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पीएम मोदी कांग्रेस को घेर रहे, खुद बीजेपी वंशवाद से घिरी; मध्यप्रदेश में टिकट के लिए बेशुमार दावेदार

कांग्रेस को परिवारवाद का पाठ पढ़ाने वाली भारतीय जनता पार्टी के आला नेता अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट मांगने को कतार में खड़े

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पीएम मोदी कांग्रेस को घेर रहे, खुद बीजेपी वंशवाद से घिरी; मध्यप्रदेश में टिकट के लिए बेशुमार दावेदार

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी की चुनाव समिति की बैठक में शामिल हुए कई नेता अपने परिजनों के लिए ही टिकट का दावा कर रहे हैं.

खास बातें

  1. गोपाल भार्गव का तर्क, नेता का बेटा जन सेवा न करे तो क्या भीख मांगे
  2. नेता की संतान क्या घांस काटेगी या पान की दुकान लगाएगी : बाबूलाल गौर
  3. मेरी बेटी मौसम कहीं भी किसी से कम नहीं, वह इंजीनियर है : गौरीशंकर बिसेन
भोपाल:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सुबह परिवारवाद को लेकर सोशल मीडिया पर कांग्रेस को घेरा लेकिन सवाल है कि पार्टी विद डिफरेंस का पाठ पढ़ाने वाली बीजेपी भी क्या परिवारवादी हो गई है? प्रधानमंत्री परिवारवाद को लेकर खासे मुखर हैं लेकिन मध्यप्रदेश में उनकी पार्टी के आला नेता अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट मांगने को कतार में खड़े हैं.

आभासी दुनिया में पीएम नरेंद्र मोदी अपने सियासी विरोधियों को परिवारवाद पर घेरते नजर आए लेकिन सियासी दुनिया, खासकर मध्यप्रदेश में उनकी पार्टी के ही वरिष्ठ नेता क्या कहते हैं? इस मामले में पीएम मोदी और उनकी पार्टी के नेताओं के विचारों में विरोधाभास है.

 


मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव अपने बेटे अभिषेक के लिए टिकट चाहते हैं. सवाल पूछने पर कहते हैं कि 'बेटे-बेटियों के टिकट पार्टी तय करेगी, लेकिन यदि किसी अधिकारी का लड़का नौकरी करता, यदि किसी सेठ का लड़का व्यापार करता है, किसान का लड़का किसानी करता है, तो राजनीति करने वाले का बेटा, जन सेवा करता है, बीसों साल से कर रहा है. तो इसकी जगह उसे क्या भीख मांगना चाहिए.'

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पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर विधानसभा में बहू कृष्णा गौर के टिकट के लिए लड़े. अब खुद के लिए ताल ठोंक रहे हैं. वे कहते हैं कि 'अगर वे कार्यकर्ता हैं तो टिकट क्यों नहीं मिलना चाहिए. ऐसा नहीं कि नेहरू परिवार में होता है, ऐसा हमारे यहां नहीं है. बेटा-बेटी भी काम कर रहे हैं. भार्गव साब ने ठीक कहा क्या वे घांस काटेंगे, पान की दुकान लगाएंगे.'

पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम के लिए टिकट चाहते हैं. उन्हें भी इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती. उन्होंने कहा कि 'साल 2014 में बीजेपी के संगठन ने मौसम का नाम प्रस्तावित किया था लेकिन नेतृत्व ने किसी और को प्रत्याशी बनाया और हमने उन्हें जिताकर लोकसभा भेजा. भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व जिस पैमाने पर टिकट देता है उसमें मेरी बेटी मौसम या अन्य कार्यकर्ता कहीं से भी कम नहीं है. वह बीई इंजीनियर है, नागपुर विश्वविद्यालय की टॉपर है. सिंधिया कन्या विद्यालय की भी टॉपर रही है और उसने अपना दावा रखा है.'
       
पूर्व मंत्री राघवजी भी अपनी बेटी ज्योति के लिए टिकट का दावा करते हुए कहते हैं कि 'ज्योति को टिकट दे दो. मैं तो चुनाव लड़ना नहीं चाहता, इसलिए मुझे ज्योति का नाम ठीक लगा क्योंकि सारे शहर से वह परिचित है. कई चुनावों में काम भी किया है. नगरपालिका अध्यक्ष भी रह चुकी है. इस नाते से क्षेत्र की जनता बहुत अच्छे से जानती है और इस नाते से मैंने सुझाव दिया है पार्टी को कि स्थानीय उम्मीदवार के रूप में सशक्त उम्मीदवार ज्योति हो सकती हैं उनको टिकट दिया जाना चाहिए.'

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बीजेपी में भाई-भतीजावाद की इस फेहरिस्त में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी नाम है. चर्चा है कि उनकी पत्नी साधना सिंह विदिशा से टिकट चाहती हैं. हालांकि वे खुद इस सवाल को टालते हुए कहते हैं कि मेरी जानकारी में नहीं है. शिवराज सवाल हंसकर टाल रहे हैं, लेकिन सहयोगी उनकी पत्नी साधना सिंह का नाम लोकसभा टिकटार्थी के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं. पूर्व मंत्री और शिवराज सिंह के करीबी रामपाल सिंह कहते हैं  कि विदिशा संसदीय क्षेत्र के करीब डेढ़ हजार कार्यकर्ता आए थे. वहां के विधायक और मंडल अध्यक्ष विदिशा से सिर्फ एक सिंगल नाम हमारी भाभी साधना सिंह जी का है. नाम हमारे प्रदेश के और केंद्रीय पदाधिकारी तक पहुंचा दिया गया है. साधना सिंह भारी मतों से जीतेंगी और इससे आसपास के लोकसभा क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ेगा.
    
केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर अपने बेटे देवेन्द्र के लिए, प्रभात झा अपने बेटे तुष्मुल के लिए, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने बेटे सुकर्ण के लिए तो पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया अपने बेटे सिद्धार्थ के लिए टिकट की इच्छा रखते बताए जा रहे हैं.

 

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लिस्ट सामने है तो घेरे में खड़ी कांग्रेस कैसे चुप रहती. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार करते हुए कहा 'देखिए बीजेपी का केवल एक ही कथन है, झूठ बोलो जोर से बोलो और बार-बार बोलो, और यही बार-बार जनता के समक्ष आगाज हो रहा है. जो पार्टी वर्ष वंशवाद के आरोप लगाती है आज उस पार्टी में झांक लो, वर्तमान के लोकसभा प्रत्याशियों में न केवल आज बल्कि पूर्व में भी कितना वंशवाद उसी दल में है. इनकी कथनी और करनी में सदैव जमीन आसमान का अंतर होता है.'

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मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 में से 26 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, कोशिश सारी सीटें फिर से जीतने की है. 15 साल बाद मध्यप्रदेश में सत्ता से बेदखल हुई बीजेपी अब तक चुनाव लड़ने को लेकर फिक्रमंद थी. अब चुनौती परिवारवाद की पनपती बीमारी से निबटने की भी है क्योंकि एक भी गलत टिकट विधानसभा की तरह पूरे गणित को बिगाड़ सकता है.



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