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साध्वी प्रज्ञा प्रचार शुरू करते हुए हो पड़ीं भावुक, कहा- मुझे रात-रात भर बेल्ट से पीटा गया

बीजेपी की प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर के प्रचार शुरू करने से पहले ही उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने के लिए अदालत में याचिका दायर हो गई

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खास बातें

  1. भोपाल लोकसभा सीट पर दिग्विजय सिंह के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
  2. प्रज्ञा ठाकुर ने पुलिस हिरासत में कथित ज्यादती का जिक्र किया
  3. पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए भावुक हो पड़ीं साध्वी प्रज्ञा
भोपाल:

भोपाल के अपने पहले चुनावी कार्यक्रम में भगवा पहने पहुंचीं 49 साल की प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुद्दों को भावुकता के अंदाज में लपेटा और कथित तौर पर पुलिसिया ज्यादती की बातें करते हुए राजनीति नहीं बल्कि धर्मयुद्ध लड़ने की हुंकार भरी. इससे पहले उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने के लिए अदालत में याचिका भी दायर हो गई.
     
हुजूर विधानसभा क्षेत्र से आए कार्यकर्ताओं के सामने प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा 'जब मुझे गैरकानूनी तरीके से लेकर गए तो 13 दिन तक रखा. हिरासत में मुझे मोटे बेल्ट से पीटा गया. उसे झेलना आसान नहीं था. पूरा शरीर सूज जाता था, सुन्न पड़ जाता था. दिन और रात पीटते थे. मैं आपको अपनी पीड़ा नहीं बता रही हूं. लेकिन इतना कह रही हूं कि कोई महिला कभी इस पीड़ा का सामना न करे. पीटते-पीटते गंदी गालियां देते थे. वे कहलवाना चाहते थे कि तुमने एक विस्फोट किया है और मुस्लिमों को मारा है. सुबह हो जाती थी पिटते-पिटते, पीटने वाले लोग बदल जाते थे लेकिन पिटने वाली मैं सिर्फ अकेले रहती थी.'
       
प्रज्ञा भावुक हुईं तो उनके साथ हॉल में बैठे लोग भी. यह पहली बार है, जब बुधवार को उम्मीदवारी के औपचारिक ऐलान के बाद उन्होंने स्थानीय लोगों के बीच सभा की. हुजूर से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रज्ञा पर लगे आरोपों पर कहा 'गंभीर आरोप नहीं हैं, बनावटी हैं, कांग्रेस ने हिन्दू धर्म को साधु-संतों को बदनाम किया, भगवा आतंकवाद दिग्विजय सिंह की देन थी. भोपाल राष्ट्र भक्तों का शहर है. यहां साध्वी जीतेंगी. उनकी वेदना यहां नया करेंट लाएगी.'

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प्रज्ञा ठाकुर को सितंबर 2008 में हुए मालेगांव धमाकों के मामले में गिरफ्तार किया गया था. अप्रैल 2017 में उन्हें जमानत मिली. भोपाल में उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से है. कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने कहा 'बीजेपी को यहां चेहरा बदलना पड़ा. ये जाहिर है कि पिछले सांसद ने यहां कोई काम नहीं किया, जनता तय कर चुकी है कि उसे विकास पर संवाद करना है. उसको ये बात करनी है कि बच्चे का भविष्य कहां है, नौकरी कहां है. चुनाव भावुकता के ऊपर होता तो 70 फीसद वोट उनके खिलाफ नहीं जाता. हम सिर्फ विकास पर बात करेंगे.'

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भोपाल लोकसभा सीट पर 1989 के बाद से लगातार बीजेपी का कब्जा रहा है. ऐसे में प्रज्ञा की दावेदारी को लेकर यहां के वोटरों की प्रतिक्रिया मिलीजुली है. कुछ युवा वोटरों ने कहा उन्हें नहीं लगता कि प्रज्ञा को टिकट देना चाहिए था. और भी उम्मीदवार मिलते. एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि उनको टिकट देना चाहिए. अभी भी उन पर आरोप है. किसी और को देते तो अच्छा उम्मीदवार साबित होता. हालांकि कुछ लोगों की राय जुदा थी उन्होंने कहा दिग्विजय पर भी कई आरोप हैं. उनके ऊपर आरोप लगे हैं, सिद्ध नहीं हुए हैं. भोपाल से बीजेपी जीतती है, दिग्विजय सिंह के चांस बहुत कम हैं.

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कुल मिलाकर बीजेपी ने दिग्विजय की छवि के सामने साध्वी की छवि खड़ी कर दी है, जिसने इस पूरे मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है. लेकिन प्रज्ञा की राह में अभी कई कानूनी अड़चनें भी हैं जिसकी शुरुआत उनके खिलाफ लगी याचिका से हो गई है. याचिका में कहा गया है  “साध्वी प्रज्ञा को जमानत स्वास्थ्य कारणों से मिली थी. लेकिन यह साफ है कि इस गर्मी में चुनाव लड़ने के लिए उनकी सेहत ठीक है. यानी उन्होंने अदालत को गुमराह किया है.”

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सन 2008 में मालेगांव में हुए बम धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. एनआईए ने इस मामले में प्रज्ञा को 2015 में क्लीन चिट दे दी थी लेकिन कोर्ट ने उन्हें बरी नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि ये मुश्किल है, क्योंकि धमाके में उनकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल हुआ था. मामले में प्रज्ञा पर मकोका के आरोप हट गए लेकिन यूएपीए के तहत मामला चलता रहा. बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें 2017 में जमानत दी थी.



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