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लोकसभा चुनाव: पहले फेज में सबसे धनी उम्मीदवार के पास 895 करोड़, 10 कैंडिडेट्स पर हत्या का केस- देखें पूरी लिस्ट

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) के पहले फेज का मतदान 11 अप्रैल को किया जाना है. कुल 1266 उम्मीदवारों में कई ऐसे कैंडिडेट्स हैं, जो करोड़पति हैं तो वहीं कुछ ऐसे हैं जो बेहद गरीब भी हैं.

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लोकसभा चुनाव: पहले फेज में सबसे धनी उम्मीदवार के पास 895 करोड़, 10 कैंडिडेट्स पर हत्या का केस- देखें पूरी लिस्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) के पहले फेज का मतदान 11 अप्रैल को किया जाना है. कुल 1266 उम्मीदवारों में कई ऐसे कैंडिडेट्स हैं, जो करोड़पति हैं तो वहीं कुछ ऐसे हैं जो बेहद गरीब भी हैं. हालांकि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी जानकारी विस्तृत रूप से दी गई है. एडीआर द्वारा मिली जानकारी के अनुसार पहले फेज में सबसे अमीर उम्मीदवार कांग्रेस के केवी रेड्डी हैं, जो तेलंगाना के चेवल्ला संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने अपने हलफनामे में 895 करोड़ की संपत्ति घोषित की है. वहीं दूसरे नंबर पर सबसे अमीर उम्मीदवार वाईएसआर कांग्रेस के नेता पीवी पोटलूरी हैं. पीवी पोटलूरी आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं.

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पहले चरण में जिन 1266 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है उनमें आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से YSR कांग्रेस उम्मीदवार पीवी पोटलूरी 347 करोड़ की संपत्ति के साथ दूसरे सबसे अमीर हैं. पहले फेज में 401 (32%) करोड़पति उम्मीदवार हैं, जबकि उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 6.63 करोड़ है. हैरान करने वाली बात ये है कि इन चुनावों में 23 उम्मीदवारों ने डिक्लेयर किया है कि उनके पास कोई संपत्ति नहीं है जबकि एन प्रेम कुमार (चेवेल्ला, तेलंगाना) ने 500 रुपए और राजेंद्र केन्दुरका (कोरापुट, ओडिशा) ने 565 रुपयेकी संपत्ति घोषित की है.

चिंता की बात ये है कि 1266 उम्मीदवारों में से 213 (37%) उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. 10 उम्मीदवारों पर हत्या का केस और 25 उम्मीदवारों पर हत्या की कोशिश का केस है. इलेक्शन वाच के सदस्य जगदीश चोकर ने एनडीटीवी से कहा, "ये पॉलिटिकल पार्टियों पर एक टिप्पणी है. वो ऐसे लोगों को टिकट क्यों देते हैं. पॉलिटिकल पार्टियों का फोकस सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार पर होता है. वो ये नहीं देखती कि उम्मीदवार का बैकग्राउंड कैसा है'' 

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साफ है, पैसे का बोलबाला और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की चुनाव मैदान में बढ़ती मौजूदगी भारतीय लोकतंत्र के एक बड़ी चुनौती बनती दिख रही है. भले ही चुनावी तराज़ू के पलड़े पर अमीर और गरीब उम्मीदवारों का मोल बराबर का हो, ये चिंता का विषय भी है और चुनौती इससे निपटने की भी है.

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