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नमो टीवी पर प्रधानमंत्री मोदी के बेरोकटोक प्रचार से उपजा विवाद, विपक्ष ने उठाए सवाल

सूचना प्रसारण मंत्रालय से मंज़ूरी प्राप्त चैनलों की लिस्ट में नमो टीवी चैनल शामिल नहीं, विज्ञापन प्लेटफार्म पर चलाने से इजाजत की जरूरत नहीं

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खास बातें

  1. क़ानून के झोल का फायदा उठाकर चलाया जा रहा नमो टीवी
  2. बीजेपी खुले तौर पर नमो टीवी को प्रमोट करने का आरोप
  3. सुरजेवाला ने कहा- 'सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का'
नई दिल्ली:

इन दिनों कई डीटीएच प्लेटफॉर्म पर नमो टीवी दिखाई पड़ रहा है. प्रधानमंत्री के भाषण और बीजेपी का प्रचार दिखाने वाले इस चैनल पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है. चुनाव आयोग ने इस मामले में सरकार से जवाब भी मांगा है.

नमो टीवी टाटा स्काई, एयरटेल, डिश- सब पर आ रहा है. आचार संहिता लागू होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के प्रचार में दिख रहे इस चैनल को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है. उसका कहना है कि चुनाव-प्रचार के दौरान डीटीएच सर्विस प्रोवाइडर कैसे नमो टीवी का प्रसारण कर सकते हैं? अगर सरकार के पास इसकी जानकारी है तो उसे अब तक बंद क्यों नहीं किया गया? सरकार की अनुमति के बिना ऐसा चैनल कैसे चल सकता है? बीजेपी खुले तौर पर नमो टीवी को प्रमोट कर रही है?

वित्त मंत्री अरुण जेटली से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि संबंधित विभाग इस पर सरकार का रुख साफ करेगा.


उधर सरकारी सूत्रों का दावा है कि नमो टीवी कोई सामान्य टीवी चैनल नहीं है. नमो टीवी को डीटीएच पर एक विज्ञापन प्लेटफोर्म के तौर पर चलाया जा रहा है. हालांकि सूचना प्रसारण मंत्रालय से मंज़ूरी प्राप्त चैनलों की लिस्ट में यह चैनल शामिल नहीं है. ऐसे विज्ञापन प्लेटफार्म चलाने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय की अनुमति की ज़रूरत नहीं है.

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सरकारी सूत्रों का कहना है कि नमो टीवी क़ानून के झोल का फायदा उठाकर चलाया जा रहा है. लेकिन फिर बीजेपी इसे आधिकारिक तौर पर प्रमोट क्यों कर रही है? और सरकार इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

VIDEO : नमो ऐप पर सवाल क्यों

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कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है.
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का, नमो टीवी इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है. प्रजातंत्र की कितनी परिपाटियों को अपने पांव और अहंकार के नीचे तोड़ और मरोड़ेंगे मोदी जी आप...चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए. हमने उन्हें लिखकर दिया है. इस देश में प्रजातंत्र नहीं बचेगा इस प्रकार से..."


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