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Election 2019: बसपा मुखिया मायावती अपनी ही पार्टी के चुनाव चिन्ह 'हाथी' पर क्यों नहीं डाल पाईं वोट?

Lok Sabha Polls 2019 : बसपा(BSP) मुखिया मायावती (Mayawati) के जीवन में यह पहला मौका रहा, जब वह पार्टी के ही चुनाव चिह्न 'हाथी' पर नहीं दे पाईं वोट.

Election 2019: बसपा मुखिया मायावती अपनी ही पार्टी के चुनाव चिन्ह 'हाथी' पर क्यों नहीं डाल पाईं वोट?

Lok Sabha Polls 2019 : लखनऊ के बूथ पर सोमवार को पांचवे चरण के मतदान के दौरान वोट डालतीं बसपा मुखिया मायावती.(फाइल फोटो)

खास बातें

  • बसपा मुखिया मायावती अपने ही पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं डाल पाईं वोट
  • लखनऊ में हाथी की जगह दूसरे चुनाव चिह्न पर वोट डालने को हुईं मजबूर
  • जानिए माजरा क्या है...
नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव 2019 कई मायनों में खास है. समाजवादी पार्टी(Samajwadi Party) और बसपा(BSP) के बीच गठबंधन से कहीं ज्यादा अप्रत्याशित रहा है बसपा मुखिया मायावती(Mayawati) का अपनी ही पार्टी के चुनाव चिह्न पर वोट न दे पाने की मजबूरी. देश में अधिकृत पार्टी के तौर पर बहुजन समाज पार्टी जब से चुनाव प्रक्रिया में भाग ले रही है, तब से यह पहला मौका रहा, जब उन्हें 'हाथी' की जगह किसी और चुनाव चिह्न की बटन दबानी पड़ी. यह सब हुआ गठबंधन की मजबूरी के चलते. बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को पांचवे चरण में लखनऊ में अपने मताधिकार का प्रयोग किया. उन्होंने सिटी मांटेशरी कॉलेज के बूथ पर वोट डाला. दरअसल, यूपी में 38 सीटों पर बसपा तो 37 सीटों पर समाजवादी पार्टी लड़ रही है, दो सीटें अमेठी और रायबरेली कांग्रेस को दोनों दलों ने छोड़ीं हैं और अन्य सीटें गठबंधन के सहयोगी रालोद को मिलीं हुई हैं.

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लखनऊ की लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी के खाते में आई हैं. समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को यहां से चुनाव मैदान में उतारा. गठबंधन के कारण सपा उम्मीदवार पूनम सिन्हा को बसपा ने भी समर्थन दिया. भले कोई गठबंधन उम्मीदवार हो, मगर ईवीएम पर उसी पार्टी का चुनाव चिन्ह होता है, जिस पार्टी ने टिकट दिया हो या फिर जिसके सिंबल से वह व्यक्ति नामांकन किया हो. इस बार लखनऊ में गठबंधन के कारण बसपा का उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं है. इस लिए ईवीएम में बसपा का चुनाव चिह्न नहीं रहा. ऐसे में मायावती के सामने चुनाव चिह्न हाथी की जगह दूसरे सिंबल पर वोट डालने की मजबूरी रही.

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पहले भी हो चुका है सपा-बसपा का गठबंधन
 मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया था और उसके एक साल बाद हुए चुनाव से पहले बसपा के साथ रणनीतिक गठबंधन किया था. उस वक्‍त बसपा की कमान कांशीराम के पास थी. उस समझौते के तहत सपा और बसपा ने क्रमश: 256 और 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था. नतीजतन दोनों दलों को क्रमश: 109 और 67 सीटें मिली थीं. लेकिन यह दोस्‍ती बहुत लंबे समय तक नहीं चली और मई,1995 में बसपा ने मुलायम सिंह की सरकार से अपना समर्थन खींच लिया.सूत्र बताते हैं कि उस वक्त भी मायावती को हाथी की जगह अन्य चुनाव चिह्न पर वोट करने की मजबूरी सामने नहीं आई थी. क्योंकि जहां उनका वोट था, वहां पर बसपा उम्मीदवार ही था. 

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