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राज ठाकरे के बाद अब NCP के इस नेता की बढ़ सकती है मुश्किलें, 1000 करोड़ बैंक घोटाले का है मामला

महाराष्ट्र में एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के बाद अब एनसीपी नेता अजित पवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है.

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राज ठाकरे के बाद अब NCP के इस नेता की बढ़ सकती है मुश्किलें, 1000 करोड़ बैंक घोटाले का है मामला

एनसीपी नेता अजीत पवार (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. राज ठाकरे के बाद अब अजित पवार की बारी?
  2. अजित पवार सहित तकरीबन 70 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज
  3. महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला मामला
महाराष्ट्र:

महाराष्ट्र में एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के बाद अब एनसीपी नेता अजित पवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है. तकरीबन 1000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अजित पवार सहित तकरीबन 70 लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. अदालत ने इसके लिये मुम्बई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को 5 दिन का समय दिया है. सालों से लटके महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले की जांच में अचानक से नया मोड़ आ गया है.

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मामले में नाबार्ड की ऑडिट रिपोर्ट में खामिया उजागर हुई थी, लेकिन मुम्बई पुलिस फाइल दबाकर बैठे रही. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जनहित याचिका दर्ज कर तकरीबन 1000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते हुए एनसीपी नेता अजित पवार सहित दर्जन भर दूसरे नेताओं के साथ तकरीबन 70 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. याचिकाकर्ता के वकील सतीश तलेकर का कहना है कि साल भर से भी अधिक समय से मामले की सुनवाई चल रही थी. अदालत ने एक महीना पहले भी मुम्बई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के डीसीपी को तलब कर पूछा था कि FIR क्यों नही दर्ज कर रहे?


तब पुलिस ने FIR दर्ज करने लायक सबूत नहीं होने का दावा किया. इस पर अदालत ने सभी दस्तावेजों को देख पहली नजर में पाया कि गड़बड़ी हुई है और इसलिए FIR दायर कर जांच का आदेश दिया. जनहित याचिका के मुताबिक महाराष्ट्र राज्य के समग्र विकास में सहकारी बैंक और सहकारिता का बड़ा योगदान था, लेकिन नेताओं ने उसे अपने परिवार के विकास तक सीमित कर दिया यही वजह है कि राज्य में किसान खस्ताहाल हैं और खुदकुशी को मजबूर हो रहे हैं.

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राज्य सहकारी बैंक का उद्देश्य किसानों को कर्ज देना है, लेकिन बैंक के बोर्ड में बैठे नेताओं ने नियमों को ताक पर रखकर अपने करीबियों की चीनी और कताई मिलों में कर्ज बांटे जो डूब गए. मामला 2007 से 2011 के बीच का है और आरोपियों में दूसरे नेताओं का नाम भी है लेकिन अजित पवार को ही निशाना बनाने पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुुले ने सरकार की नियत पर सवाल उठाया.

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