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अखिलेश यादव का पलटवार, बोले- 'सराब' और 'शराब' का अंतर वे नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेरठ की रैली में सपा-बसपा और रालोद गठबंधन की तुलना शराब से करने पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार किया.

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अखिलेश यादव का पलटवार, बोले- 'सराब' और 'शराब' का अंतर वे नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं

अखिलेश यादव ने पीएम मोदी के बयान पर पलटवार किया.

खास बातें

  1. पीएम मोदी के बयान पर अखिलेश का पलटवार
  2. कहा, आज तो टेली-प्रॉम्टर की वजह से पोल खुल गई
  3. लालू यादव की आरजेडी ने भी साधा निशाना
नई दिल्ली :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेरठ की रैली में सपा-बसपा और रालोद गठबंधन की तुलना शराब से करने पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''आज टेली-प्रॉम्प्टर ने पोल खोल दी. 'सराब' और 'शराब' का अंतर वह लोग नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं. 'सराब' को मृगतृष्णा भी कहते हैं और यह वह धुंधला सा सपना है जो भाजपा 5 साल से दिखा रही है, लेकिन जो कभी हासिल नहीं होता. अब जब नया चुनाव आ गया तो वह नया 'सराब' दिखा रहे हैं. 

दूसरी तरफ, पीएम मोदी के 'शराब' वाले बयान पर लालू यादव की पार्टी राजद ने भी चुटकी ली. राजद ने कहा, ''5 साल में 'स' और 'श' का अंतर नहीं सीखा. लो हम सिखाते हैं- शाह का श, राजनाथ का र और बुड़बक बीजेपी का ब. बन गया शराबबंदी में धड़ल्ले से बिकता गुजराती शराब''. आपको बता दें कि आज मेरठ में रैली को संबोधित करते हुए  पीएम मोदी ने कहा कि, 'सपा का स, रालोद का रा और बसपा का ब मतलब सराब, ये शराब आपको बर्बाद कर देगी'. पीएम ने कहा कि यूपी में तो सब कुछ इतनी जल्दी-जल्दी हो रहा है कि पूछिए मत. दो लड़कों से बुआ-बबुआ तक पहुंचने में जो तेजी दिखाई गई है, वो गजब है. 


प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने कहा कि साल 2014 और 2017 में यूपी के लोग इन्हें दिखा चुके हैं कि उत्तर प्रदेश को जातियों में बांटने की कोशिश अब सफल नहीं होगी. जब देश बचेगा, तभी तो समाज भी बचेगा. इसलिए इस बार भी यूपी की जनता का फैसला 2014 और 2017 के चुनाव जैसा ही होने वाला है. पीएम ने कहा कि बोर्ड बदल लेने से दुकान नहीं बदलती. सपा-बसपा के शासन की पहचान ही यही है कि इन्होंने यूपी के लोगों को धोखा दिया. उत्तर प्रदेश के लोग इसे भूले नहीं हैं. सपा के शासन काल में हुए दंगों का दंश आप आजतक झेल रहे हैं. यहां स्थिति ये हो गयी थी कि लोगों को अपना घर तक छोड़कर भागना पड़ा था. गुंडाराज किस तरह कायम था, आप इसके भुक्तभोगी रहे

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