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MP Election Result 2019: पूरे देश की तरह MP में भी चला 'मोदी मैजिक', कांग्रेस की हार के 5 कारण...

पूरे देश की तरह मध्‍यप्रदेश से भी कांग्रेस के लिए खराब खबर आई है. राज्‍य में हुए लोकसभा चुनाव (Election Result 2019)में कांग्रेस का लगभग सफाया ही हो गया है और कमल खुलकर खिल गया है. यह स्थिति तब है जब दिसंबर 2018 में ही हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी

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MP Election Result 2019: पूरे देश की तरह MP में भी चला 'मोदी मैजिक', कांग्रेस की हार के 5 कारण...

Madhya Pradesh Lok Sabha elections result 2019: एमपी में बीजेपी की बंपर जीत ने CM Kamal nath की चिंता बढ़ा दी है

MP Election Result 2019:  पूरे देश की तरह मध्‍यप्रदेश से भी कांग्रेस के लिए खराब खबर आई है. राज्‍य में हुए लोकसभा चुनाव (Election Result 2019) में कांग्रेस का लगभग सफाया ही हो गया है और कमल खुलकर खिला है. यह स्थिति तब है जब दिसंबर 2018 में ही हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और 'मामा' शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्‍व वाली बीजेपी सरकार को सत्‍ता से बेदखल होना पड़ा था. कांग्रेस पार्टी (Congress) यदि विधानसभा चुनाव के अपने प्रदर्शन को दोहराती तो करीब आधी या इससे कुछ अधिक सीटों पर कब्‍जा करती लेकिन 'मोदी मैजिक' ने राज्‍य के सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) के चेहरे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं. अपेक्षा के विपरीत बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव (Madhya Pradesh Lok Sabha elections result 2019) के प्रदर्शन को भी बेहतर करती नजर आ रही है. वह राज्‍य की 28 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और कांग्रेस केवल सीएम कमलनाथ के गृहनगर छिंदवाड़ा में ही आगे हैं. छिंदवाडा से कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ उम्‍मीदवार हैं और बढ़त बनाए हुए हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 27 सीटों पर कब्‍जा जमाया था और कांग्रेस दो सीटें की अपने नाम कर पाई थी.

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2019 के चुनाव में पूरे देश की तरह मध्‍यप्रदेश (MP Election Result 2019) के लोगों ने भी 'नमो अगेन' का नारा दोहराया. आखिर ऐसी क्‍या बात रही कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP)को धूल चटाने वाली कांग्रेस के पांच महीने बाद ही अपना खाता खोलने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे बड़ा कारण 'ब्रांड मोदी' ही है. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)की वोटरों के दिल में विश्‍वसनीयता बरकरार रही और इसी की परिणति बंपर जीत के रूप में आई. राज्‍य में बीजेपी को मिले इस समर्थन ने कांग्रेस को भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. जानते हैं उन कारणों पर नजर जिसके कारण कांग्रेस की हार हुई..

कर्ज माफी का वादा अधूरा रहा
विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि जीत हासिल करने के बाद वह 10 दिन के भीतर किसानों के दो लाख के भीतर के कर्ज (Loan waiver)माफ कर देंगे. लोगों ने इस वादे पर ऐतबार करते हुए कांग्रेस को सत्‍ता में ला दिया, लेकिन कुछ ऐसा होता रहा कि यह वह पूरी तरह से वादे पर अमल नहीं कर पाई. कांग्रेस सरकार में इस बारे में 10 दिन के अंदर आदेश तो जारी किया किया लेकिन कुछ किसानों के बेहद कम राशि के कर्ज माफ हुए. प्रक्रिया में भी देर हुई, ऐसे में कांग्रेस ने बचाव में कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण वादे को पूरा करने में देर हुई. बहरहाल यह तर्क किसानों को पूरी तरह संतुष्‍ट नहीं कर पाया.

बिजली का गुल होना फिर शुरू
बिजली के मामले में बीजेपी सरकार के समय में अच्‍छी स्थिति रही. गांवों और तहसील क्षेत्रों में भी पावरकट नहीं के बराबर था लेकिन कांग्रेस की सरकार आते ही पावर कट का दौर शुरू हो गया. बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chouhan)ने अपनी सभाओं में कहा, लालटेन का फिर से इंतजाम कर लीजिए, कांग्रेस की सरकार आ गई है और बिजली कटौती शुरू हो गई है. दिग्विजय सिंह जब राज्‍य के सीएम थे तब गांवों में ही नहीं शहरों में भी पावरकट आम बात थी. राज्य की कांग्रेस सरकार ने इसके लिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर दोष मढ़ा लेकिन यह बात भी लोगों के गले नहीं उतरे.

थोक में तबादले और लॉ एंड ऑर्डर का जुमला
राज्‍य में सत्‍ता संभालते ही कांग्रेस के राज में थोक में तबादले (Transfer)शुरू हो गई. इसे लेकर कर्मचारी वर्ग में खासी नाराजगी रही. हालत यह रही कि कुछ कर्मचारियों के तो दो-तीन माह के अंतरात में दो या तीन बार तबादले हुए. बीजेपी (BJP) ने आरोप लगाया कि कमलनाथ की कांग्रेस सरकार में तबादलों ने उद्योग का रूप ले लिया है. यहां भ्रष्‍टाचार चरम पर है. पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार में लॉ एंड ऑर्डर के मायने हैं-धनराशि ला और तबादले का ऑर्डर लेकर जा. कानून व्‍यवस्‍था को लेकर भी बीजेपी मुद्दा बनाने में सफल रही.

ब्रांड मोदी के आगे सब फेल
ब्रांड मोदी का जादू इस बार भी खूब चला. भले ही राज्‍य के लोगों ने विधानसभा चुनाव के दौरान 15 वर्ष से सत्‍ता पर काबिज बीजेपी सरकार को हराने के लिए वोट किया लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को लेकर वह संतुष्‍ट नजर आई. यही कारण रहा कि आम चुनाव में कांग्रेस को वोट देने वालों ने भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में मतदान किया. बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के जरिये पाकिस्‍तान को मुंहतोड़ जवाब देने के नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)के साहसिक फैसले को भी लोगों ने सराहा. केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना और उज्‍जवला योजना ने भी लोगों का विश्‍वास जीता.

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कांग्रेस नेताओं की सियासी खींचतान
कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव में कमलनाथ (Kamal Nath)और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia)ने जमकर मेहनत की थी ज्‍योतिरादित्‍य को सीएम पद का दावेदार भी माना जा रहा था लेकिन आखिर में फैसला कमलनाथ के पक्ष में हुआ. लोकसभा चुनाव के दौरान सिंधिया को पश्चिमी यूपी का प्रभार दे दिया गया. इस कारण वे मध्‍यप्रदेश के चुनावों में ज्‍यादा वक्‍त नहीं दे पाए. एक और दिग्‍गज नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) को भोपाल से उम्‍मीदवार बनाकर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला था. अंदरखाने इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव एकजुट होकर नहीं लड़ा. दिग्विजय को भोपाल सीट पर अकेला ही छोड़ दिया गया. कुछ सूत्र तो यहां तक कहते हैं कि यदि दिग्विजय जीतते तो राज्‍य की सियासत में उनकी फिर से एंट्री हो जाती और वे भविष्‍य में सीएम कमलनाथ के लिए चुनौती बन सकते थे. इसी तरह ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का चुनाव के आखिरी दौर की वोटिंग के पहले निजी कारणों से अमेरिका जाना भी लोगों के गले नहीं उतरा.

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