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राजनाथ सिंह लखनऊ में आज भरेंगे पर्चा, मगर विपक्ष के उम्मीदवार का अब तक अता-पता नहीं

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपना पर्चा दाखिल करेंगे.

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नई दिल्ली:

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपना पर्चा दाखिल करेंगे. मगर हैरानी की बात है कि अब तक कांग्रेस ने इस सीट के लिए अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है. यानी राजनाथ सिंह के सामने लखनऊ से कांग्रेस या सपा-बसपा गठबंधन से कौन प्रतिद्वंदी होगा अब तक तय नहीं है. लखनऊ सीट काफी बीजेपी केलिए प्रतिष्ठित सीट है, क्योंकि यहां से सिर्फ राजनाथ सिंह ही सांसद नहीं हैं जो दोबारा जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं, बल्कि इस पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी सांसद रह चुके हैं. विपक्ष की ओर से अब तक कोई उम्मीदवार राजनाथ सिंह के खिलाफ सामने नहीं आया है, जबकि नामांकन की तारीख अगले दो दिनों में समाप्त हो जाएगी, जहां 6 मई को मतदान होंगे. 

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राजनाथ सिंह 2009 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से चुनाव जीते थे. मगर 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने लखनऊ से चुनाव लड़ाया और वहां भी उन्होंने जीत दर्ज की. राजनाथ सिंह आज नामांकन दाखिल करने से पहले रोड शो करेंगे और रोड शो के बाद जिला मजिस्ट्रेट के पास नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचेंगे. इस रोड शो में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल होने वाले थे, मगर अब चुनाव आयोग की ओर से 72 घंटे के लिए बैन किए जाने के बाद अब वह इस रोड शो में शामिल नहीं होंगे. 

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गौरतलब है कि लखनऊ सीट भाजपा के पास करीब दो दशकों से है. इस सीट पर भाजपा ने एक बार फिर राजनाथ सिंह को मैदान में उतारा है. 2014 में राजनाथ सिंह इस सीट से भारी मतों से जीते थे. हालांकि, अभी कांग्रेस और सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अहम लोकसभा सीट भी है, जहां से देश के कई शीर्ष नेता संसद पहुंचते रहे हैं. भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा इस सीट ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित, नेहरू जी की सलहज शीला कौल और देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं में से एक रहे हेमवती नंदन बहुगुणा भी इसी सीट से संसद तक पहुंचे. 1951से 1977 के बीच विजयलक्ष्मी पंडित, श्योराजवती नेहरू, पुलिन बिहारी बनर्जी, बी.के. धवन और शीला कौल कांग्रेस के सांसद रहे, जबकि1967 के चुनाव में आनंद नारायण मुल्ला चुनाव जीते थे. 

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1977 की कांग्रेस-विरोधी लहर में भारतीय लोकदल के प्रत्याशी के रूप में हेमवती नंदन बहुगुणा यहां से जीते, लेकिन 1980 में ही शीला कौल ने कांग्रेस की वापसी करवा दी, और 1984 में भी वही यहां से सांसद बनीं. 1989 में जनता दल के मान्धाता सिंह ने यहां कब्ज़ा किया, लेकिन उसके बाद से यहां BJP का कब्ज़ा बना हुआ है. 1991 के आम चुनाव को मिलाकर BJP के संस्थापकों में से एक अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां से लगातार पांच बार चुनाव जीता, और फिर 2009 में पार्टी के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने बाज़ी मारी. पिछले लोकसभा चुनाव में, यानी 2014 में यहां से BJP ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह को टिकट दिया, जो इस समय केंद्रीय गृहमंत्री हैं.



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