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यूपी के बाद अब महाराष्ट्र के नवजात समाए काल के गाल में, एक महीने में 55 बच्चों की मौत

महाराष्ट्र में नासिक के सिविल अस्पताल में एक महीने के भीतर 55 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है.

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यूपी के बाद अब महाराष्ट्र के नवजात समाए काल के गाल में, एक महीने में 55 बच्चों की मौत

महाराष्ट्र के अस्पतालों में सुविधाओं के आभाव में नवजात बच्चे दम तोड़ रहे हैं

खास बातें

  1. 346 बच्चे अगस्त में इलाज के लिए भर्ती किए गए
  2. अस्पताल में सुविधाओं के लिए 21 करोड़ का बजट
  3. इस साल अब तक 187 बच्चों की मौत हो चुकी है
नासिक: उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत का मामला अभी चल ही रहा है कि महाराष्ट्र में भी एक महीने के भीतर 55 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. यह घटना नासिक के सरकारी अस्पताल की है. यहां इस घटना के पीछे वजह अस्पताल की लापरवाही नहीं बल्कि सुविधाओं की कमी होना बताया जा रहा है.

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अस्पताल के अतिरक्त सिविल सर्जन डॉ. एमजी होले ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ 18 इन्क्यूबेटर हैं जबकि यहां आने वाले बीमार बच्चों की संख्या कहीं ज्यादा होती है. ज्यादातर निजी अस्पताल भी जब बच्चों को बचा पाने में समर्थ नहीं हो पते तब उन्हें सिविल अस्पताल में भेज देते हैं. आसपास आदिवासी इलाके होने की वजह से कम वजन के और इंफेक्शन वाले बच्चे भी इसी अस्पताल में लाए जाते हैं ऐसे में मौत का आंकड़ा बढ़ जाता है.

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अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, जून महीने में अस्पताल में 262 बीमार बच्चे इलाज के लिए भर्ती किए गए थे जिनमे से 35 की मौत हुई थी, जबकि जुलाई महीने में 314 बीमार बच्चों में से 46 की मौत हुई थी और अगस्त में 346 बीमार बच्चे इलाज के लिए लाए गए थे उनमें से 55 को नहीं बचाया जा सका. इस साल अब तक इसी अस्पताल में 187 बच्चों की मौत हो चुकी है. हैरानी की बात है कि बीमार बच्चों की संख्या को देखते हुए अस्पताल की एक और विंग के लिए 21 करोड़ रुपये का बजट भी पास है लेकिन वहां मौजूद पेड़ों की वजह से मामला लटका पड़ा है.

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उधर, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत सिर्फ 18 इन्क्यूबेटर को सरकारी मानक पर सही बताते हुए बाहर से आने बच्चों की अवस्था और इन्फेक्शन को मौत के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं. उन्होंने कहा कि मामले में जरुरी कदम उठाने के लिए समिति बनाई गई है जल्द ही नई रणनीति बनाई जाएगी. 


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