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पुरी से प्रधानमंत्री मोदी नहीं संबित पात्रा लड़ेंगे चुनाव, ओडिशा में किसका पलड़ा भारी?

बीजेपी के संबित पात्रा के सामने बीजद के पिनाकी मिश्र के चुनाव लड़ने की संभावना है. बीजद की तरफ से हालांकि अभी तक किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पुरी पिनाकी मिश्र का संसदीय क्षेत्र है और पुरी से मौजूदा सांसद हैं.

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पुरी से प्रधानमंत्री मोदी नहीं संबित पात्रा लड़ेंगे चुनाव, ओडिशा में किसका पलड़ा भारी?

बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

ओडिशा के पुरी से बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा चुनाव लड़ेंगे. कुछ समय पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुरी से चुनाव लड़ेंगे. हालांकि पीएम मोदी इस बार फिर अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से ही चुनाव लड़ेंगे. बीजेपी के संबित पात्रा के सामने बीजद के पिनाकी मिश्रा के चुनाव लड़ने की संभावना है. बीजद की तरफ से हालांकि अभी तक किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पुरी पिनाकी मिश्रा का संसदीय क्षेत्र है और पुरी से मौजूदा सांसद हैं. पुरी से बीजेपी कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीती है. पुरी से बीजद सांसद पिनाकी मिश्र भी काफी लोकप्रिय हैं. वे साल 2009 से सांसद हैं और 1996 में भी कांग्रेस के टिकट से जीत चुके हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में पिनाकी मिश्रा को 50 प्रतिशत वोट मिले थे और 2 लाख 63 हजार वोट से जीत हासिल की थी. वहीं, कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी और बीजेपी तीसरी नंबर पर थी. बीजेपी को 20 प्रतिशत के करीब वोट मिले थे. 1952 में पुरी में पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ था और इसमें कांग्रेस जीत हासिल की थी. 1952 से लेकर 2014 के बीच 16 बार हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 6 बार जीत हासिल की है. पांच बार बीजद जीती है. दो बार जनता दल जीती है. 1998 से पुरी से बीजद लगातार जीतकर आ रही है.


लोकसभा चुनाव में कैसा रहा है बीजेपी का प्रदर्शन
ओडिशा में कुल-मिलाकर 21 लोकसभा सीटें हैं. 2014 में 20 सीट पर बीजद ने जीत हासिल की थी और एक सीट बीजेपी को मिली थी. 2009 में बीजू जनता दल ने 14 सीटों पर जीत हासिल की थी, 6 कांग्रेस की मिली थी और एक सीट सीपीआई के खाते में गई थी. 2004 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में बीजद और बीजेपी ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजद को 30 प्रतिशत के करीब वोट मिले थे और बीजद ने 11 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि बीजेपी को 19 प्रतिशत वोट मिले थे और बीजेपी ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी. 2009 में बीजद और बीजेपी अलग हो गए थे. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजद को 37.23 प्रतिशत वोट मिले थे और 2014 में यह बढ़कर 44.1 हुआ. साल 2014 में बीजेपी के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई थी. 2009 में बीजेपी को 17 प्रतिशत के करीब वोट मिले थे जबकी 2014 में यह बढ़कर 22 प्रतिशत के करीब हो गया. 2009 में बीजद से अलग होने के बाद बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि 2014 में सिर्फ एक सीट जीती थी.

विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रदर्शन
अगर 2014 के चुनाव की बात करें तो लोकसभा और विधानसभा में बीजद ने शानदार प्रदर्शन किया था. विधानसभा की 147 सीटों में से बीजद को 117 सीटें मिली थीं, यानी 2009 से 14 सीट ज्यादा. 2004 में कांग्रेस को रोकने के लिए बीजद और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा और 93 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजद ने 84 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 61 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि बीजेपी ने 63 पर चुनाव लड़ा था और 32 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2009 में बीजद और बीजेपी अलग होकर चुनाव लड़े थे और यह आंकड़े बदल गए. 2009 में बीजेपी ने 145 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ छह पर जीत हासिल कर पाई थी.

