तेज बहादुर यादव बोले, मुझे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए BJP अपना रही तानाशाही रवैैया, लेकिन...

तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज सौंपे थे.

तेज बहादुर यादव बोले, मुझे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए BJP अपना रही तानाशाही रवैैया, लेकिन...

तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) ने नामांकन खारिज होने पर अफसोस जताया.

खास बातें

  • तेज बहादुर यादव का नामांकन खारिज हो गया है
  • उन्होंने बीजेपी पर बोला करारा हमला
  • कहा- बीजेपी अपना रही है तानाशाही रवैया
नई दिल्ली :

पीएम मोदी के खिलाफ ताल ठोंकने वाले बीएसएफ़ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) का नामांकन पत्र खारिज हो गया है. वे अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं. नामांकन पत्र खारिज होने के बाद तेज बहादुर यादव ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज सौंपे थे. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, "मैंने बीएसएफ में रहते हुए उसी बारे में आवाज बुलंद की, जिसे मैंने गलत पाया. मैंने न्याय की उस आवाज को बुलंद करने बनारस आने का फैसला किया था. अगर मेरे नामांकन में कोई समस्या थी तो एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में दाखिल करने (मेरे कागजात) के समय उन्होंने मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया.  

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उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर खुद को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए "तानाशाही कदम" का सहारा लेने का आरोप लगाया. तेज बहादुर यादव ने कहा "मेरे दादा आजाद हिंद फौज के साथ थे, मैं एक किसान का बेटा हूं और एक जवान के रूप में सेवा की... मैं अब चुनाव भी नहीं लड़ सकता. यह तानाशाही है". उनके वकील राजेश गुप्ता ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे". दरअसल, वाराणसी के जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने मंगलवार को तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) के नामांकन पत्र के दो सेटों में ‘कमियां' पाते हुए उनसे बुधवार को 11 बजे तक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा था.

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गौरतलब है कि तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) ने 24 अप्रैल को निर्दलीय और 29 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था. तेज बहादुर यादव  (Tej Bahadur Yadav) ने बीएसएफ़ से बर्खास्तगी को लेकर दोनों नामांकनों में अलग अलग दावे किए थे. इसी बिंदु पर जिला निर्वाचन कार्यालय ने यादव को नोटिस जारी करते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया था. वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट सुरेन्द्र सिंह ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 9 और धारा 33 का हवाला देते हुए कहा कि तेज बहादुर यादव का नामांकन इसलिये स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि वह निर्धारित समय में "आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं कर सके". 

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