भीमा-कोरेगांव हिंसा मामला: गिरफ्तारियों पर बोले ADG परमबीर सिंह- माओवादी संगठनों में एक आतंकवादी संगठन भी शामिल था

पुलिस ने कहा- केंद्र सरकार को अस्थिर करने के लिए माओवादी संगठनों द्वारा बहुत बड़ी साज़िश रची जा रही थी

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामला: गिरफ्तारियों पर बोले ADG परमबीर सिंह- माओवादी संगठनों में एक आतंकवादी संगठन भी शामिल था

महाराष्ट्र पुलिस के ADG परमबीर सिंह

खास बातें

  • गिरफ्तार लोग माओवादियों के लिए अंडरग्राउंड काम कर रहे थे
  • पुलिस को सबूत के रूप में हजारों दस्तावेज मिले हैं
  • पुलिस ने बरामद किए गए पत्र और हथियारों के कैटलॉग दिखाए
मुंबई:

भीमा-कोरगांव हिंसा मामले में वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी को लेकर महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि यह सभी माओवादियों के लिए अंडरग्राउंड काम कर रहे थे. केंद्र सरकार को अस्थिर करने के लिए माओवादी संगठनों द्वारा बहुत बड़ी साज़िश रची जा रही थी.

महाराष्ट्र पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर परमबीर सिंह ने कहा कि जांच से पता चला कि माओवादी संगठनों द्वारा बहुत बड़ी साज़िश रची जा रही थी. यह आरोपी इस काम को आगे बढ़ाने में उनकी मदद कर रहे थे. इसमें एक आतंकवादी संगठन भी शामिल था.

सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 17 मई को UAPA कानून के तहत मामला बनाया गया. उन्‍होंने कहा कि केस डायरी में से तथ्यों का ज़िक्र करते हुए अदालत को बताया, सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मानव, मुक्ता दाभोलकर, NCP नेता जितेंद्र औहाद तथा अन्य लोग महाराष्ट्र एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा गिरफ्तार किए गए.

परमबीर सिंह ने कहा, "जब हमें भरोसा हो गया कि इनके तार स्पष्ट रूप से जुड़े हुए हैं, तभी हमने अलग-अलग शहरों में इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कदम आगे बढ़ाया था. सबूत माओवादियों के साथ इनकी भूमिका को साफ-साफ साबित करते हैं."

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एडीजी ने बताया कि इस केस की शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी. उस दिन FIR दर्ज हुई थी. यलगार परिषद में भड़काऊ बयान दिए गए थे. उसमें जो शामिल थे वे कबीर कला मंच से जुड़े थे. 6 मार्च को सुरेंद्र गडलिंग और रौना विल्सन का नाम जोड़ा गया. बाद में 17 अप्रैल को आरोपियों के यहां छापे मारे गए. छापे की पूरी कार्रवाई  वीडियो कैमरे में रिकार्ड की गई थी. सभी बरामद वस्तुएं एफएसएल को 20 अप्रैल को भेज दी गई थीं. असली डिवाइस FSL के पास है. उसके क्लोन उपकरणों के आधार पर जांच जारी है.

सिंह ने बताया कि मामले में 17 मई को FIR में UAPA लगा दिया गया जब उससे आतंक के तार जुड़े मिले. उसके बाद  और नाम जोड़े गए.  6 जून को सुरेंद्र गडलिंग, सुधीर ढवले, रौना विल्सन सहित पांच को गिरफ्तार किया गया.

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उन्होंने बताया कि मामले के पूरे विश्लेषण के बाद पता चला कि सेंट्रल कमेटी सीधे कैडर से बात नहीं करती थी. उसके लिए रौना विल्सन का इस्तेमाल होता था. कूरियर के जरिए बात होती थी और पासवर्ड प्रोटेक्टेड था. इनके द्वारा भारत सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही थी. इसके लिए ओवर कॉडर का इस्तेमाल होना था.

सिंह ने बताया कि 23 जून को सात आरोपियों के नाम जोड़े गए. उसके बाद सभी के घरों पर 29 मई को छापे की कार्रवाई हुई. जो भी सबूत मिले हैं उसके जरिए इनकी पूरी साजिश उजागर हुई है. हजारों दस्तावेज मिले हैं. सिंह ने पत्रकारों को अहम दस्तावेज, सुधा भरद्वाज द्वारा कॉमरेड प्रकाश को लिखा गया पत्र दिखाया और पढ़ा. एक अन्य पत्र सुदर्शन ने कॉमरेड गौतम नवलखा को लिखा है. उन्होंने बताया कि इसमें श्री गौतम का मतलब गौतम नवलखा है. गौतम नवलखा सीधे सेंट्रल कमेटी के संपर्क में थे.

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सिंह ने रशियन ग्रेनेड लांचर और अन्य हथियारों के कैटलॉग दिखाए और बताया कि यह सब रौना विल्सन के कंप्यूटर से बरामद किए गए हैं. उन्होंने बताया कि प्रकाश गणपति और अन्य सेंट्रल कमेटी के बिहाफ पर पत्राचार करते थे. उन्होंने वरवर रॉव का पत्र भी पढ़ा जो कि सुरेंद्र गडलिंग को लिखा गया है. इसमें नोटबंदी से उपजी स्थिति से निपटने और कठिनाई होने की बात लिखी है.17 मार्च को सुरेंद्र गडलिंग ने वरवर राव को पत्र लिखा है. कॉमरेड मिलिंद तेलतुंबड़े का भी पत्र है जो आनंद तेलतुंबड़े के भाई हैं.
 
सिंह ने बताया कि यह सभी माओवादियों के लिए अंडरग्राउंड काम कर रहे थे.इन सबसे जुड़ी जानकारी के लिए ही सभी की हिरासत में पूछताछ की जरूरत है. उन्होंने बताया कि रौना विल्सन द्वारा मिलिंद तेलतुंबड़े को लिखे गए पत्र में फंड देने की बात का जिक्र है. यह पत्र दो जनवरी 2018 को लिखा गया है. इसमें भीमा कोरेगांव हिंसा में युवक के मरने को मुद्दा बनाने की बात है.

VIDEO : गिरफ्तार किए गए वरवर रॉव घर पहुंचे

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 सिंह ने कहा कि हथियार जुटाने की जिम्मेदारी वरवर रॉव की थी. विदेशों में भी इनकी मीटिंग होती रहती थीं. सभी पत्रों की इंटिग्रिटी मेंटेन की गई है. ओरिजिनल पत्र FSL के पास हैं. हम क्लोन पत्रों के आधार पर काम कर रहे हैं.