उत्तर प्रदेश में बीहड़-जंगल छोड़ डाकू और उसका परिवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने को तैयार

लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश दो खूंखार डाकूओं का परिवार चुनावी मैदान में अपनी सियासी साख बचाने की लड़ाई में जुटा है.

उत्तर प्रदेश में बीहड़-जंगल छोड़ डाकू और उसका परिवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने को तैयार

फुलन देवी की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश दो खूंखार डाकूओं का परिवार चुनावी मैदान में अपनी सियासी साख बचाने की लड़ाई में जुटा है. पहला नाम बांदा के डाकू ददुआ का नाम है जो शंकरगढ़ के जंगलों में किसी जमाने में आतंक का पर्याय रहा था. अब उसके भाई बाल कुमार पटेल बांदा से कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि दूसरा नाम फूलन सिंह का है. जो बुंदेलखंड के बीहड़ों से निकलकर सियासत में आई लेकिन उनकी हत्या के बाद अब उनके पति उम्मेद सिंह निषाद बसपा की सियासी प्रयोगशाला अंबेडकर नगर से कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर फूलन सिंह (फूलन देवी) की सियासी विरासत को बचाने में जुटे हैं. 

कभी थे आतंक का पर्याय, अब भिंड की सियासत में है इन 2 खूंखार डाकुओं का दबदबा

अंबेडकर नगर की इस सीट पर डाकू रही फूलन के पति उम्मेद सिंह के अलावा बाहुबली पवन पांडेय के बड़े भाई राकेश पांडेय का बेटा रितेश पांडेय बसपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं. इस सीट पर इतना दिलचस्प मुकाबला है कि बीजेपी के निवर्तमान सांसद हरि ओम पांडेय का नाम अब तक घोषित नहीं हुआ है. अभी हाल में दिल्ली के फाइव स्टार होटल में पिस्टल लहराकर धमकाने वाले आशीष पांडेय के भाई हैं. राकेश पांडेय इस वक्त जलालपुर से विधायक भी हैं. तो वहीं भिंड के बीहड़ों में कुख्यात डाकू रहे मलखान सिंह धौरहरा से खुद चुनावी मैदान में हैं. बसपा की ओर से राकेश पांडेय के बेटे रितेश पांडे को उम्मीदवार बनाया गया है.

मायावती का सियासी सफर यहीं से शुरू हुआ था
यह सीट मायावती के संसदीय क्षेत्र के रूप में जानी जाती है. मायावती ने यहां से चार बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है. सबसे पहले वह 1989 में चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं. इसके बाद उन्होंने 1998 और 1999 में जीत हासिल की. लेकिन 2002 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी. अंबेडकर नगर से दो बार बीएसपी से सांसद रहे राकेश पांडेय को 2014 में बीजेपी के हरिओम पांडेय ने एक लाख चालीस हजार वोटों से हराया था. लेकिन इस बार कांग्रेस ने फूलन देवी के पति को मैदान में उतार कर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है. 

जातीय समीकरण क्या है
2011 की जनगणना के अनुसार, अंबेडकर नगर की आबादी 24 लाख है और यहां पर 12.1 लाख पुरुष और 11.9 लाख महिलाएं रहती हैं. जिसमें 75% आबादी सामान्य वर्ग और 25% आबादी अनूसूचित जाति की है. धर्म के आधार पर 83% आबादी हिंदुओं और 17% मुस्लिमों की है.

VIDEO: भिंड में बीएसपी के उम्मीदवार हैं डॉ. जगदीश सागर, व्यापम में आ चुका है नाम

 
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com