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RJD नेता ने पूछा- कभी PM मोदी के साथ फोटो खिंच जाने पर नाराज हुए नीतीश क्या प्रज्ञा के लिए वोट मांगने जाएंगे?

राष्ट्रीय जनता दल(RJD)के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने बिहार के सीएम नीतिश कुमार से पूछा है कि क्या वह प्रज्ञा सिंह ठाकुर के लिए भी वोट मांगने जाएंगे.

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RJD नेता ने पूछा- कभी PM मोदी के साथ फोटो खिंच जाने पर नाराज हुए नीतीश क्या प्रज्ञा के लिए वोट मांगने जाएंगे?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फाइल फोटो.

पटना:

राष्ट्रीय जनता दल(RJD)के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने बेगूसराय से एनडीए प्रत्याशी गिरिराज सिंह के लिए वोट मांगने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने फेसबुक पर लिखे पोस्ट में पूछा है कि क्या वह भोपाल से चुनाव लड़ रहीं साध्वी प्रज्ञा के लिए भी वोट मांगने जाएंगे. शिवानंद तिवारी ने कुछ यूं पोस्ट लिखकर नीतीश कुमार को घेरा है-  नीतीश जी क्या प्रज्ञा ठाकुर के लिए भी वोट मांगने जाएंगे ? कल बेगुसराय गए थे. वहां उन्होने गिरिराज जी के लिए वोट मांगा. गिरिराज बिहार की राजनीति के सबसे कट्टर चेहरा हैं. 2014 के चुनाव में भड़काऊ भाषण देने के मामले में उन पर मुक़दमा भी चल चुका है. कल नीतीश जी ने उनके लिए सिर्फ वोट ही नहीं मांगा ! बल्कि गिरिराज जी के साथ हाथ में हाथ मिलाकर हवा में भी लहराया. याद है ! कुछ इसी अंदाज में पंजाब की एक सभा में तब के नरेंद्र मोदी ने नीतीश जी का हाथ पकड़ कर फ़ोटो खिंचवा लिया था. नीतीश बहुत आग बबूला हुए थे. जैसे उनकी धर्म निरपेक्षता नरेंद्र मोदी के साथ छुआ जाने से अपवित्र हो गई हो.

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बिहार की राजनीति में गिरिराज, मोदी जी के विभाजनकारी व्यक्तित्व के ही लघु संस्करण हैं. उनके लिए वोट मांगने या उनके साथ हाथ में हाथ मिलाकर फ़ोटो खिंचवाने में नीतीश जी को अब संकोच नहीं हो रहा है. हमारे यहाँ लंबी तीर्थ यात्रा से लौटने के बाद पुनः समाज में शामिल होने के लिए लोग ‘नूने' मिलते हैं. गिरिराज के साथ बेगूसराय में  जिस तरह दिखाई दिए उससे तो यही लग रहा है कि कट्टरवादियों के साथ नीतीश जी नूने मिलाकर उसी समाज में शामिल हो गए हैं. इसलिए प्रज्ञा ठाकुर के लिए वोट मांगने में अब उन्हें संकोच क्यों होगा ?

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 'मोदी को सत्ता से हटाने के लिए लोहिया जैसे नेता की जरूरत'
 राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी इससे पूर्व एक फेसबुक पोस्ट में लिख चुके हैं कि अगर आज लोहिया होते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदख़ल करने के लिए विपक्षी दलों को एक जुट कर रहे होते. लोहिया मानते थे देश की राजनीति पर कांग्रेसी एकाधिकार की वजह से लोकतंत्र ख़तरे में है. लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होने ग़ैर कांगरेसवाद का अभियान शुरू किया था. गैर कांगरेसवाद उनकी रणनीति थी. उसका एक ख़ास संदर्भ था.जनसंघ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कम्युनिस्ट पार्टी के कामरेड भुपेश गुप्त उनके गैर-कांग्रेसवाद की रणनीति के सक्रिय सहयोगी थे. तब के संदर्भ में वह एक सफल रणनीति थी. उस रणनीति का परिणाम था कि आज़ादी के बाद पहली मर्तबा आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं. कांग्रेस की अपराजयता की धारणा टूटी. शिवानंद ने आगे लिखा कि जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, किसी भी रणनीति का मकसद तात्कालिक होता है. इसके उलट नीति स्थाई या लंबे समय के लिए होती है. लोहिया अगर आज होते और आज भी गैर-कांग्रेसीवाद का नारा दे रहे होते तो लोग उनका उपहास उड़ाते. देश की राजनीति में कांग्रेस की आज की हालत को दयनीय ही कहा जा सकता है. लोकसभा में तो आज उसे विरोधी दल की मान्यता भी प्राप्त नहीं है.

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वीडियो- नीतीश अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं : शिवानंद तिवारी 



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