नंदन निलेकणि
    एस जयशंकर को सीधे केंद्रीय मंत्री का पद मिला है, ये अपने आप में पहला मौका है लेकिन 10 साल पहले इस तरह कैबिनेट में जगह पाने वाले शख्स नंदन नीलेकणि हो सकते थे. उन्हें राहुल गांधी ने मानव संसाधन विकास मंत्री का पद देने के लिए बुलाया था. हालांकि बिल्कुल आखिरी समय में सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुनर्विचार के बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया जबकि नीलेकणि दिल्ली के लिए उड़ान भरने को बिल्कुल तैयार थे. नीचे दिया गया पुस्तक का अंश पढ़ें...
  • चुनाव प्रचार अभियान में मीडिया की भूमिका की पड़ताल करती 'व्हेन इंडिया वोट्स'
    डॉ. समीर कपूर और प्रो. जयश्री जेठवानी की नई किताब “व्हेन इंडिया वोट्स” में इन सब विषयों का विवेचनात्मक खाका खींचा गया है. लेखकों ने ईमानदारी व बारीकी से लोकतंत्र, प्रचार अभियान व मास मीडिया के अंतर संबंध को समझने में सहायक तथ्यों को प्रस्तुत किया है.
  • गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ
    सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गुसाईं दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने. निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही. उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था. 
  • नेहरू के होने का मतलब
    तथाकथित राष्ट्रवादियों ने नेहरू और गांधी को लगभग खलनायकों में बदलने की कोशिश की है. इनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की जैसे कोई सीमा ही नहीं रही.
  • अलविदा हरिपाल त्‍यागी! शब्‍दों और रंगों के इस जादूगर के बिना फीकी रहेगी कला की दुनिया
    हरिपाल त्‍यागी (Haripal Tyagi) ने 1 मई को इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वह 85 साल के थे और ब्लड कैंसर से लड़ रहे थे.
  • Book Review: एक आईएएस अधिकारी के 38 साल के अनुभवों का दस्तावेज है अनिल स्वरूप की 'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट'
    पूर्व आईएएस अनिल स्वरूप (Anil Swarup) ने अपनी किताब  'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट' (Not Just A Civil Servant Book) में 38 साल लंबी प्रशासनिक सेवा के दौरान हुए अनुभवों को व्यक्त किया है. सत्ता और तंत्र को बेहद करीब से देखने वाले अनिल स्वरूप ने इस किताब में अपने अनुभव को शेयर करने के साथ ही कई खुलासे भी किए हैं. इस किताब के तीसरे अध्याय में उन्होंने लिखा है- ''वह अयोध्या में मंदिर चाहते थे और शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आम सहमति की दिशा में काम कर रहे थे. वह पूरी तरह से आक्रामक तेवर के खिलाफ थे जो धार्मिक संगठनों की पहचान थी. उस समय भारत में मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे. दूरदर्शन के अलावा कोई दूसरा न्यूज चैनल नहीं था. टेलीप्रिंटर और लैंडलाइन फोन ही कम्युनिकेशन का साधन थे. लाइव टेलीकास्ट का साधन होने के कारण जमीनी हकीकत का अंदाजा लगाना मुश्किल था. कल्याण सिंह को अयोध्या से रुक-रुक कर जानकारियां मिल रही थी.
  • Ramdhari Singh Dinkar: सत्ता के करीब रहकर भी जनता के दिलों में रहे दिनकर, कुछ ऐसा था उनका जीवन
    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) की आज पुण्यतिथि है. दिनकर (Dinkar) का निधन 24 अप्रैल, 1974 को हुआ था. रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) राष्ट्रकवि होने के साथ ही जनकवि भी थे. दिनकर ऐसे कवियों में से हैं जिनकी कविताएं आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े विद्वान पसंद करते हैं. देश की आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी मिलने तक के सफर को दिनकर ने अपनी कविताओं द्वारा व्यक्त किया है.
  • पुस्तक समीक्षा : हवा के ताजे झोंके की तरह है 'भीगी रेत'
    देश के मौजूदा सियासी माहौल में ये पंक्तियां कितनी मौजू हैं. लेखक और समाजसेवी रवि शर्मा का हालिया काव्य संग्रह 'भीगी रेत' ताजा हवा के झोंके की तरह है.
  • हिंदी के प्रख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह का निधन
    हिंदी के विख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह (Namvar Singh) का निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली. नामवर सिंह 93 वर्ष के थे. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक नामवर सिंह ने मंगलवार की रात 11.51 बजे आखिरी सांस ली.
  • समाज की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती 'अधूरी दास्तां'
    'अधूरी दास्तां' एक प्रेम कहानी है, जिसे विवेक और साक्षी के बीच बुना गया है. एक ही दफ्तर में काम करने वाले विवेक और साक्षी को प्यार हो जाता है. दोनों तमाम ख़्वाब बुनते हैं, लेकिन उनके ख़्वाब को समाज की नजर लग जाती है.
  • कृष्णा सोबती बहुत याद आएगा आपका जादुई व्यक्तित्व और बेबाकपन
    हिंदी साहित्य (Hindi Literature) में कृष्णा सोबती (Krishna Sobti) एक अलग ही मुकाम रखती थीं और उनका व्यक्तित्व उनकी किताबों जितना ही अनोखा था. 1980 में कृष्णा सोबती को उनकी किताब 'जिंदगीनामा' के लिए साहित्य अकादेमी (Sahitya Akademi Award) से नवाजा गया था तो 2017 में हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें ज्ञानपीठ (Jnanpith) पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • शादी के बाद पैदा हुए परस्पर विश्वास और प्रेम की कहानी का लेखा जोखा है ‘सिडक्शन बाय ट्रूथ’
    कहानी के अनुसार शिव एक जाना-माना बुद्धिजीवी होता है. शिव को इस बात का पता है कि इंसान को अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए शादी ही पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि वह मन की जगह तर्क का सहारा लेता है. वह अपनी शादीशुदा जिंदगी के दौरान खुद को व्यभिचार के रास्ते की तरफ अग्रसर करता है. इस दौरान वह दो उद्देश्य तय करता है एक तो यह कि वह शादी के पीछे के मकदस को समझेगा और दूसरा यह कि अपनी इच्छाओं को दोबारा तलाशेगा. ठीक उसी तरह जिस तरह उसकी पत्नी ने किया था. इन दोनों ही उद्देश्य को पूरा करने के लिए उसने यह फैसला किया था कि वह अब से सिर्फ शादी-शुदा महिलाओं के साथ ही संबंध बनाएगा.
  • Lakshminama Book Review: धर्म, व्यापार और राजनीति का अर्थशास्त्र
    ये बयान तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पुस्तक लक्ष्मीनामा में तमाम कहानियों के साथ पेश किया गया है जो किताब के दो पेज पढ़ने वाले को आगे के पृष्ठ पढ़ने के लिए खुद मजबूर करता है. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इन तीनों विषयों पर अलग-अलग किताबें तो अनेक लिखी गई हैं लेकिन तीनों के अंतर्संबंधों को उजागर करती हुई शायद हिंदी की यह पहली पुस्तक है.
  • प्रेम कथाओं का खूबसूरत संकलन है 'इश्क़ में शहर होना'
    पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में साउथ एशिया स्टडी सर्किल में इस पर बातचीत हुई. इसका पाठ किया. मुंबई में टाटा लिट फेस्ट में कैरोल एंड्राडी ने 'टेक्स्ट एंड द सिटी' के नाम से चर्चा आयोजित की, जो मुझे इस किताब की अब तक की चर्चाओं में सबसे अधिक पसंद हैं.
12345»

Advertisement