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रीता बहुगुणा जोशी: 24 साल बाद कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में हुई थीं शामिल, यहां जानिए पूरा सफर

रीता बहुगुणा जोशी (Rita Bahuguna Joshi) यूपी बीजेपी की बड़ी नेता और कैबिनेट मंत्री हैं. बीजेपी (BJP) ज्वाइन करने से पहले वह यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं.

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रीता बहुगुणा जोशी: 24 साल बाद कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में हुई थीं शामिल, यहां जानिए पूरा सफर
नई दिल्ली:

रीता बहुगुणा जोशी (Rita Bahuguna Joshi) यूपी बीजेपी की बड़ी नेता और कैबिनेट मंत्री हैं. बीजेपी (BJP) ज्वाइन करने से पहले वह यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं. उनके पिता हेमवती नंदन बहुगुणा यूपी के सीएम थे और उनकी मां कमला बहुगुणा भी सांसद रहीं. कांग्रेस (Congress)  में रीता 24 सालों तक रहीं लेकिन मतभेदों के बाद उन्होंने 20 अक्टूबर 2016 को बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. रीता ने विधानसभा चुनावों में मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव को हराया था. उनकी ब्राह्मण वोटों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. संयुक्त राष्ट्र की ओर से वह दक्षिण एशिया की सबसे प्रतिष्ठित महिलाओं में शुमार की जा चुकी हैं. रीता का जन्म 22 जुलाई 1949 को उत्तराखंड में हुआ. वह पढ़ने में शुरू से ही होशियार थीं. उन्होंने इतिहास में पीएचडी की है और वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रही हैं. उनके भाई विजय बहुगुणा उत्तराखंड के सीएम रहे हैं. उनके पति पीसी जोशी पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर हैं. 

कैसे शुरू हुआ सियासी सफर 


रीता का जन्म एक राजनीतिक परिवार में हुआ था. उनके पिता कांग्रेस के बड़े नेता थे और यूपी के सीएम रहे. उनकी मां भी सांसद रहीं. इसलिए रीता पर भी बचपन से ही राजनीति का प्रभाव रहा. हालांकि रीता पढ़ाई में शुरु से ही अच्छी थीं इसलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. 1995 से 2000 तक वह इलाहाबाद की मेयर रहीं. 2003 से 2007 तक वह ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं. इसके बाद वह नेशनल काउंसिल ऑफ वूमेन की वाइस प्रेसीडेंट बनीं. 2007 से 2012 तक उन्हें यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी दी गई. 

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उन्होंने 2 बार लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन इसमें वह हार गईं. 2012 में वह लखनऊ कैंट से विधायक चुनी गईं. 2014 में उन्होंने लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गईं. 2019 के लोकसभा चुनावों में वह यूपी के इलाहाबाद से मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं. रीता के साथ विवादों का नाता हमेशा रहा है. 16 जुलाई 2009 को उन्हें यूपी की पूर्व सीएम मायावती पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया गया था. बाद में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में मुरादाबाद जेल भेजा गया था. 2011 में भट्टा पारसौल में विरोध स्वरूप उन्होंने राहुल गांधी के साथ गिरफ्तारी दी थी. 



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