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मुंबई बिल्डिंग हादसे में 33 की मौत: कुछ का पूरा परिवार खत्म हो गया तो कुछ तकदीर के धनी रहे  

मुंबई में भिंडी बाजार इलाके में गिरी हुसैनी इमारत मौत की इमारत बन गई. 31 अगस्त की सुबह जमींदोज हुई उस इमारत के मलवे में दबकर 33 लोग अपनी जवान गवां बैठे. वहीं, कुछ नसीब वाले भी रहे जिनकी जान बच गई.

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मुंबई बिल्डिंग हादसे में 33 की मौत: कुछ का पूरा परिवार खत्म हो गया तो कुछ तकदीर के धनी रहे  

मुंबई में भिंडी बाजार इलाके में गिरी इमारत में 33 लोगों की मौत हो गई.

खास बातें

  1. 31 अगस्त की सुबह जमींदोज हुई थी हुसैनी इमारत
  2. 117 साल पुराना थी भिंडी बाजार में स्थित यह इमारत
  3. समय पर ठोस कदम उठाए जाते तो 18वां हादसा नहीं होता
नई दिल्ली: मुंबई में भिंडी बाजार इलाके में गिरी हुसैनी इमारत मौत की इमारत बन गई. 31 अगस्त की सुबह जमींदोज हुई उस इमारत के मलवे में दबकर 33 लोग अपनी जवान गवां बैठे. वहीं, कुछ नसीब वाले भी रहे जिनकी जान बच गई. जेजे अस्पताल के वार्ड नंबर 18 में भर्ती अहमद अली उन चंद खुश नसीबों में से एक हैं जो मौत के मुंह से बच कर लौटे हैं. भिंडी बाजार की 117 साल पुरानी हुसैनी बिल्डिंग जब गिरी तब अहमद गोंडा में अपनी पत्नी से फ़ोन पर बात कर रहे थे. बिल्डिंग गिर गई, लेकिन फ़ोन हाथ में ही बना रहा और फिर पुलिस को फ़ोन कर हादसे की सूचना दी.

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जाफर हुसैन का पूरा परिवार हादसे का शिकार
अहमद अली बताते हैं कि पहली बार तो पुलिस ठीक से समझ नहीं पाई वह बार-बार पता जानना चाहती थी. लेकिन 2 घंटे बाद फोन के जरिये और लकड़ी से बार बार ठोक कर अपनी जगह की जानकारी देते रहने के बाद आखिरकार दमकल कर्मियों ने मौत के मुंह से निकाल लिया. अहमद अली के दोनों पैर के निचले हिस्सों में फ्रैक्चर हुआ है. लेकिन पहली मंजिल पर रहने वाले ज़ाफ़र हुसैन और उनका पूरा परिवार हादसे का शिकार हो गया. एसी फिटिंग के डीलर ज़ाफ़र का 31 अगस्त को जन्मदिन था. बच्चों ने रात में ही केक काटकर पिता के लंबी उम्र की कामना की थी, लेकिन सुबह सभी कुछ खत्म हो गया.

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शकीला का रो-रो कर बुरा हाल
70 साल की बुजर्ग मां शकीला का रो-रो कर बुरा हाल है. वो कहती हैं उनके तीन बेटे हैं. एक विदेश में रहता है, दूसरा लख़नऊ में तीसरा ज़ाफ़र था जो मुंबई में अपना और बड़े भाई दोनों के परिवारों की देखभाल करते थे. लख़नऊ में रहने वाले बड़े भाई सरवर हुसैन इमारत गिरने की खबर मिलते ही पहली उड़ान से मुंबई आ गए, लेकिन भाई सहित पूरे परिवार की मौत से सदमे में हैं. हुसैनी इमारत के बगल की बिल्डिंग में रहने वाले हुसैन ने इमारत गिरने का पूरा मंजर अपनी आंखों से देखा. वह बताते हैं कि इमारत गिरते ही चारों तरफ धूल ही धूल फैल गई थी. जब धूल छंटी तो कुछ लोग मलवे से लटकते हुए दिखे. 

VIDEO: मुंबई में गिरी 6 मंजिला इमारत : हादसे में खत्म हो गया पूरा परिवार
कुछ ठोस किया गया होता तो 18वां हादसा नहीं होता
24 घंटे बाद जब मलबा हट चुका था तब कुछ लोग अपना सामान खोजने पहुंचने लगे. लेकिन 5 साल पहले ही हुसैनी बिल्डिंग में रहने आए नज़्मुद्दीन और तस्लीमा चश्मवाला परिवार का कोई नहीं बचा. बची तो उनकी पहचान जो वोटिंग कार्ड के रूप में मलबों में दबी पड़ी थी. हुसैनी इमारत गिरने के बाद अब एक बार फिर जर्जर इमारतों और उसमे रहने वालों की चर्चा होगी. उनकी सुध लेने का दिखावा होगा, लेकिन अंत मे सब सिर्फ कागज़ों पर ही धरा रह जाएगा, क्योंकि इसके पहले भी मुंबई में 17 इमारतें गिर चुकी थीं और 267 लोगों जान गवां चुके थे. अगर सही में कुछ ठोस किया गया होता तो ये 18वां हादसा नहीं होता और 33 लोग बेमौत नही मारे जाते.


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