सीएम के बेटे ने चुनाव हारने पर किया कथित हंगामा, खबर छापने वाले संपादक पर केस

Loksabha Election Results 2019 : कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी ने कथित रूप से चुनाव हारने के बाद मैसूर में नशे की हालत में काफी हंगामा किया

सीएम के बेटे ने चुनाव हारने पर किया कथित हंगामा, खबर छापने वाले संपादक पर केस

कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के पुत्र निखिल कुमारस्वामी (फाइल फोटो).

खास बातें

  • कन्नड़ अखबार विश्ववाणी में शुक्रवार 24 मई को छापी गई रिपोर्ट
  • निखिल ने अपने दादा देवेगौड़ा के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल किया
  • संपादक विश्वेश्वर भट्ट ने कुमारस्वामी का पक्ष भी छापा था
बेंगलुरु:

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा (HD Devegauda) की पार्टी जनता दल सेक्युलर (JDS) की लीगल सेल ने एक अखबार के सम्पादक के खिलाफ तक़रीबन आधा दर्जन धाराओं में मामला दर्ज कराया है. इनमें कुछ गैर जमानती धाराएं भी शामिल हैं. विश्वेश्वर भट्ट विश्ववाणी नाम के एक अखबार के संपादक हैं. उन्होंने शुक्रवार को एक खबर छापी कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी (Kumaraswamy) के बेटे निखिल कुमारस्वामी (Nikhil Kumaraswamy) ने चुनाव हारने के बाद मैसूर में नशे की हालत में काफी हंगामा किया. अपने दादा देवेगौड़ा के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल किया. जेडीएस का कहना है कि यह ख़बर गलत है.

कन्नड़ अख़बार विश्ववाणी (Vishwavani) में शुक्रवार 24 मई को छपी रिपोर्ट में बताया गया कि लोकसभा चुनाव (Loksabha Polls 2019) में हार के बाद किस तरह देवगौड़ा परिवार में अंतर्कलह का नज़ारा दिखा. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक मंड्या से चुनाव हारने के बाद निखिल कुमारस्वामी मैसूर के एक होटल में गए. वहां उन्होंने काफी शराब पी, हुड़दंग मचाया और होटल वालों के साथ बदसलूकी की. इसके बाद उन्होंने अपने दादा देवगौड़ा को फ़ोन किया और उनसे भी काफी ऊंची आवाज में बात की. उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने निखिल के लिए उस तरह प्रचार नहीं किया जिस तरह हासन में प्रज्ज्वल के लिए किया. जब हासन में जेडीएस और कांग्रेस कार्यकर्ता साथ-साथ काम कर सकते हैं तो मंड्या में क्यों नहीं. निखिल ने याद दिलाया कि आपने कहा था कि मंड्या के सात जेडीएस एमएलए, एक एमएलसी और तीन मंत्रियों की वजह से मेरे लिए ये केकवॉक होगा.

इसी रिपोर्ट की वजह से विश्व वाणी अखबार के सम्पादक विश्वेश्वर भट्ट के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. जबकि अख़बार का दावा है कि उसने अपने रिपोर्टर, होटल में मौजूद लोगों और अपने भरोसेमंद सूत्रों के आधार पर रिपोर्ट छापी है.

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विश्वेश्वर भट्ट ने कहा कि 'खबर छपने के बाद कुमारस्वामी ने मुझे कॉल किया और बताया कि पिछले 7-8 सालों से निखिल ने पीना छोड़ दिया है. मैंने कहा कि होटल के सूत्रों के मुताबक जो खबर थी वह मैंने छापी. हर जगह मेरी मौजूदगी ज़रूरी नहीं है. लेकिन फिर भी छापने से पहले मैंने अपने रिपोर्टर से बात की और उसने भी इस खबर को सही बताया, फिर मैंने छापा. शुक्रवार को खबर छपी. शनिवार को कुमारस्वामी ने मुझसे फोन पर बात की और निखिल ने भी. मैंने अगले एडिशन में सफाई भी छापी. और ये भी लिखा कि मेरा मकसद किसी की छवि को खराब करना नहीं था. अपने पूरे कैरियर में मैंने ऐसा नहीं किया.'

लेकिन कुमारस्वामी के पक्ष में छपने से पहले ही जनता दल सेक्युलर के कर्नाटक के लीगल सेल के महासचिव प्रदीप कुमार ने श्रीरामपुरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर विश्वेश्वर भट्ट के खिलाफ दर्ज करवा दी. जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है उनमें आईपीसी की धारा 468 भी शामिल है, यानी धोखाधड़ी के इरादे से किया गया काम.

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विश्वेश्वर भट्ट ने कहा कि 'मुझे पता चला कि रविवार को मेरे खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया और पुलिस ने बगैर जांच के इसको एफआईआर में बदल दिया. धारा 406, 420, 468, 499, 506, 504 और 501 के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसमें से 468 गैर जमानती है और सात साल तक की सजा है. पहली बार मेरे कैरियर में इस तरह का मामला सामने आया है.'

वैसे हाल के दिनों का यह अकेला मामला नहीं है जब किसी पत्रकार को इस तरह का उत्पीड़न झेलना पड़ा है. इससे पहले बीजेपी के सिम्पेथाइजर और पत्रकार हेमंत कुमार को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया था. उन पर कर्नाटक के गृह मंत्री  एमबी पाटिल का फ़र्ज़ी पत्र सोशल मीडिया पर शेयर करने का आरोप है और वे फिलहाल ज़मानत पर हैं. कर्नाटक के गृह मंत्री एमबी पाटिल का कहना है कि विश्वेश्वर भट्ट मामले में भी कानून संगत कार्रवाई की जाएगी.

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दरअसल कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी मीडिया से ख़ासे नाराज़ हैं. उनका मानना है कि मीडिया सच्चाई की पड़ताल किए बगैर खबर चलाता है. नेताओं के फूहड़ कार्टून के ज़रिए उनका मज़ाक उड़ाया जाता है. ये अलग बात है कि नेताओं के आचरण पर उनकी ऐसी कोई राय सामने नहीं आई है.

 
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