चुनाव के दौरान सेना के नाम पर राजनीति करने के खिलाफ राष्ट्रपति को लिखे पत्र पर छिड़ा विवाद, पूर्व सैनिकों ने मुद्दे से खुदको किया अलग

राष्ट्रपति को लिखे पत्र की बात से सेना के कुछ पूर्व वरिष्ठ अफसर अब खुदको अलग करते दिख रहे हैं. उनका कहना है कि राष्ट्रति रामनाथ कोविंद को लिखी ऐसी किसी भी चिट्ठी या मेल का उन्होंने समर्थन नहीं किया है.

चुनाव के दौरान सेना के नाम पर राजनीति करने के खिलाफ राष्ट्रपति को लिखे पत्र पर छिड़ा विवाद, पूर्व सैनिकों ने मुद्दे से खुदको किया अलग

प्रतीकात्मक चित्र

खास बातें

  • यूपी के सीएम ने भी सेना को बताया था मोदी की सेना
  • चुनाव आयोग ने तलब की थी रिपोर्ट
  • सेना अधिकारियों ने राष्ट्रपति को लिखा था पत्र
नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय सेना को लेकर हो रही राजनीति के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र लिखने के मामले में एक नया विवाद शुरू हो गया है. दरअसल, राष्ट्रपति को लिखे पत्र की बात से सेना के कुछ पूर्व वरिष्ठ अफसर अब खुदको अलग करते दिख रहे हैं. उनका कहना है कि राष्ट्रति रामनाथ कोविंद को लिखी ऐसी किसी भी चिट्ठी या मेल का उन्होंने समर्थन नहीं किया है. हालांकि, इन्हीं में से एक अधिकारी मेजर जनरल सुनील वोमबटकेरे ने एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि उनके साथी ऐसा क्यों और किसके दबाव में कह रहे हैं. उन्होंने एनडीटीवी से बात करते कहा कि मैं सच में यह नहीं कह सकता है कि वह अब राष्ट्रपति को लिखे पत्र से खुदको अलग क्यों कर रहे हैं. हो सकता है उनके पास इसके लिए खुदकी वजहें हों और मैं उनका सम्मान करता हूं. लेकिन मैंने इस पत्र को लेकर इन सभी अफसरों को ई-मेल करके इनकी सहमति ली थी. इसके बाद ही यह पत्र तैयार किया गया था. पूर्व एयरचीफ मार्शल निर्मल चंद्र सूरी और सेवानृवित्त आर्मी चीफ जनरल एसएफ रोडिर्ग्स इस पत्र को लेकर अपनी सहमति जताई थी. ॉ

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गुरुवार को वोमबटकेरे ने इन अधिकारियों के उस दावे को भी बेबुनियाद बताया जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ई-मेल भेजने से पहले उसमें लिखी चिजों से उन्हें अवगत नहीं कराया गया. सूरी ने इस मेल को साथ के साथ देखा था क्योंकि यह मेल पहले सभी को एक साथ भेजा गया था. मेजर जनरल सुनील वोमबटकेरे ने कहा कि मैं यह नहीं बता सकता कि आखिर राष्ट्रपति जी के कार्यकाल की तरफ से यह बात क्यों कही जा रही है कि उन्हें इस तरह का कोई मेल मिला ही नहीं. जबकि यह मेल मेजर प्रियदर्शन चौधरी की तरफ से राष्ट्रपति भवन के तीन मेल ऐड्रेस पर भेजा गया था. जिनमें से एक मेल आईडी तो presidentofindia@rb.nic.in.था. मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिरी उन्हें यह मेल कैसे नहीं मिला. 

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पूर्व एयर चीफ मार्शल ने कहा कि उनका समर्थन संदर्भ में बहुत विशिष्ट था. उन्होंने कहा कि मेरा कथन केवल इस संदर्भ में था कि सशस्त्र बलों को राजनीतिक रूप से निरन्तर बने रहना होगा और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के माध्यम से सेवा करनी चाहिए. यह सब मैंने समर्थन किया है.

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र्व वायु सेना प्रमुख मार्शल सूरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भारतीय सेना के "मोदीजी के सेना (पीएम नरेंद्र मोदी के सैनिकों)" के रूप में कथित संदर्भ पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, उन्होंने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर पर्याप्त जानकारी नहीं है ."सेना का क्या मतलब है? इसका मतलब है कि जो लोग आपका समर्थन करते हैं. इस संदर्भ में, भाजपा के सभी सदस्य अपने नेता का समर्थन करते हैं, और इसलिए उन्हें मोदीजी की सेना कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि 2014 में जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया, वे मोदीजी की सेना हैं. प्रधान मंत्री, वह मुख्य कार्यकारी हैं और इसलिए, हम सभी उनके सेना हैं. सशस्त्र बल कोई अपवाद नहीं हैं.

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राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि यह  नेताओं के लिए "अस्वीकार्य" था, जो सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय लेते हैं और सशस्त्र बलों को "मोदीजी की सेना" के रूप में संदर्भित करते हैं. जहां कांग्रेस ने भाजपा पर हमला करने के पत्र का हवाला दिया, वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे "निहित समूहों द्वारा हस्ताक्षरित नकली पत्र" करार दिया था

 
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