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जनता के दरबार में तारीख पर तारीख नहीं सिर्फ फैसला होता है, आप न्याय कीजिएगा: तेजस्वी यादव

गया में तेजस्वी यादव का एक अलग अंदाज देखने को मिला और वह जनता से सीधे संवाद करते दिखे. तेजस्वी  ने जनसभा में मौजूद भीड़ से पूछा क्या 15 लाख आपके खाते में आए? किसानों को लागत मूल्य का ढाई गुना मिला? 

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पटना:

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए प्रचार अभियान चरम पर है. चुनावी रैलियों में बिहार में भी एनडीए और महागठबंधन में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. सोमवार को गया संसदीय क्षेत्र में राजद नेता तेजस्वी यादव ने एक जनसभा को संबोधित किया और जनता से मोदी सरकार और नीतीश सरकार के खिलाफ वोट करने की अपील की. गया में तेजस्वी यादव का एक अलग अंदाज देखने को मिला और वह जनता से सीधे संवाद करते दिखे. तेजस्वी  ने जनसभा में मौजूद भीड़ से पूछा क्या 15 लाख आपके खाते में आए? किसानों को लागत मूल्य का ढाई गुना मिला? 

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तेजस्वी ने जनता से पूछा कि 'अच्छा ये बताइए शराबबंदी यानी नशा मुक्ति इसके हम भी पक्षधर हैं लेकिन शराब आज कहां नहीं मिल रहा है, जो शराब 200 रुपये में मिलता था, अब पन्द्रह सौ में बिक रहा है. उसका हिस्सा पलटू चाचा के खाता में जाता है. बालू बंदी से फ़ायदा है कि घाटा? पहले से बालू सस्ता मिल रहा है या महंगा? जनता का जवाब होता है महंगा. बचपन में हम एक फ़िल्म देखे थे चाची 420 लेकिन असल ज़िंदगी में हमें चाचा 420 से पाला पड़ा है.' 


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गया में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए तेजस्वी यह भी कहते हैं कि मैं आज जनता के दरबार में हूं. आप सबके बीच हूं. जनता के दरबार में तारीख़ पर तारीख़ नहीं पड़ती, सिर्फ फ़ैसला होता है. मैं सिर झुकाकर आपके (जनता) सामने खड़ा हूं, आप मालिक हैं आपको ही न्याय करना है. बस आप न्याय कीजिएगा.'

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दरअसल, कुछ इसी अंदाज़ में अब बिहार में विपक्ष के नेता और महागठबंधन के स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव हर दिन प्रचार करते हैं. अमूमन हर दिन 34 सभाएं करने वाले तेजस्वी अपने भाषण की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलकर शुरू करते हैं, जिसमें उनका ज़ोर इस बात पर होता है कि यह चुनाव पार्टी या उम्मीदवार को जिताने के लिए नहीं है, बल्कि संविधान और आरक्षण को बचाने के लिए ज्यादा है. उसके बाद तेजस्वी जनता की नब्ज़ जानने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पिछले लोकसभा चुनाव में किए गए वादों के बारे में पूछते हैं. अक्सर जनसभाओं में जनता का जवाब नकारात्मक होता है और उसके बाद उनके निशाने पर आ जाते हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्हें तेजस्वी यादव बार-बार पलटू चाचा के नाम से जनसभा में संबोधित करते हैं. 

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चुनावी रैलियों में तेजस्वी यादव जनता को नीतीश कुमार की उन बातों को दोहराते हैं, जिसे कभी नीतीश कुमार बीजेपी के खिलाफ में बोले हुए होते हैं. पहले नीतीश कुमार द्वारा BJP के बारे में कई कई बातों का ज़िक्र करते हैं. बता दें कि नीतीश कुमार ने बीजेपी को बढ़ता जनता पार्टी कहा था, इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि मिट्टी में मिल जाऊंगा बीजेपी के साथ कभी नहीं जाऊंगा. चुनावी सभाओं में नीतीश कुमार की इन्हीं पुरानी बातों को तेजस्वी यादव दोहराते हैं. तेजस्वी कहते हैं कि नीतीश कुमार ने उन्हें और बिहार की जनता को सबसे बड़ा धोखा देने का काम किया है.

इसके बाद तेजस्वी यादव अपने पिता लालू यादव का ज़िक्र करते हैं. वो मानते हैं कि इस चुनाव में लालू यादव की कमी सबको खल रही है. वो चाहे उनकी पार्टी हो या फिर जनता. गया में भी कई जनसभाओं में तेजस्वी जनता को यह समझाते दिखे कि दरअसल लालू प्रसाद यादव ने बीजेपी के सामने घुटने नहीं टेके इसलिए उन्हें जेल में बंद रखा गया है. अगर लालू यादव बाहर आ जाते तो BJP आरक्षण के साथ छेड़-छाड़ नहीं करती. 

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तेजस्वी यादव अपने भाषण में बालाकोट, पाकिस्तान और सेना को अपने भाषण से बाहर रखते हैं. जनसभाओं के अंत में तेजस्वी लोगों से ही 3 नारे लगवाते हैं- भाजपा भगाओ देश बचाओ, बेरोज़गारी हटाओ आरक्षण बढ़ाओ, मज़बूर चाचा भगाओ बिहार बचाओ. इस चुनाव में महागठबंधन के सहयोगियों और अपने दल में टिकट को लेकर मारामारी के को लेकर सवाल पूछने पर तेजस्वी कहते हैं वो तो अब समय चला गया अब तो सब लोग प्रचार में हैं. अपने घर के अंतर्कलह के बारे में कुछ भी बोलने से बचते हैं. उनका कहना है कि जो असल मुद्दा है वो है मोदी सरकार की वादाखिलाफी, बेरोज़गारी और पिछले चुनाव में किए गए वादों को पूरा नहीं किया जाना.  



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