बढ़ता जा रहा है बीजद का वोट प्रतिशत
2009 से बीजद का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है. 2004 के विधानसभा चुनाव में बीजद को 27.5 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि बीजेपी को 17.11 प्रतिशत वोट मिले थे. अगर सिर्फ चुनाव लड़ने वाले क्षेत्र की बात की जाए तो बीजद को 47.44 वोट मिले थे जबकि बीजेपी को 40.43 प्रतिशत वोट मिले थे. 2009 में बीजद और बीजेपी अलग होकर चुनाव लड़े थे और यह आंकड़े बदल गए. 2009 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 15 प्रतिशत के करीब वोट मिले थे और बीजद का वोट प्रतिशत 27.5 से बढ़कर 38.86 हो गया. 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजद का वोट प्रतिशत भी 38.86 से बढ़कर 43.35 हो गया था. अगर बीजेपी की बात करें बीजेपी को 18 प्रतिशत के करीब वोट मिले थे.

2017 पंचायत चुनाव
2017 में ओडिशा में हुए पंचायत चुनाव में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था. 2014 में जहां बीजेपी को सिर्फ 36 ज़िला परिषद सीट पर जीत हासिल कर पाई थी, 2017 में यह बढ़कर 297 तक पहुंच गई. बीजद को 476 ज़िला परिषद सीटों पर जीत हासिल हुई थी जबकि 2012 में बीजद 651 सीटों पर जीती थी. 2017 में कांग्रेस 60 ज़िला परिषद सीटें जीत पायी थी. अगर पंचायत चुनाव को नज़र में रखते हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव की सीटों का हिसाब किया जाए तो 2019 में बीजद को 21 में से 11 से 13 के बीच लोकसभा सीटें मिलनी चाहिए जबकि बीजेपी को 6 से 8 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस को 1 या 2 सीट मिलने की उम्मीद है. पंचायत चुनाव के नतीजे के सामने रखते हुए अगर हिसाब लगाया जाए तो 2019 की विधानसभा चुनाव में बीजद को 80 से 85 सीटें मिलने की उम्मीद है जबकि बीजेपी को 50 से 55 और कांग्रेस को 10 से 12 सीटें मिल सकती हैं. ऐसे में ओडिशा में फिर एक बार बीजद की सरकार बन सकती है.

चुनाव से पहले नवीन पटनायक ने शुरू की हैं कई योजनाएं
लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कई योजनाएं शुरू की हैं. किसानों के लिए जो एक खास योजना शुरू की गयी है उसका नाम है कालिया योजना. इस योजना के तहत ओडिशा सरकार 92 प्रतिशत किसानों को फ़ायदा होने की बात कह रही है. इस योजना के लिए ओडिशा सरकार ने 10000 करोड़ बजट सैंक्शन किया है. इस योजना के तहत ओडिशा के छोटे किसान को पांच किश्‍तों में 25000 देने की बात कही गयी है. जिनके पास खेती के ज़मीन नहीं है उन्हें पशु-पालन के लिए 12500 रुपये देने की बात कही गई है. किसानों को कम पैसे में जीवन बीमा के साथ-साथ और कई अन्‍य सुविधाएं देने की बात सरकार ने अपनी योजना में कही है. जहां आयुष्मान भारत स्वस्थ्य योजना को कई राज्यों ने लागू किया वहीं ओडिशा सरकार ने अपनी स्वस्थ्य योजना बीजू स्वस्थ्य कल्याण योजना शुरू की है. इस योजना के तहत गरीब लोगों को पांच लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा है.

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VIDEO: लोकसभा चुनाव 2019 : बीजेपी ने जारी की तीसरी सूची

इस बार बीजेपी ने ओडिशा के लिए कमर कसना शुरू कर दिया है. कई बार प्रधानमंत्री दौरा भी कर चुके हैं. ओडिशा में कई नए एयरपोर्ट बनाने की बात भी केंद्र सरकार कह रही है. इसके साथ ही कई नयी योजनाओं की बात हो रही है.



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