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PMC बैंक घोटाले में आई एक चौंकाने वाली खबर, कर्ज में डुबाने वाले 44 बड़े अकाउंटों में इस कंपनी से जुड़े हैं 10 खाते

PMC बैंक घोटाले में एक अहम जानकारी सामने आ रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जबसे उन्होंने (पुलिस द्वारा) FIR दर्ज किया है तबसे प्रशासन बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) जॉय थॉमस की तलाश में हैं, लेकिन जॉय थॉमस नहीं मिल रहे.

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PMC बैंक घोटाले में आई एक चौंकाने वाली खबर, कर्ज में डुबाने वाले 44 बड़े अकाउंटों में इस कंपनी से जुड़े हैं 10 खाते

PMC बैंक घोटाले में सामने आ रही है अहम जानकारी

खास बातें

  1. PMC बैंक घोटाले में एक अहम जानकारी
  2. प्रशासन बैंक के मैनेजिंग एडिटर (MD) जॉय थॉमस की तलाश में
  3. पुलिस कर रही जॉय थॉमस के बेटे से उनका ठिकाना जानने की कोशिश
महाराष्ट्र:

PMC बैंक घोटाले में एक अहम जानकारी सामने आ रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जबसे उन्होंने (पुलिस द्वारा) FIR दर्ज किया है तबसे प्रशासन बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) जॉय थॉमस की तलाश में हैं, लेकिन जॉय थॉमस नहीं मिल रहे. पुलिस जॉय थॉमस के बेटे से उनका ठिकाना जानने की कोशिश में है, लेकिन खबर है कि थॉमस का बेटा भी पुलिस को भ्रमित करने में लगा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक बेटे ने पुलिस को पिता का मोबाइल नंबर दिया. उस नम्बर का लोकेशन बार-बार बदल रहा था. पुलिस को लगा कि थॉमस पुलिस से बचने के लिए जगह बदल रहे हैं, पर जब वो उस मोबाइलधारक तक पहुंचे तो पता चला वो तो एक ऑटो ड्राइवर का नम्बर है जो किराया लेकर इधर-उधर जा रहा था.

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FIR के मुताबिक PMC बैंक को कर्ज में डुबाने वाले 44 बड़े अकाउंटों में 10 खाते HDIL और वाधवा से जुड़े हैं. उन 10 खातों में से एक सारंग वाधवा और दूसरा राकेश वाधवा का निजी खाता है और एक HDIL कंपनी का है जबकि 7 HDIL ग्रुप से जुड़े हैं.

जांच में पता चला है कि उन 7 कंपनियों में से 5 का दफ्तर एक ही पते पर है, जो बांद्रा पूर्व में SRA की इमारत में है. इमारत का नाम कैपरी है. कैपरी इमारत वाधवा परिवार की HDIL कंपनी के SRA प्रोजेक्ट की है. स्लम रिडेवलपमेंट की इमारत में दफ़्तर होने के बावजूद इन कंपनियों को बड़े कर्ज दिए गए, जो अगस्त 2019 तक 796.65 करोड़ बकाया है.

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पुलिस को शक है कि बाकी के 34 अकाउंट भी HDIL और वाधवा के ही हैं लेकिन बेनामी, क्योंकि उन 34 अकाउंटों में से HDIL और वाधवा को पैसे ट्रांसफर हुए हैं. मतलब PMC से कर्ज 34 दूसरे खातों पर लिए गए फिर उन्हें HDIL और वाधवा से जुड़े खातों में ट्रांसफर कर दिए गए.

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