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भाकपा और राजद के बीच गठबंधन को लेकर मनोज झा ने दिया बयान, कहा- कन्हैया कुमार की वजह से ही... 

मनोज झा ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन ने होने के बीच बेगूसराय से कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी रोड़ा बनी.  ऐसा इसलिए भी क्योंकि राजद को कन्हैया से जुड़े कई विवादों के चलते उनके चुनाव जीतने की क्षमता पर संदेह था.

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भाकपा और राजद के बीच गठबंधन को लेकर मनोज झा ने दिया बयान, कहा- कन्हैया कुमार की वजह से ही... 

कन्हैया कुमार को लेकर मनोज झा ने दिया बयान

खास बातें

  1. कन्हैया कुमार की उम्मीदवारों को लेकर दिया बयान
  2. भाकपा और राजद का गठबंधन ने होने पर भी रखी अपनी राय
  3. बेगूसराय से मैदान में हैं कन्हैया कुमार
नई दिल्ली:

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के बीच लोकसभा चुनाव के मद्देनजर गठबंधन न होने को लेकर राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने बयान दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन ने होने के बीच बेगूसराय से कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी रोड़ा बनी.  ऐसा इसलिए भी क्योंकि राजद को कन्हैया से जुड़े कई विवादों के चलते उनके चुनाव जीतने की क्षमता पर संदेह था. मनोज झा ने कहा कि भाकपा-राजद के बीच गठबंधन नहीं हो सकता था क्योंकि राजद अपने उम्मीदवार तनवीर हसन की बेगूसराय में लोकप्रियता और उनके द्वारा किए गए कार्यों के मद्देनजर कोई समझौता करने को तैयार नहीं थी.

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उन्होंने कहा कि राजद बहुत मजबूत ताकत रही है. 2014 के चुनावों में तथाकथित मोदी लहर में भी हमारे उम्मीदवार को लगभग चार लाख वोट मिले थे और तब से उन्होंने बेगूसराय कभी नहीं छोड़ा. तनवीर हसन की उम्मीदवारी को नजरंदाज करना हमारे लिए असंभव था. हमारा काडर मजबूत है जो तनवीर हसन को चाहता था. ऐसा कुछ भी नहीं है जो हम नहीं कर सकते. सबकुछ हमारे कार्यकर्ताओं, लोगों पर निर्भर है. इसलिए, उनकी जगह किसी और को उम्मीदवार बनाना गठबंधन न होने की वजह बना.

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2014 के लोकसभा चुनावों में हसन लगभग 55,000 मतों के अंतर से भाजपा के भोला सिंह से हारकर दूसरे स्थान पर रहे थे. भाकपा के राजेंद्र सिंह करीब 1.92 लाख वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. गौरतलब है कि भाकपा की बिहार इकाई के सूत्रों के अनुसार पार्टी नेताओं के एक वर्ग में कन्हैया कुमार को नामित करने और गठबंधन पर समझौता करने को लेकर असंतोष था. राजद्रोह मामले के समय कन्हैया के करीबी रहे लेकिन बाद में जेएनयू में राजद के छात्रसंघ की स्थापना में शामिल होने वाले जयंत जिज्ञासु ने कहा कि यह "कन्हैया कुमार के अहंकार और अज्ञानता का कारण था जो गठबंधन नहीं हुआ.

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हालांकि कन्हैया ने फोन पर बार-बार संपर्क किये जाने के बाद भी गठबंधन नहीं को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की. गौरतलब है कि राजद की तरफ से कन्हैया कुमार को अपना उम्मीदवार न बनाने के बाद भाकपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है. उनके खिलाफ बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को मैदान में उतारा है. जबकि राजद ने तनवीर हसन को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर अब मुकाबला काफी रोचक हो गया है. 

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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