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महाराष्ट्र : बीजेपी-शिवसेना में और बढ़ी तकरार, फड़णवीस ने कहा - हम मध्यवधि चुनाव के लिए तैयार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी राज्य में मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है.

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महाराष्ट्र : बीजेपी-शिवसेना में और बढ़ी तकरार, फड़णवीस ने कहा - हम मध्यवधि चुनाव के लिए तैयार

देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि अगर कोई हम पर मध्यावधि चुनाव थोपना चाहता है तो हम फिर से सरकार बनाएंगे. 

खास बातें

  1. फड़णवीस ने किसी पार्टी का नाम लिए बगैर शिवसेना पर साधा निशाना
  2. कहा - मुझे पूरा विश्वास है कि हम फिर से सरकार बनाएंगे
  3. शिवसेना कर रही है पूर्ण कर्जमाफी को अगले महीने लागू करने की मांग
मुंबई:

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी राज्य में मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है. उनकी यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब राज्य में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में मध्यावधि चुनाव की अटकलें लगाई जा रही हैं. फड़णवीस ने किसी पार्टी का नाम लिए बगैर कहा, कुछ लोगों ने कहा है कि वे सरकार को गिरा देंगे, समर्थन वापस ले लेंगे. मैंने कहा कि हम मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, अगर कोई हम पर मध्यावधि चुनाव थोपना चाहता है तो मुझे पूरा विश्वास है कि हम फिर से सरकार बनाएंगे. 

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इशारों-इशारों में शिवसेना को दी चुनौती
माना जा रहा है कि फड़णवीस ने इशारों-इशारों में सरकार में साझीदार पार्टी शिवसेना को चुनौती दी है. उधर, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पहले ही भाजपा को चेतावनी दे चुके हैं कि महाराष्ट सरकार द्वारा घोषित किसानों के लिये कर्जमाफी को अगर अगले महीने लागू नहीं किया गया तो उनकी पार्टी बड़ा कदमे उठाएगी. इस बड़े कदम को समर्थन वापसी माना जा रहा है. पूर्ण कर्ज माफी की घोषणा को किसानों की एकता की जीत बताते हुए उद्धव ने कहा था कि हमारी मांगें बेहद स्पष्ट थीं. हमलोग यही चाहते थे कि उनके कर्ज पूरी तरह माफ कर दिये जायें. पुणतांबा गांव समेत समूचे राज्य से आये किसानों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि मैं किसानों को धन्यवाद देना चाहूंगा. हमने हरित क्रांति के बारे में सुना था लेकिन महाराष्ट्र के किसानों ने यह दिखा दिया कि जो हरित क्रांति ला सकता है वह क्रांति भी कर सकता है. 


किसानों की राजनीति पर सबकी नजर
हाल ही में राज्य में हुए किसान आंदोलन के समय शिवसेना ने खुलकर किसान संगठनों और उनकी मांगों का समर्थन किया था. शिवसेना भी किसानों के सहारे अपने जनाधार को मजबूत करना चाहती है और कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहती. वहीं, बीजेपे ने मौके की नजाकत को भांपते हुए कर्जमाफी की घोषणा करके बाजी पलट दी है. बीजेपी का मानना है कि वह कर्जमाफी के सहारे किसानों का भरोसा हासिल कर लेगी.  
(इनपुट भाषा से भी)
 



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