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राजस्थान कांग्रेस में आंतरिक संकट के बीच गहलोत कैंप का पलटवार- जारी की मुख्यमंत्री की सभाओं की LIST

मुख्यमंत्री के नज़दीकी सूत्रों ने गहलोत की सभाओं की लिस्ट जारी की है. इसमें जनसभाओं को लेकर अफ़वाहें फैलाने का आरोप लगाया गया है.

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राजस्थान कांग्रेस में आंतरिक संकट के बीच गहलोत कैंप का पलटवार- जारी की मुख्यमंत्री की सभाओं की LIST

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. जनसभाओं को लेकर अफ़वाहें फैलाने का आरोप
  2. नज़दीकी सूत्रों ने जारी की गहलोत की सभाओं की लिस्ट
  3. गहलोत ने 180 से ज़्यादा सभाएं और रैलियां की: सूत्र
जयपुर:

लोकसभा चुनाव में बेहद खराब नतीजों से कांग्रेस एक दोराहे पर आ गई है, जहां एक तरफ राहुल गांधी लगातार इस्तीफे पर अड़े हुए हैं, तो दूसरी तरफ राजस्थान में सभी सीटें हारने के बाद क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी पर खतरा बढ़ गया है. ऐसा माना जा रहा है कि लगभग 6 महीने पहले राजस्थान में जिस मुख्यमंत्री पद के लिए अशोक गहलोत ने एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया था आज वही कुर्सी डांवाडोल नज़र आ रही है. इन अटकलों को जगह इसलिए मिली है क्योंकि सचिन पायलट के बाद अशोक गहलोत ने भी राहुल गांधी से मुलाकात की. उधर, शनिवार को हुई सीडब्लूसी में राहुल गांधी ने गहलोत समेत कई वरिष्ठ नेताओं पर अपने बेटों पर ज्यादा और पार्टी पर कम ध्यान देने का आरोप लगाया था.

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इसके बाद आज अशोक गहलोत की तरफ़ से सफ़ाई भी आई है. मुख्यमंत्री के नज़दीकी सूत्रों ने गहलोत की सभाओं की लिस्ट जारी की है. इसमें जनसभाओं को लेकर अफ़वाहें फैलाने का आरोप लगाया गया है. लिस्ट में बताया गया कि अशोक गहलोत ने चुनाव के दौरान 180 से ज़्यादा सभाएं और रैलियां की. सूत्रों ने बताया कि 25 उम्मीदवारों में से 22 के नामांकन के दौरान भी गहलोत उनके साथ थे और कम से कम 3 बार हर क्षेत्र में गए. इसमें यह भी कहा गया कि गहलोत ने सिर्फ जोधपुर पर ध्यान दिया यह आरोप सही नहीं है. 

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आज गहलोत 45 मिनट तक मुलाकात के लिए राहुल गांधी के घर में थे. उनसे पहले सचिन पायलट जो कि राजस्थान की डिप्टी सीएम हैं कांग्रेस अध्यक्ष से मिले थे. बता दें कि सचिन की अगुवाई में ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन सीएम बनाने के वक्त वो गहलोत से पिछड़ गए थे. 

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बता दें कि अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जोधपुर से 2 लाख से ज़्यादा वोटों से चुनाव हार गए, जबकि मुख्यमंत्री यहीं से विधायक हैं और पांच बार विधायक रह चुके हैं. वैभव अपने पिता के गृह क्षेत्र सरदारपुर से भी अठारह हज़ार वोटों से पिछड़ गए. 

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उधर, अशोक गहलोत सरकार में मंत्री उदय लाल अंजाना की राय है कि वैभव को जोधपुर से नहीं पड़ोस के जालौर से चुनाव लड़ना चाहिए था. एक और दूसरे मंत्री रमेश मीणा का कहना है कि गहलोत नहीं पूरा प्रदेश नेतृत्व ज़िम्मेदारी ले. आपको बता दें कि  राजस्थान में कांग्रेस सिर्फ़ 25 लोक सभा सीटें ही नहीं हारी है लेकिन 200 विधानसभा में 185 में  पीछे रही है. अगर गहलोत की सीट  सरदारपुर से वैभव 18000  के पिछड़े है तो टोंक में सचिन पायलट भी कांग्रेस के उम्मीदवार को 22000 की मात से नहीं बचा पाए. 

VIDEO: राहुल गांधी के घर पर बैठक​



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