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GROUND REPORT: यूपी की इन 15 सीटों पर कर्ज में दबे गन्ना किसानों का क्या होगा रुख?

उत्तर प्रदेश के 15 लोकसभा क्षेत्र गन्ना बेल्ट में, 50 लाख परिवार और दो करोड़ वोटर गन्ने की खेती पर आश्रित

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खास बातें

  1. गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर तीन से पांच लाख रुपये बकाया
  2. कर्ज लेकर गन्ने की खेती कर रहे किसान परेशान
  3. सरकार ने 14 दिन में भुगतान कराने का वादा पूरा नहीं किया
लखीमपुर खीरी:

उत्तरप्रदेश (UP) के 40 लोकसभा क्षेत्रों में देश का आधा गन्ना पैदा होता है. इनमें से आठ लोकसभा सीटों पर पहले फेज़ में चुनाव (Loksabha Elections) है. गन्ना किसान परेशान हैं क्योंकि चीनी मिलों पर उनका करीब 12000 करोड़ बकाया है जबकि सरकार ने 14 दिन में पूरे पेमेंट का वादा किया था. इन क्षेत्रों में गन्ना किसानों की परेशानियां भी चुनावी मुद्दा हैं.

यूपी के 15 लोकसभा क्षेत्र गन्ना बेल्ट में हैं. इन क्षेत्रों के 50 लाख परिवार और दो करोड़ वोटर इस पर आश्रित हैं, लेकिन जो चीनी आपके मुंह में मिठास घोलती है वह किसानों के लिए कड़वाहट की बाइस बनी है. गन्ना किसानों का हाल जानने हम नेपाल की तराई के जिले लखीमपुर खीरी पहुंचे. इसे चीनी का कटोरा भी कहते हैं. यहां 15 लाख किसान गन्ना उगाते हैं. यहां नौ चीनी मिलें हैं.

खीरी में बहुत सारे लोग विक्रमजीत सिंह के खेत पर मौजूद मिले. हमने उनसे जानना चाहा कि क्या उनका पैसा बाकी है? एक किसान ने कहा बाकी होगा वही चार,साढ़े चार लाख रुपये. दूसरे ने बताया पांच लाख रुपये. एक अन्य किसान ने कहा तीन-साढ़े तीन लाख रुपये बाकी है. बाकी कुछ किसानों ने भी तीन से पांच लाख रुपये बाकी होने की बात कही.


सीएम योगी की चीनी मिल मालिकों को चेतावनी: किसानों के गन्ने के बकाए का भुगतान करो या जेल जाओ

यूपी में 40 लोकसभा क्षेत्रों में गन्ने की खेती होती है. सबसे ज़्यादा गन्ना उत्पादन वाले प्रदेश के इस हिस्से को गन्ना बेल्ट कहते हैं. इनमें सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, नगीना, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, पीलीभीत, खीरी, शाहजहांपुर और सीतापुर शामिल हैं.

गन्ना उगाने की लागत 46000 रुपये एकड़ आती है. किसान कर्ज लेकर गन्ना बोते हैं. इस पर ब्याज देते हैं. जबकि गन्ने का भुगतान उन्हें एक-एक साल तक नहीं मिलता. खीरी के विक्रमजीत सिंह और उनके परिवार के गन्ने के लाखों रुपये बाक़ी हैं लेकिन चीनी मिलों को लगातार गन्ना भेज रहे हैं. इसके अलावा कोई चारा नहीं है.

गन्ना किसान विक्रमजीत सिंह का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत तो यह होती है कि हमारा अपना पैसा, निजी पैसा चीनी मिल में पड़ा हुआ है और हमने बैंक से लिया था, साहूकार से लिया. हम लेट हो गए तो हमारा अपना पैसा होते हुए भी चार की जगह 10 पर्सेंट, 14 पर्सेंट जुर्माना देना पड़ता है.

गन्ना किसानों को बड़ी राहत देने की तैयारी में मोदी सरकार, महंगी हो सकती है चीनी

चुनाव में फिर गन्ना किसानों के बकाया का मुद्दा उठा है. एक-दूसरे पर तोहमत जड़ी जा रही है. मेरठ में पीएम नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को कहा कि साथियों हालत यह थी कि सपा की सरकार ने गन्ना किसानों की 35000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बक़ाया योगी जी के लिए छोड़ दिया.

खीरी में सपा-बसपा गठबंधन की उम्मीदवार पूर्वी वर्मा गन्ना किसानों के बीच प्रचार कर रही हैं. पूर्वी एमबीबीएस भी हैं और जेएनयू से पब्लिक हेल्थ में पीएचडी भी हैं. वे कहती हैं कि 19 मार्च 2017 तक योगी सरकार के आने से पहले 21577.48 करोड़ का गन्ना खरीदा गया और 15168.07 करोड़ का भुगतान हो गया. तो पीएम कैसे 35000 करोड़ का बकाया बता रहे हैं.

लखीमपुर खीरी सीट पर समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार पूर्वी वर्मा का आरोप है कि बीजेपी सरकार ने 14 दिन में भुगतान का वादा तोड़ा है. उन्होंने कहा कि 'खुद यहां पर माननीय मोदी जी आए थे और उन्होंने ऐसे ही कहा था जैसे हम आपको बता रहे. लखीमपुर खीरी तो चीनी का कटोरा है. यहां का पसीना भी, यहां के किसानों का पसीना भी स्वीट होता है. हम यहां पर जैसे ही सरकार बनती है 14 दिनों के अंदर भुगतान कराएंगे.' उन्होंने कहा कि 'आज सच में हमारे जो मजदूर हैं, गन्ना किसान हैं आज भी वे वेट कर राहे हैं कि वे 14 दिन नहीं आए हैं..14 महीने बीत गए हैं..60 महीने बीत गए हैं.'

VIDEO : गन्ना किसानों को नहीं मिल रहा दाम

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जिस गन्ने को दो करोड़ वोटर उगाते हैं वह अक्सर चुनावी मुद्दा नहीं बन पाता क्योंकि पोलिंग आते-आते सियासत वोटरों को जाति-धर्म में बांट देती है और वोट उसी पर पड़ जाता है.


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