40 साल में पहली बार 'गांधी परिवार' ने खोया कांग्रेस का 'गढ़' अमेठी, ये भी हार चुके हैं राहुल गांधी से पहले

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में बीजेपी की प्रचंड जीत में कई ऐसे उलटफेर हुए जो काफी चौंकाने वाले रहे. भले ही राहुल गांधी वायनाड सीट से जीत दर्ज कर ली हो, लेकिन गांधी परिवार का कांग्रेस गढ़ कहा जाने वाला अमेठी लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा.

40 साल में पहली बार 'गांधी परिवार' ने खोया कांग्रेस का 'गढ़' अमेठी, ये भी हार चुके हैं राहुल गांधी से पहले

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी- (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में बीजेपी की प्रचंड जीत में कई ऐसे उलटफेर हुए जो काफी चौंकाने वाले रहे. भले ही राहुल गांधी वायनाड सीट से जीत दर्ज कर ली हो, लेकिन गांधी परिवार का कांग्रेस गढ़ कहा जाने वाला अमेठी लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा. उन्हें केंद्रीय मंत्री व बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने करीब 55 हजार वोटों से हराया. मोदी लहर में अमेठी से राहुल गांधी को मिली करारी शिकस्त ने कांग्रेस के इतिहास के पन्नों में एक अनचाहा हिस्सा भी जोड़ दिया. जी हां, अमेठी से अभी तक गांधी परिवार से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सिर्फ संजय गांधी को सन् 1977 में हार का सामना करना पड़ा था. अब राहुल गांधी दूसरे नेता ऐसे कांग्रेसी नेता बन गए हैं, जिन्हें अपने ही गढ़ में किसी ने हराया.

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फिलहाल यदि बात करें सिर्फ गांधी परिवार के सदस्यों की तो अभी तक सिर्फ तीन इंदिरा गांधी (रायबरेली), संजय गांधी (अमेठी) और राहुल गांधी (अमेठी) को ही चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. बता दें, अमेठी लोकसभा सीट (Amethi Lok Sabha Seat) के साथ कांग्रेस (Congress) का अतीत सुनहरा रहा है और यह सिलसिला 1967 से शुरू हुआ था जब कांग्रेस (Congress) के विध्याधर वाजपेयी ने अमेठी में पार्टी की जीत की नींव रखी थी. 

1967-71 और 1971-77 तक विध्याधर वाजपेयी अमेठी के सांसद बने रहे. 1977-80 तक जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह अमेठी के सांसद बने रहे. अब अमेठी की बागडोर असली रूप से गांधी परिवार के हाथ आई जब 1980 में संजय गांधी कांग्रेस की ओर से सांसद चुने गए लेकिन दुर्भाग्यवश संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत के बाद यह जिम्मा गांधी परिवार के ही राजीव गांधी को दिया गया. राजीव गांधी 1981 से लेकर 1991 तक अमेठी सीट के सांसद बने रहे.

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बम धमाके में राजीव गांधी के निधन के बाद यह जिम्मेदारी कांग्रेस के सतीश शर्मा को सौंपी गई, सतीश शर्मा ने अमेठी सीट की बागडोर 1991 से लेकर 1998 तक संभाली और 1998 में भाजपा के संजय सिन्हा ने सतीश शर्मा को अमेठी लोकसभा चुनाव में शिकस्त दी. यह कार्यकाल बहुत लंबा नहीं जा सका और 1999 में राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने संजय सिन्हा को चुनाव में हराया और 1999-2004 तक अमेठी की सांसद बनी रही. इसके बाद 2004 से अबतक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी के सांसद बने हुए हैं. कुल मिलाकर अबतक कांग्रेस का कोई भी नेता अमेठी सीट से हारा नहीं है, और अब अगर राहुल गांधी अपने गढ़ से हारते हैं तो ये गांधी परिवार के पहले सदस्य होंगे जो अमेठी से लोकसभा चुनाव हारेंगे. बता दें कि एक दफा राजीव गांधी से मुकाबला करने के लिए मेनका गांधी मैदान में निर्दलीय उतरी थीं और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

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