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BJP की रैली में भिड़े कार्यकर्ता, मंच पर चढ़कर करने लगे एक दूसरे से मारपीट, मंत्री ने किया बीच बचाव, देखें VIDEO

भाजपा ने पहले इस सीट से स्मिता वाघ को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया और उनकी जगह पाटिल को टिकट दे दी.

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मुंबई:

महाराष्ट्र में भाजपा (BJP) की एक रैली में पार्टी के दो पक्षों के बीच राज्य मंत्री की मौजूदगी में मारपीट हो गई. इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने मंच पर चढ़कर एक दूसरे से मारपीट  और नारेबाजी की. घटना मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर जलगांव में एक जनसभा के दौरान की है, जहां पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बदला है. उत्तर महाराष्ट्र की जलगांव लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार उन्मेष पाटिल के लिए यह रैली आयोजित की गई थी. भाजपा ने पहले इस सीट से स्मिता वाघ को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया और उनकी जगह पाटिल को टिकट दे दी. 

रैली के दौरान जब मारपीट की यह घटना हुई तो महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन, कई भाजपा नेताओं सहित स्मिता वाघ, उनके पति और पार्टी के जिला अध्यक्ष उदय वाघ, बीएस पाटिल मंच पर मौजूद थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व विधायक बीएस पाटिल और मौजूद सांसद एटी पाटिल ने स्मिता वाघ के खिलाफ प्रचार किया था और चाहते थे कि वाघ को लोकसभा चुनाव के लिए टिकट न मिले. 


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बुधवार को उदय वाघ और उनके समर्थकों ने बुधवार को अपना नियंत्रण खो दिया और बीएस पाटिल पर वाघ का टिकट कटवाने का आरोप लगाने लगे. मंत्री महाजन को मामले को शांत कराने के लिए दखल देना पड़ा. 

बता दें, उन्मेष पाटिल चालीसगांव से मौजूदा विधायक हैं. वाघ 28 मार्च को बतौर पार्टी प्रत्याशी जलगांव लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल कर चुकी थीं, जिन्हें बाद में वापस  लेना पड़ा. इसके बाद पाटिल ने नामांकन दाखिल किया था, उस वक्त पाटिल ने कहा था, ‘पार्टी से निर्देश मिलने के बाद मैंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया.' उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपना नामांकन भरा तो वाघ उनके साथ थीं, लेकिन उन्होंने इस प्रश्न पर कोई टिप्पणी नहीं कि आखिर क्यों प्रत्याशी बदल दिया गया. उन्होंने कहा, ‘वह (वाघ) पार्टी की कर्मठ कार्यकर्ता हैं. इस बात का कोई प्रश्न नहीं उठता कि नाम वापस लेने से उनके मन में कटुता का भाव आयेगा.'' 

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जलगांव को भाजपा का गढ़ माना जाता है. भाजपा सूत्र ने बताया कि वाघ को बदलने को फैसला तब किया गया जब पार्टी को लगा कि पाटिल के राकांपा उम्मीदवार गुलाबराव पाटिल को हराने के अवसर अधिक हैं. उन्होंने कहा कि शिवसेना के कुछ कार्यकर्ता भी वाघ की उम्मीदवारी से अप्रसन्न थे.



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