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शीला दीक्षित: 3 बार मुख्यमंत्री, एक बार राज्यपाल और सांसद, अब मनोज तिवारी के खिलाफ ठोकेंगी ताल

कांग्रेस ने जिन 6 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उसमें शीला दीक्षित का नाम भी शामिल हैं, जो उत्तर पूर्वी से चुनाव लड़ेंगी.

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शीला दीक्षित: 3 बार मुख्यमंत्री, एक बार राज्यपाल और सांसद, अब मनोज तिवारी के खिलाफ ठोकेंगी ताल

Sheila Dikshit Profile: शीला दीक्षित (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 6 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर आम आदमी पार्टी की उम्मीदों को खत्म कर दिया है. कांग्रेस ने जिन 6 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उसमें शीला दीक्षित का नाम भी शामिल हैं, जो उत्तर पूर्वी से चुनाव लड़ेंगी. दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित भी लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं और इनका मुकाबला इस बार बीजेपी दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी से होगा जो अभी मौजूदा सांसद भी हैं. शीला दीक्षित के लिए यह चुनाव कई मायनों में खास होने वाला है, क्योंकि शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और अब वह लंबे समय बाद लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतरी हैं.

शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर
15 साल तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहने वालीं शीला दीक्षित इससे पहले 1984 से 89 तक वे कन्नौज (उप्र) से सांसद रह चुकी हैं. इस दौरान वे लोकसभा की समितियों में रहने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि रहीं. वह राजीव गांधी सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रह चुकी हैं. शीला दीक्षित 1998 से 2013 तक लगातार 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. हालांकि, 2013 में आम आदमी पार्टी के उफान में शीला दीक्षित की सरकार बह गई. हालांकि, माना जाता है कि शीला दीक्षित की हार में एंटी इनकंबेंसी भी हावी रहा. इसके बाद वह 2014 में केरल की राज्यपाल भी रहीं. 


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शीला दीक्षित की पढ़ाई
शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ है. शीला दीक्षित ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की है. उनका विवाह उन्नाव (यूपी) के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुआ था. विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे. शीलाजी एक बेटे और एक बेटी की मां हैं. उनके बेटे संदीप दीक्षित भी दिल्ली के सांसद हैं. दरअसल, मिरांडा हाउस से पढ़ाई के दौरान ही उनकी राजनीति में रुचि थी. 

दिल्ली की 3 बार मुख्यमंत्री
शीला दीक्षित अपनी काम की बदौलत कांग्रेस पार्टी में पैठ बनाती चली गईं. सोनिया गांधी के सामने भी शीला दीक्षित की एक अच्छी छवि बनी और यही वजह है कि राजीव गांधी के बाद सोनिया गांधी ने उन्हें खासा महत्व दिया. साल 1998 में शीला दीक्षित दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष बनाई गईं. 1998 में ही लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित कांग्रेस के टिकट पर पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ीं, मगर जीतन नहीं पाईं. उसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ना छोड़ दिया और दिल्ली की गद्दी की ओर देखना शुरू कर दिया. दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि तीन-तीन बार मुख्यमंत्री भी रहीं. 

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कांग्रेस के 6 उम्मीदवारों की सूची:
कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली की छह लोकसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की जिनमें राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी के कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को पार्टी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से टिकट दिया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन को नयी दिल्ली, जेपी अग्रवाल को चांदनी चौक, राजेश लिलोठिया को उत्तर-पश्चिम दिल्ली, महाबल मिश्रा को पश्चिमी दिल्ली और अरविंदर सिंह लवली को पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार बनाया गया है. 

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