महाराष्ट्र : अगर शिवसेना नहीं मानी तो क्या BJP उठाएगी राष्ट्रपति शासन का कदम? सामने आई ये जानकारी

महाराष्ट्र में सरकार बनाने में आ रही अड़चनों के बीच भाजपा ने अन्य विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है. गतिरोध और लंबा खिंचने की स्थिति में बीजेपी राष्ट्रपति शासन का भी कदम उठा सकती है. 

महाराष्ट्र : अगर शिवसेना नहीं मानी तो क्या BJP उठाएगी राष्ट्रपति शासन का कदम? सामने आई ये जानकारी

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर बात नहीं बन पाई है.

खास बातें

  • महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना के बीच खींचतान जारी
  • शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूला लागू करने की मांग की है
  • हालांकि बीजेपी इस फॉर्मूले पर तैयार नहीं है
मुंबई/नई दिल्ली :

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार गठन को लेकर बीजेपी-शिवसेना के बीच तनातनी जारी है. शिवसेना 50-50 फॉर्मूले को लागू करने की मांग पर अड़ी है, जबकि बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं है. इस बीच शिवसेना ने एनसीपी से भी संपर्क किया है. अब खबर आ रही है कि सरकार बनाने में आ रही अड़चनों के बीच भाजपा ने अन्य विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है. गतिरोध और लंबा खिंचने की स्थिति में बीजेपी राष्ट्रपति शासन का भी कदम उठा सकती है. महाराष्ट्र के निवर्तमान वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के बयान से भी ऐसे संकेत मिलते हैं. यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी की सोची-समझी रणनीति के तहत सुधीर ने यह बयान दिया. भाजपा सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति शासन लगने के बाद भी पार्टी शिवसेना के साथ बातचीत जारी रख सकती है. अगर इस अवधि में बातचीत सही मुकाम पर पहुंचेगी तो फिर राष्ट्रपति शासन हटाकर सरकार बनाने का कभी भी फैसला हो सकता है.   

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दरअसल, पार्टी को लगता है कि 24 अक्टूबर को नतीजे आने के 10 दिनों बाद भी सरकार न बनने से राज्य सियासी भंवर में फंसा हुआ है, जिससे गलत संदेश जा रहा है. भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के एक पदाधिकारी ने कहा, "भाजपा सत्ता की भूखी नहीं है. चूंकि जनादेश भाजपा-शिवसेना महायुति (महागठबंधन) के पक्ष में है तो हम सरकार बनाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, मगर ताली दोनों हाथ से बजती है. बात नहीं बनी तो पार्टी के घुटने टेकने से बेहतर कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाए. तब भी हम महाराष्ट्र की जनता की बेहतर ढंग से सेवा कर सकेंगे." 

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शिवसेना का बीजेपी पर पलटवार 
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन वाले बयान को लेकर शिवसेना ने बीजेपी पर पलटवार किया. शिवसेना ने शनिवार को आगाह करते हुए कहा कि राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राष्ट्रपति या राज्यपाल के कार्यालय का दुरुपयोग करने का कोई भी प्रयास 'देश के लिए खतरा' है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि राज्य के राजनीतिक संकट में राष्ट्रपति कार्यालय को इस तरह से घसीटना 'अनुचित और गलत' है. राउत ने कहा, "राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख है...वह किसी की जेब में नहीं है. इस तरह की धमकी देना जनता के जनादेश का अपमान है."  (इनपुट- IANS से भी)

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