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CM शिवराज के ‘दिल से’ कार्यक्रम के लिए शिक्षा विभाग ने छात्रावासों को दिया आदेश, अपने फंड से खरीदें रेडियो

शिक्षा विभाग ने छात्रावासों को आदेश दिया है कि वो अपने फंड से रेडियो खरीदें.

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CM शिवराज के ‘दिल से’ कार्यक्रम के लिए शिक्षा विभाग ने छात्रावासों को दिया आदेश, अपने फंड से खरीदें रेडियो

शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम 'दिल से' की तस्वीर

खास बातें

  1. शिक्षा विभाग ने छात्रावासों को अपने फंड से रेडियो खरीदने के लिए कहा
  2. शिवराज सिंह ने बच्चों को ब्लू व्हेल गेम से बचने की सलीह दी
  3. कांग्रेस ने शिक्षा विभाग के इस फैसले पर साधा निशाना
भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ‘रमन की गोठ’ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘दिल से’ कार्यक्रम से आम लोगों को रेडियो, दूरदर्शन के माध्यम से अपना संदेश देने लगे हैं. वैसे, शिवराज सिंह चौहान इस मामले में थोड़े अलग हैं बच्चे उनकी बात सुने, इसलिए मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग ने छात्रावासों को यह आदेश दिया है कि वो अपने फंड से रेडियो खरीदें. इस आदेश की एक्सक्लूसिव कॉपी एनडीटीवी के पास है.

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शिवराज सिंह बच्चों के मामा कहे जाते हैं, लिहाजा वो रेडियो के जरिये रविवार को अपने भांजे-भांजियों को संदेश देने बैठे. उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि ब्लू व्हेल जैसे खेल से बचें. उन्होंने बच्चों से राष्ट्र समर्पण के लिये भी कहा वो भी रेडियो के माध्यम से. हालांकि, यह और बात है कि मामाजी यानी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की आवाज सुनाने के लिए पैसे बच्चों के लिए खर्च होने वाली तिजोरी से लिए जायेंगे. इसके लिए सरकार ने बाकायदा आदेश जारी किया है, सरकार को लगता है उसका फैसला जायज है. 
 
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बच्चों को कार्यक्रम के लिए जागरूक किया जा रहा है

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इस संबंध में स्कूली शिक्षा मंत्री दीपक जोशी ने कहा, “भाषण के जरिये बच्चे प्रेरणा लेते हैं, इसलिए हमारा मकसद सामूहिक रूप से बच्चों को दिल की बात सुनाना है. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अमिताभ बच्चन जैसी शख्सियत कोई बात करें तो लोग गंभीरता से लेते हैं. हम चाहते हैं बच्चों में सकारात्मकता बढ़े.”

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वहीं, कांग्रेस को लगता है कि कर्ज में डूबे प्रदेश में यह फिजूलखर्ची है. कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्र ने कहा कि किसी का ऐच्छिक विषय है, ये दोयम दर्जे की पब्लिसिटी है कर्ज में डूबे प्रदेश के लिये अपराध है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश तकरीबन 2 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा है, ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि सरकार सोच समझकर खर्च करे. 

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साथ ही केके मिश्र कहा कि विज्ञापन के नाम पर ऐसे फिजूलखर्ची पर जनता ही तय करे कि वो अपनी सरकार से दिल से क्या कहना चाहती है, क्योंकि राज्य में हर शख्स पर लगभग 13,853 रुपये का कर्ज है.


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