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लोकसभा चुनाव 2019 : वोट डालने से पहले ये 8 मुद्दे वोटरों के दिमाग में जरूर होंगे

मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है और यह सरकार और राजनीतिक पार्टियों पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. 

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लोकसभा चुनाव 2019 : वोट डालने से पहले ये 8 मुद्दे वोटरों के दिमाग में जरूर होंगे

लोकसभा चुनाव 2019 : इस बार 7 चरणों में होगा चुनाव (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019)  को लेकर 'शंखनाद' हो चुका है. चुनाव आयोग ने ऐलान किया है कि देश में 7 चरणों में चुनाव होगा और नतीजे 23 मई को आएंगे. हालांकि यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि विपक्ष इस बार किन मुद्दों को लेकर मोदी सरकार को घेरेगा. लेकिन कुछ मुद्दे हैं जिन मतदाताओं की नजर जरूर रहेगी और इन मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष को दोनों को तौला जाएगा. पुलवामा हमले के बाद हुए एयर स्ट्राइक का आम जनता पर कितना असर होगा यह भी देखने वाली बात होगी. बीजेपी इसको भुनाने की पूरी कोशिश रही है और विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से सबूत मांगकर उसे घेरने की कोशिश कर रहा है. वहीं कुछ ऐसे सवाल हैं जो मोदी सरकार और विपक्ष दोनों के सामने हैं जिनका जवाब जनता के सामने तैयार रखना होगा और इन्हीं मुद्दों के आसपास चुनाव भी लड़ा जाएगा. ढाई महीने तक चलने वाली इस चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं के सामने विकल्प होगा कि वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन को दोबारा चुने या फिर किसी दूसरे विकल्प को चुने. मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है और यह सरकार और राजनीतिक पार्टियों पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. 

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1- राष्ट्रीय सुरक्षा
लोकसभा चुनाव से पहले पुलवामा हमला और उसके ऑपरेशन बालाकोट, फिर विंग कमांडर अभिनंदन का पाकिस्तान के फाइटर प्लान एफ-16 को मार गिराने की घटना की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. हालांकि विपक्ष मोदी सरकार पर सेना का इस्तेमाल राजनीति में करने का आरोप लगा रहा है तो मोदी सरकार का कहना है कि उसने सेना को फ्री हैंड दे दिया है. वहीं बीते 5 सालों में सुरक्षाबलों पर हुए हमले की खबरें आती रही हैं. 

2- किसान
मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों से जुड़े संगठनों ने कई बार आंदोलन किए हैं. किसानों की मुख्य मांगे उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना रहा है. इसके साथ ही उनकी मांग इन्फ्रास्ट्रक्चर और मदद के लिए सिस्टम को लेकर भी रही है. वहीं किसानों की मांग कर्ज माफ करने की भी रही है. पीएम मोदी ने साल 2022-23 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया है वहीं कांग्रेस ने कर्ज माफी का. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की सरकारों ने कर्ज माफी का ऐलान कर दिया. दूसरी मोदी सरकार ने भी हर साल किसानों को 6 हजार रुपये मदद देने का ऐलान कर दिया. कुल मिलाकर चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों ही किसानों को महत्व को कम से कम चुनाव से पहले जरूर समझ रही हैं. 

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3-बेरोजगारी
विपक्ष, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार पीएम मोदी सरकार से उस वादे के बारे में पूछ रहे हैं जिसमें उन्होंने 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. एक रिपोर्ट की माने तो भारत में बेरोजगारी की दर बीते चार दशकों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. साल 2018 में ही एक करोड़ नौकरियां कम हो गई हैं. बेरोजगारी इस चुनाव में एक अहम मुद्दा बनती जा रही है. इसी बीच मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का भी प्रावधान कर दिया है. 

4-गरीबी
गांवों में गरीबी कई चुनावों में अहम मुद्दा बन चुकी है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसका नतीजा बीजेपी भुगत चुकी है. आंकड़ों के मुताबिक गांवों में वोट बीजेपी के पास से छिटक गया है. हालांकि लोकसभा चुनाव में भी यह ट्रेंड रहेगा इस पर कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है. 

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5-व्यापार
जीएसटी और नोटबंदी का मुद्दा भी लोकसभा चुनाव में छाए रहने की उम्मीद है. हालांकि मोदी सरकार का दावा है कि दोनों ही फैसले देश की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक रहे हैं. सवाल इस बात है कि लघु और मझोले उद्योग से जुड़े लोग और मध्यम वर्ग इन फैसलों से कितना खुश है.

6-भ्रष्टाचार
इस चुनाव में बीजेपी जहां यूपीए सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार की लिस्ट याद दिलाएगी तो वहीं विपक्ष के पास राफेल का मुद्दा है. 

7-राम मंदिर 
80 फीसदी हिंदू आबादी वाले देश में राम मंदिर हर चुनाव से पहले मुद्दा बन जाता है. मामला सुप्रीम कोर्ट में है और मोदी सरकार इसी बात का सहारा लेकर सीधे तौर पर इसमें हाथ डालने से बचती रही है. हालांकि कभी राम मंदिर बीजेपी का मुख्य मुद्दा हुआ करता था और 

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8-राष्ट्रवाद+उदारवाद
राष्ट्रवाद का मुद्दा भी इस बार वोटरों का प्रभावित कर सकता है. बीते कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं हुईं जो पहचान, बोलने की आजादी जैसे अधिकारों के मुद्दे के लिए खतरा बनती नजर आई हैं. कुछ लोगों का कहना है कि समाज में असहिष्णुता भी बढ़ी है. 

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