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सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मुकदमे पर फिर उठे सवाल, पूर्व जस्टिस ने कहा- मामले में सबकुछ ठीक नहीं हो रहा

बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस रहते हुए मामले में 4 आरोपियों की जमानत अर्जी सुन चुके अभय ठिप्से का कहना है कि मामले में न्याय प्रणाली फेल होती नजर आ रही है.

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सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मुकदमे पर फिर उठे सवाल, पूर्व जस्टिस ने कहा- मामले में सबकुछ ठीक नहीं हो रहा

पूर्व जस्टिस अभय ठिप्से.

मुंबई: शुरुआत से ही शंका और सवालों से घिरा सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामला फिर से सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार सवाल उठाया है एक पूर्व जस्टिस अभय ठिप्से ने जो बॉम्बे हाईकोर्ट और इलाहाबद हाईकोर्ट में जस्टिस रह चुके हैं. बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस रहते हुए मामले में 4 आरोपियों की जमानत अर्जी सुन चुके अभय ठिप्से का कहना है कि मामले में न्याय प्रणाली फेल होती नजर आ रही है.

पूर्व जस्टिस अभय ठिप्से ने का कहना है कि आरोपों से डिस्चार्ज होने का मतलब होता है, मामले में प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनना. लेकिन सवाल है प्रथम दृष्टया मामला बन रहा था तभी तो आरोपियों की जमानत कई बार खारिज हुई थी. कइयों को 4 से 5 साल जेल में रहना पड़ा था. बाद में जमानत भी जो मिली वो मुकदमे में देरी की वजह से मिली थी.
सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मुकदमे में 38 आरोपियों में से 15 को डिस्चार्ज किये जाने को पहले से शक के निगाह से देखा जा रहा था अब तो बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अभय ठिप्से ने भी सवाल उठाते हुए कहा है कि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट को सभी डिस्चार्ज मामलों को फिर से देखना चाहिए.

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ये सवाल पूछने पर कि क्या कहीं कोई मैनिपुलेशन हुआ है ? जस्टिस का कहना है कि मैनिपुलेशन मैं नहीं कह सकता, क्योंकि ये इंफेरन्स लगाना बहुत मुश्किल है. लेकिन एक बात है अमूमन ट्रायल कोर्ट हाईकोर्ट औऱ सुप्रीम कोर्ट के जो ऑब्जवेर्वशन है भले ही जमानत अर्जी पर ही हो उसे इग्नोर नहीं करता. यहां डिस्चार्ज देते समय वो कंसीडर करना चहिये था कि क्यों वो अलग व्यू ले रहे हैं. हाईकोर्ट ऑर्डर में लिखा है प्राइमाफेसी सबूत है , गुजरात के ट्रायल कोर्ट में कहा गया था कि प्राइमा फेसी एविडेंस है, फिर क्यों ऐसा हुआ कहना मुश्किल है.

पूर्व जस्टिस के मुताबिक जब छोटे अफसरों को मामले में आरोपी बरकरार रखा गया है मतलब ये मान रहे हैं कि सोहराबुद्दीन का अपहरण हुआ था. उसकी हत्या हुई है फिर बड़े अफसर और दूसरे लोग कैसे निर्दोष हो सकते हैं? क्या ये संभव है कि बड़े अफसरों के बिना ही सब कुछ हुआ हो?

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मामले में डिस्चार्ज कुछ की वजह सरकारी सैंक्शन नहीं मिलना होने पर पूर्व जस्टिस का कहना है वो सुरक्षा तो छोटे अफसरों के लिए भी है सिर्फ बड़े अफसरों को नहीं. तो क्या मामले में अलग-अलग आरोपियों के लिए पैमाना और मापदंड अलग-अलग अपनाया गया है ?  उन्होंने माना कि कानून का जानकार होने के नाते उन्हें ऐसा लगता है. न्याय प्रणाली फेल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस ट्रायल के बारे मैं कहूंगा ठीक से नही हो रहा है.

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VIDEO : सोहराबुद्दीन केस में न्याय नहीं : पूर्व जज


पूर्व जस्टिस अभय ठिप्से ने जज लोया की संदिग्ध मौत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं है, लेकिन उनका निजी मत है कि मौत स्वाभाविक है या अस्वाभाविक सिर्फ इस पर फोकस करना ठीक नहीं है. ट्रायल में इतनी अनियमितता हो रही है और दूसरे भी आरोप है जो मैंने पढ़ा है कि उन्हें कोई अप्रोच कर रहा था तो उसकी भी जांच करनी चाहिए. उसके लिए लोया जो फोन इस्तेमाल करते थे असका सीडीआर निकालकर जांच करेंगे तो कुछ इफेक्टिव उसमे सुराग मिल सकता है और सच बाहर आ सकता है. जाहिर है सिर्फ आरोपियों के नहीं जांच एजेंसी, अदालत और सरकार की गले की फांसबना सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मुकदमा इस कदर उलझ गया है किमामले में हर कदम पर संदेह और सवाल खड़े होना आम बात हो गइ है. सालों बाद शुरू हुए मुक़दमे में बड़ी संख्या में गवाहों का मुकरना भी एक बड़ा सवाल है.


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