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लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही बंद हो गया नमो टीवी

चुनाव प्रचार की अवधि खत्म होने के बाद भी नमो टीवी पर चुनाव संबंधित खबरें प्रसारित करने के लिए चुनाव आयोग ने बीजेपी को नोटिस भेजा था.

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लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही बंद हो गया नमो टीवी

17 मई को चुनाव प्रचार खत्म कर देने के साथ ही नमो टीवी बंद हो गया है.

खास बातें

  1. 31 मई को हुई थी चैनल की शुरुआत
  2. नमो एप का हिस्सा था नमो टीवी
  3. विपक्षी दलों ने नमो टीवी को लेकर साधा था निशाना
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों और अन्य चुनावी संदेशों का प्रचार करने वाला बीजेपी प्रायोजित चैनल नमो टीवी (NAMO Tv) आखिरकार बंद हो गया है.  सूत्रों ने बताया कि यह 17 मई को बंद कर दिया गया जब लोकसभा चुनाव के लिए सारा प्रचार अभियान खत्म हो गया. ये चैनल 31 मार्च से जब से शुरू हुआ तभी से विवादों में रहा है. गोपनीयता की शर्त पर बीजेपी के नेता ने कहा, ‘‘नमो टीवी लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के प्रचार अभियान के माध्यम के रूप में लाया गया. चुनाव खत्म होने के साथ ही इसकी अब कोई जरुरत नहीं है इसलिए 17 मई से जब सारा प्रचार खत्म हो गया तो इसे भी बंद कर दिया गया.''

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इससे पहले दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव प्रचार की अवधि खत्म होने के बाद भी नमो टीवी पर चुनाव संबंधित खबरें प्रसारित करने के लिए बीजेपी को नोटिस भेजा था लेकिन पार्टी ने कहा कि उन्होंने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया. अप्रैल में निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया था कि नमो टीवी पर दिखाए जाने वाले सभी रिकॉर्डेड कार्यक्रम पूर्व प्रमाणित हों. इसके बाद दिल्ली निर्वाचन आयोग ने बीजेपी को उसकी मंजूरी के बिना टीवी पर कोई भी सामग्री प्रसारित ना करने के लिए कहा. कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग से चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के लिए चैनल को रद्द करने के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को निर्देश देने के लिए कहा था जिसके बाद आयोग ने नमो टीवी पर मंत्रालय से रिपोर्ट मांगते हुए एक नोटिस जारी किया था.    

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रविवार 19 मई को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसका अपने ट्वीट में जिक्र कर चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया था. उन्होंने लिखा, ‘चुनावी बांड और ईवीएम से लेकर चुनाव के कार्यक्रम में छेड़छाड़ तक, नमो टीवी, ‘मोदीज आर्मी' और अब केदारनाथ के नाटक तक चुनाव आयोग का मिस्टर मोदी और उनके गैंग के समक्ष समर्पण सारे भारतीयों के सामने जाहिर है. चुनाव आयोग का डर रहता था और उसका सम्मान होता था. अब नहीं रहा.'

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बता दें कि दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय (सीईओ) ने ‘नमो टीवी' के लोगो को मंजूरी दी थी लेकिन उसने इसकी सामग्री को ‘‘प्रमाणित'' नहीं किया था क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने भाषण मौजूद हैं. चुनाव आयोग ने को सीईओ के कार्यालय से इस बारे में जानकारी देने को कहा था कि प्रमाणन समिति ने कभी राजनीतिक सामग्री को मंजूरी दी थी या नहीं. बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के अनुसार, ‘नमो टीवी' उस ‘नमो एप' का हिस्सा था, जिसे पार्टी संचालित करती है और इस डिजिटल संपत्ति का स्वामित्व उसी के पास है. (इनपुट-भाषा)

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