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उपेंद्र कुशवाहा: राजनीति शास्त्र पढ़ाते-पढ़ाते बन गए राजनेता, ऐसा रहा सियासी सफर

उपेंद्र कुशवाहा के लिए लोकसभा 2019 का चुनाव बेहद खास है. एनडीए से अलग होकर महागठबंधन में शामिल होने के बाद अब इलाके में उन्हें अपनी ताकत का अहसास कराना होगा.

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उपेंद्र कुशवाहा: राजनीति शास्त्र पढ़ाते-पढ़ाते बन गए राजनेता, ऐसा रहा सियासी सफर

उपेंद्र कुशवाहा ने 2013 में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का गठन किया था.

नई दिल्ली:

उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) बिहार की राजनीति का जाना-माना नाम हैं. अभी कुछ दिन पहले ही उपेंद्र राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का साथ छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए. उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) बिहार में पांच सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उपेंद्र ने खुद दो सीटों काराकाट और उजियारपुर से इस लोकसभा चुनाव में दावा ठोंका है. उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) का जन्म 6 फरवरी, 1960 को बिहार के वैज जिले में स्थित जवाज़ गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम स्वर्गीय मुनेश्वर सिंह और मां का नाम मुनेश्वरी देवी है.

मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुए उपेंद्र ने वंचित समाज की आवाज को मुखर रूप से उठाने का काम अपने छात्र जीवन से ही शुरु कर दिया था. पटना साइंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर की भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया. 26 फरवरी 1982 को उन्होंने स्नेहलता से शादी कर ली. उनका एक बेटा और एक बेटी है. 


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1985 में उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) बिहार के जान्दहा समता कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस के लेक्चरर के पद पर तैनात हुए और यहां 3 सालों तक रहे. अब इस कॉलेज का नाम मुनेश्वर सिंह मुनेश्वरी समता कॉलेज हो गया है. 1988 में उपेंद्र कुशवाहा  (Upendra Kushwaha)ने युवा लोक दल का राष्ट्रीय महासचिव बनने के साथ ही राजनीति में कदम रख दिया. इस पद पर वे 1993 तक रहे.

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1994 में समता पार्टी से जुड़कर यहां भी 2002 तक महासचिव का पद संभाला. इसी बीच साल  2000 में समता पार्टी से पहली बार विधानसभा पहुंचे. 2004 में बिहार विधानसभा में विरोधी दल के नेता बने. 2010 में राज्यसभा सांसद चुन लिए गए.  2013 में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से अलग होकर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का गठन किया. 2014 में पहली बार उन्होंने रालोसपा के टिकट पर काराकाट सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. 

10 दिसंबर 2018 को उन्होंने पीएम मोदी पर बिहार और पिछड़े तबके को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए एनडीए से किनारा कर लिया. मोदी कैबिनेट में रहते हुए उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेयजल, स्वच्छता और पंचायती राज मंत्री का पद भी संभाला. आखिरी समय में जब उन्होंने एनडीए से किनारा किया तो मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दिया था. 

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उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के लिए लोकसभा 2019 का चुनाव बेहद खास है. एनडीए से अलग होकर महागठबंधन में शामिल होने के बाद अब इलाके में उन्हें अपनी ताकत का अहसास कराना होगा. काराकाट में  एनडीए की ओर से ये सीट जेडीयू को मिली है. जेडीयू से महाबली सिंह, उपेंद्र सिंह के खिलाफ अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं उजियारपुर सीट पर उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) का मुकाबला बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय से है. 


 



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