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उत्तर प्रदेश के इटावा में किसका पलड़ा है भारी, क्या कहते हैं आंकड़े, पढ़ें- ग्राउंड रिपोर्ट

अटेंशन... हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं...हमारी जेल से आज तक कोई भाग नहीं सका है...शोले फिल्म का डॉयलॉग बोलकर बॉलीवुड कमेडियन असरानी ने इटावा के सियासी मैदान को गुलजार कर रखा है.

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उत्तर प्रदेश के इटावा में किसका पलड़ा है भारी, क्या कहते हैं आंकड़े, पढ़ें- ग्राउंड रिपोर्ट

असरानी ने इटावा के सियासी मैदान को गुलजार कर रखा है.

नई दिल्ली :

अटेंशन... हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं...हमारी जेल से आज तक कोई भाग नहीं सका है...शोले फिल्म का डॉयलॉग बोलकर बॉलीवुड कमेडियन असरानी ने इटावा के सियासी मैदान को गुलजार कर रखा है. बीजेपी के हैवीवेट उम्मीदवार रामशंकर कठेरिया को जिताने के लिए असरानी ने जहां इटावा में भीड़ जमाकर रखी है, वहीं इटावा से 12 किमी बसरेर में केशव प्रसाद मौर्या का हेलीकाप्टर चुनावी प्रचार के लिए उतर रहा है. यहां केशव प्रसाद मौर्या की सभा में कम और कुछ दूर पर खड़े उनके हेलीकॉप्टर को देखने ज्यादा लोग जुटे हैं. सपा के गढ़ में इस बार कठेरिया बनाम कठेरिया का दिलचस्प सियासी मुकाबला चल रहा है. बीजेपी की तरफ से पूर्व कैबिनेट मंत्री रामशंकर कठेरिया का मुकाबला गठबंधन के कमलेश कठेरिया से है जबकि बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामनें वाले अशोक दोहरे  और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के शंभू दयाल दोहरे किसी का भी सियासी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं.

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गठबंधन के उम्मीदवार कमलेश कठेरिया.


बीजेपी ने रामशंकर कठेरिया का आगरा से टिकट काट कर इटावा से चुनाव लड़ाया है. 2014 में बीजेपी के प्रत्याशी बीजेपी के अशोक कुमार दोहरे को 4,39,646 वोट मिले. सपा के प्रेमदास कठेरिया को 2,66,700 वोट, बसपा के अजय पाल सिंह जाटव को 1,92,804 वोट और कांग्रेस के हंस मुखी कोरी को महज 13000 वोट मिले थे. इसीलिए रामशंकर कठेरिया अपनी जीत को लेकर निश्चिंत हैं. बीजेपी उम्मीदवार रामशंकर कठेरिया कहते हैं कि इस बार पिछली बार से बड़ी जीत हासिल होगी क्योंकि शिवपाल यादव की पार्टी के उमीदवार गठबंधन के वोट काटेंगे. उधर, प्रोफेसर रामशंकर कठेरिया को गठबंधन के उम्मीदवार कमलेश कठेरिया चुनौती दे रहे हैं. कमलेश कठेरिया सपा के पूर्व सांसद रहे प्रेमदास कठेरिया के बेटे हैं.

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इटावा के जातीय समीकरणों को अगर देखे तों इटावा लोकसभा में 17 लाख मतदाताओं में से सबसे ज्यादा करीब 4 लाख दलित मतदाता है उसके बाद करीब 2 लाख ब्राहमण, 1 लाख 80 हजार यादव और 1 लाख 30 हजार मतदाता मुस्लिम हैं.  
बसपा का गठबंधन होने से कमलेश कठेरिया की उम्मादें दलित, यादव और मुस्लिम वोटों पर टिकी है. साथ ही राम शंकर कठेरिया पर बाहरी उम्मीदवार का ठप्पा भी लगा है. गठबंधन के उम्मीदवार कमलेश कठेरिया कहते हैं कि रामशंकर कठेरिया आगरा से आए वो वहीं चले जाएंगे. यहां से गठबंधन है और इटावा में जीत हासिल होगी, लेकिन इटावा की सियासी लड़ाई को दिलचस्प बना रहे हैं बीजेपी का दामन छोड़ कर कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक दोहरे और बीएसपी का साथ छोड़ शिवपाल यादव की पार्टी से लड़ने वाले शंभू दयाल दोहरे. पिछली बार अशोक दोहरे ने बीजेपी के टिकट पर खासी बड़ी जीत हासिल करके सपा से ये सीट छीन ली थी. इसलिए इटावा संसदीय क्षेत्र के वो भी मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं.

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कांग्रेस प्रत्याशी अशोक दोहरे.

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दलित वोटरों पर अगर दोहरे उम्मीदवारों ने सेंध लगाई तो इसका फायदा या नुकसान कठेरिया उम्मीदवारों को हो सकता है. लेकिन अशोक दोहरे अपनी जीत को लेकर खासा भरोसा है. कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक दोहरे कहते हैं कि हम दो लाख वोटों से इटावा में जीत रहे हैं हमारा मुकाबला किसी से नहीं है. इटावा में हर पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. यहां आलू किसानों का कोई मुद्दा नहीं बस एक तरफ मोदी का राष्ट्रवाद और दूसरी तरफ अखिलेश यादव  की प्रतिष्ठा बचाने की लड़ाई के आसपास ही सियासत की बयार बह रही है.  

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