...जब इस्तीफा लेकर CM योगी के घर तड़के तीन बजे पहुंच गए ओपी राजभर

एसबीएसपी पार्टी के अध्यक्ष ओपी राजभर ने सोमवार को ऐलान किया कि उनकी पार्टी भाजपा से रिश्ता तोड़कर प्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी.

लखनऊ:

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के पहले चरण के बाद उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (Suheldev Bharatiya Samaj Party) ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है. एसबीएसपी पार्टी के अध्यक्ष ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने सोमवार को ऐलान किया कि उनकी पार्टी भाजपा से रिश्ता तोड़कर प्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. राजभर ने प्रदेश के आखिरी चरणों के चुनाव में अपने 25 उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर रविवार तड़के तीन बजे इस्तीफे के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ के घर पहुंच गए और उनसे मुलाकात की मांग की. जब उन्हें बताया कि योगी आदित्यनाथ अभी सो रहे हैं तो वे वहां से चले गए.

ओम प्रकाश राजभर लोकसभा चुनाव से पहले भी भाजपा से नाराज चल रहे थे, लेकिन उन्हें मना लिया गया. बताया जा रहा है कि अभी भाजपा से राजभर इसलिए नाराज चल रहे हैं, क्योंकि पूर्वी यूपी में उनकी पार्टी को भाजपा ने पर्याप्त सीटें नहीं दी हैं. पूर्वी यूपी में राजभर की पार्टी का अच्छा प्रभाव है. 

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राजभर की पार्टी पूर्वी यूपी में पांच सीटें चाह रही थी. राजभर ने बताया कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से दो बार मुलाकात की. सूत्रों ने बताया कि भाजपा पांच सीटें देने को तैयार नहीं थी. इसलिए आखिर में यह तय हुआ कि राजभर की पार्टी पूर्वी यूपी में दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इसमें भी पंगा डाल दिया और उनसे कहा कि इसमें से एक सीट पर सुहेलदेव का उम्मीदवार भाजपा के चुनाव निशान पर मैदान में उतरेगा. 

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बलिया में राजभर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह बहुत गुस्से में थे, इसलिए रविवार तड़के तीन बजे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के आवास पर पहुंच गए. उन्होंने बताया, 'मुख्यमंत्री सो रहे थे, वहां तैनात अधिकारियों ने मुझे सुबह आने के लिए कहा. सुबह मैंने कई बार मुख्यमंत्री से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया.'

इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'मैंने अमित शाह और योगी आदित्यनाथ समेत सभी को समझाने की कोशिश की कि हम लोग सहयोगी हैं. अगर हम एक या दो सीटों पर भी चुनाव नहीं लड़ेंगे तो हमारे वोटर्स को क्या बताएंगे? लेकिन वे मुझसे भाजपा के चुनाव निशान पर लड़ने के लिए कहते रहे. आखिर मैंने उन्हें हमारे चुनाव निशान पर केवल एक सीट लड़ने देने के लिए कहा. लेकिन उन्होंने मेरी एक भी बात नहीं सुनी.'

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