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सुखराम: घोटाले में नाम आने पर कांग्रेस ने निकाला, खुद की पार्टी बनाई, BJP में भी रहे, अब फिर थामा 'हाथ'

जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा मंडी संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहते है. भगवा पार्टी द्वारा मंडी सीट से मौजूदा सांसद रामस्वरूप शर्मा को फिर से टिकट दिये जाने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी.

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खास बातें

  1. घोटाले में नाम आने पर कांग्रेस से निकाला गया
  2. अभी पोते के साथ फिर थाम 'हाथ'
  3. कहा- मेरी घर वापसी हुई
नई दिल्ली:

पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम (Sukh Ram) और उनके पोते आश्रय शर्मा सोमवार को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात के बाद कांग्रेस में शामिल हो गये. सुखराम ने इसे अपनी ‘घर वापसी' बताते हुए कहा कि कांग्रेस (Congress)में बुजुर्गों का सम्मान है. सुखराम को टेलीकॉम घोटाले में नाम आने के बाद कांग्रेस से निकाल दिया गया था. सुखराम का पार्टी में स्वागत करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘हम सबके लिए हर्ष की बात है कि उत्तर भारत के कद्दावर नेता पंडित सुखराम जी और उनके पौत्र कांग्रेस में फिर से शामिल हुए हैं. हिमाचल प्रदेश खासतौर पर मंडी के लिए सुखराम जी विकास पुरुष हैं.' साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी को विश्वास है कि सुखराम और आश्रय शर्मा के कांग्रेस में आने से पार्टी को हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत में बल मिलने वाला है. 

हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा मंडी संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहते है. भगवा पार्टी द्वारा मंडी सीट से मौजूदा सांसद रामस्वरूप शर्मा को फिर से टिकट दिये जाने के बाद उन्होंने भाजपा (BJP) छोड़ दी थी.    


पूर्व संचार मंत्री सुखराम ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- मैं 92 साल का हूं, एक दोषी के रूप मे नहीं मरना चाहता 

सीबीआई द्वारा उनके आधिकारिक आवास से 3.6 करोड़ रुपए जब्त करने के 15 साल बाद साल 2011 में उन्हें दोषी ठहराया गया था. सीबीआई ने कहा कि ये अवैध टेलीकॉम कॉन्ट्रेक्ट के लिए ली गई रकम थी. इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति मामले में भी दोषी ठहराया गया था. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां अभी मामला लंबित है. 

टेलीकॉम घोटाले में नाम आने के बाद सुखराम को कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया था. इसके बाद उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन किया और उन्होंने चुनाव के बाद भाजपा से गठबंधन कर कर सरकार में शामिल हो गए थे. 2004 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने फिर कांग्रेस का हाथ थाम लिया, लेकिन साल 2017 में फिर छोड़ दिया और भाजपा ज्वाइन कर ली. हिमाचल प्रदेश के मंडी से साल 1962 से 1984 तक सांसद रहे सुखराम का मंडी संसदीय क्षेत्र में काफी प्रभाव है जहां से वह तीन बार सांसद निर्वाचित हुए थे.

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आश्रय के पिता अनिल शर्मा राज्य में 2012 से 2017 तक वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का हिस्सा रहे थे लेकिन पिछले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले वह भाजपा में शामिल हो गये थे. अभी वह जयराम ठाकुर नेतृत्व वाली हिमाचल की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. 

यह पूछे जाने पर कि क्या आश्रय को मंडी से कांग्रेस उम्मीदवार बनाये जाने की घोषणा की जायेगी तो हिमाचल प्रदेश के लिए एआईसीसी प्रभारी रजनी पाटिल ने बताया कि उनके नाम पर विचार किया जायेगा और अंतिम निर्णय 29 मार्च को किया जायेगा. मंडी हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला भी है. सुरजेवाला ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ वे ताकतें सत्तासीन हैं जिन्होंने अपनी पार्टी में पिता समान नेता लालकृष्ण आडवाणी को दरकिनार कर दिया और राजनीति से जबरन सेवानिवृत्त कर दिया. दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी है जो पंडित सुखराम जैसे बुजुर्गों का अशीर्वाद लेकर देश को नयी दिशा देना चाहती है.

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इस मौके पर सुखराम ने दिल्ली में कहा, ‘मैं राहुल जी से मिला तो उनकी एक बात से प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा कि आपसे सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ता भी है. इसके बाद मेरी घरवापसी हुई. मैं अपने घर वापस आया हूं. मैं जीवन के ऐसे मोड़ पर हूं कि किसी से द्वेश नहीं रखना चाहता हूं. पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से कुछ दूरियां हो गई थीं जिसका लोगों ने फायदा उठाया. लेकिन आज मैं फिर वापस आया हूं. अपने पौत्र को कांग्रेस के सुपुर्द कर रहा हूं.'

लालकृष्ण आडवाणी को भाजपा से टिकट नहीं दिए जाने के सवाल पर सुखराम ने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है कि कांग्रेस में बुजुर्गों का सम्मान है और युवाओं से भी काम लिया जाता है. उन्हें दुख है कि एक नेता जो भाजपा को इतना आगे ले गए उनको टिकट से वंचित किया गया है.

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(इनपुट- एजेंसी से भी)

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