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महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शामिल नहीं किए जाने से नाराज रामदास अठावले ने की अब यह मांग...

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन (BJP Shiv Sena Alliance) के बीच खुद को उपेक्षित किए जाने पर केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के नेता रामदास अठावले ने कहा कि हम NDA के साथ ही रहेंगे. हालांकि उन्होंने कहा कि NDA के साथ रहने के लिए हमारी कुछ मांगे हैं.

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महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शामिल नहीं किए जाने से नाराज रामदास अठावले ने की अब यह मांग...

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. गठबंधन में शामिल नहीं किए जाने से नाराज रामदास अठावले
  2. बीजेपी-शिवसेना गठवंधन से RPI ने की 2 सीटों की मांग
  3. केंद्रीय मंत्री बोले- हम NDA के साथ ही रहेंगे
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच हुए गठबंधन में केंद्र की एनडीए सरकार में मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale) की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (RPI) को जगह नहीं दी गई है. बीजेपी-शिवसेना गठबंधन (BJP Shiv Sena Alliance) के बीच खुद को उपेक्षित किए जाने पर केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के नेता रामदास अठावले ने कहा कि हम NDA के साथ ही रहेंगे. हालांकि उन्होंने कहा कि NDA के साथ रहने के लिए हमारी कुछ मांगे हैं जिनमें RPI को मुंबई के भीतर और बाहर एक-एक सीट शिवसेना और BJP से दिए जाने की मांग शामिल है... हमें दो सीटें चाहिए.'

 


 

इससे पहले अठावले ने कहा था कि उनकी उपेक्षा की गई है और इस फैसले पर दोनों पार्टियों को पुनर्विचार करना चाहिए.
एक सवाल में जवाब में उन्होंने यह कहा था कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने उनसे संपर्क किया है, लेकिन वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रहना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा और शिवसेना उन्हें सीट नहीं देते हैं तो उनकी पार्टी को आगे की रणनीति पर विचार करना पड़ेगा. महाराष्ट्र में बनी सहमति के अनुसार, भाजपा 25 और शिवसेना 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. राज्य में लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं.

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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री अठावले ने कहा, 'रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक भी सीट नहीं छोड़ने की घोषणा बहुत गंभीर बात है. मैं खुश नहीं हूं. नाराज हूं. उन्होंने दलित समाज की उपेक्षा की है, आरपीआई की उपेक्षा की है और मेरी उपेक्षा की है. दलित समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया हो रही है.' उन्होंने कहा, '2014 में हमारी पार्टी के लिए एक सीट (सतारा) छोड़ी गई थी. मैंने बार-बार कहा था कि भाजपा और शिवसेना को साथ आना चाहिए. अब वे साथ आए हैं तो अच्छी बात है, लेकिन आरपीआई को भूलना ठीक बात नहीं है. हमारी महाराष्ट्र में ताकत है और आरपीआई के वोटों की बदौलत इनको जीत भी मिली. अगर हमें साथ नहीं लेते हैं तो इनको भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.'

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