पटना साहिब सीट पर BJP के 'शत्रु' और रविशंकर प्रसाद के बीच कांटे की टक्कर, क्या कांग्रेस उम्मीदवार शत्रुघ्न तोड़ पाएंगे यह 'मिथक'

Patna Sahib Seat: माना जाता है कि पटना साहिब (Patna Sahib) से बीजेपी (BJP), नालंदा से जेडीयू (JDU) और किशनगंज से कांग्रेस (Congress) किसी को भी टिकट दे दे तो वह आसानी से जीत जाएगा.

खास बातें

  • बिहार की पटना साहिब सीट पर कांटे की टक्कर
  • शत्रुघ्न सिन्हा से रविशंकर प्रसाद का मुकाबला
  • पटना साहिब सीट पर आखिरी चरण में मतदान
नई दिल्ली:

Patna Sahib Seat: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) के छह चरण पूरे हो चुके हैं. बिहार में सातवें चरण के लिए 8 सीटों पर काफी दिलचस्प मुकाबला है. इन सभी सीटों पर बीजेपी, जेडीयू (JDU) और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है. सातवें चरण में पटना साहिब (Patna Sahib) बिहार की सबसे वीआईपी सीट बनी हुई है. यहां से कांग्रेस के शत्रुध्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) का मुकाबला बीजेपी के केद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) से हैं. वैसे बिहार में यह कहा जाता है कि राज्य की तीन सीटों पर कोई बहस नहीं हो सकती, क्योंकि यह पहले से तय होता है कि यहां से कौन जीतेगा, जिसमें पटना साहिब, नालंदा और किशनगंज शामिल है. माना जाता है कि पटना साहिब से बीजेपी, नालंदा से जेडीयू और किशनगंज से कांग्रेस किसी को भी टिकट दे दे तो वह आसानी से जीत जाएगा. यह लगातार साबित भी होता आया है. तो सबसे बड़ा सवाल है कि क्या शत्रुघ्न सिन्हा इस बार इस मिथक को तोड़ पाएंगे.

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शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha News) भी पिछले दो बार से पटना साहिब की सीट (Patna Sahib Lok Sabha Seat) बतौर बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर जीतते आए हैं, मगर यह भी सच्चाई है कि परिसीमन के पहले आरजेडी के रामकृपाल यादव (Ram Kripal Yadav) ने पटना की यह सीट 2004 में जीती थी. बाद में पटना साहिब और पाटलीपुत्र (Patliputra Lok Sabha Seat) नाम से दो लोकसभा सीट बनाई गई. पटना साहिब में जहां शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर के बीच मुकाबला है, वहीं पाटलीपुत्र में आरजेडी की मीसा भारती और बीजेपी के रामकृपाल यादव के बीच कड़ी टक्कर है.

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पहले बात पटना साहिब की करते हैं. परिसीमन के बाद पटना साहिब में कायस्थ वोट ही निर्णायक हैं और इस बार दो कायस्थ मैदान में हैं और एक तीसरे कायस्थ नेता भी हैं जो परदे के पीछे से इस चुनाव में असर डाल रहे हैं. जी हां मैं राज्यसभा के सांसद आरके सिन्हा की बात कर रहा हूं. उन्होंने अपनी संपत्ति 800 करोड़ की घोषित की है और वे अपने बेटे के लिए टिकट चाहते थे. यही वजह है कि जब लोकसभा का टिकट लेकर रविशंकर प्रसाद पटना पहुचे थे तो एयरपोर्ट पर ही आरके सिंहा और रविशंकर प्रसाद के सर्मथक भिड़ गए थे. मगर सच्चाई यह है कि पटना साहिब के 6 में से 5 विधानसभा पर बीजेपी का कब्जा है और फतुहा की एक सीट आरजेडी के पास है.

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2009 में पटना साहिब में बीजेपी को 57 फीसदी और 2014 में 55 फीसदी वोट मिले थे. मगर इस बार दो कायस्थ नेताओं के बीच टक्कर है और मतदाता बंटे हुए हैं. लोग यह मानकर चल रहे हैं कि दोनों हवा हवाई नेता हैं. जैसे शत्रुध्न सिन्हा नहीं आते थे, वही हाल रविशंकर प्रसाद का भी होगा. लोग यह भी कहते हैं कि रविशंकर प्रसाद तो जीवन भर राज्यसभा में रहे. पिछला चुनाव उन्होंने 45 साल पहले लड़ा था वो भी पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ का. उस समय लालू यादव अध्यक्ष पद पर जीते थे और सुशील मोदी और रविशंकर प्रसाद अन्य पदों पर जीतने में सफल हुए थे. तब से लेकर अभी तक उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है. यहां तक कि स्थानीय निकाय का भी नहीं.

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पटना साहिब के कायस्थ मतदाता थोड़े कन्फयूज हैं, क्योंकि लोग यह कह रहे हैं कि दोनों तो कायस्थ हैं और रविशंकर प्रसाद तो पहले से ही राज्यसभा में हैं और उनका टर्म अभी 5 साल के लिए बचा हुआ है. ऐसे में एक कायस्थ यानि शत्रुघ्न सिन्हा को हराना मतलब एक कायस्थ सांसद की कमी करना होगा. तर्क चाहे जो भी हो शत्रुघ्न सिन्हा हो मस्लिम यादव और कांग्रेस वोटों का भरोसा है. साथ में उनका अपना स्टार पावर यानि बिहारी बाबू का तमगा. उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कायस्थ वोट में सेंध लगा दी तो बात बन सकती है. वहीं, रविशंकर प्रसाद को प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ पार्टी संगठन पर भरोसा है, क्योंकि ये बीजेपी की परंपरागत सीट है. फैसला जो भी आए मगर मुकाबला तगड़ा है.

VIDEO: बिहार की पटना साहिब सीट पर दिलचस्प हुआ मुकाबला