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वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र पुलिस का दावा- बरामद चिट्ठियों में ग्रेनेड लॉन्चर से लेकर, 'राजीव गांधी जैसी घटना' की बात

पुलिस अधिकारी दावा किया कि चिट्ठियों में पाया गया है कि ये लोग 'मोदी राज' में राजीव गांधी जैसी किसी घटना की  योजना बना रहे थे.

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वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र पुलिस का दावा- बरामद चिट्ठियों में ग्रेनेड लॉन्चर से लेकर, 'राजीव गांधी जैसी घटना' की बात

खास बातें

  1. 'हजारों चिट्ठियां बरामद हुई हैं'
  2. एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
  3. महाराष्ट्र के सीएम को दी गई थी जानकारी
मुंबई: महाराष्ट्र पुलिस ने भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ़्तारियों को लेकर उठ रहे सवालों का महाराष्ट्र के एडीजी (कानून-व्यवस्था) परमबीर सिंहने जवाब देते हुए कहा कि पुलिस के पास इन तमाम लोगों के नक्सलियों के साथ संबंध होने के पुख़्ता सबूत हैं. एडीजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि ये सभी लोग ओवरग्राउंड रहकर अंडरग्राउंड नक्सलियों की मदद करते थे, उनके लिए फंड भी जुटाते थे. उन्होंने कहा है कि जिनके भी नाम आरोपियों की लिस्ट में हैं उनमें से भले ही कुछ लोग गिरफ़्तार न हुए हों लेकिन वो पुलिस की रेडार पर हैं. पुलिस अधिकारी ने कहा कि हजारों दस्तावेज बरामद किये गये है जिनसे साबित होता है कि इनके संबंध माओवादियों से थे और उनके लिये हथियार और फंड जुटाते थे.

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परमबीर सिंह ने प्रेंस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमारे पास हजारों चिटि्ठयां हैं जिससे साफ होता है कि ये लोग अंडरग्राउंड होकर काम करते थे कि कैसे जेएनयू के छात्रों के इस बात के लिये आंदोलित होकर चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंके. इन चिट्ठियों से साफ जाहिर होता है कि इनके माओवादियो से संबंध थे. पुलिस अधिकारी दावा किया कि चिट्ठियों में पाया गया है कि ये लोग 'मोदी राज' में 'राजीव गांधी जैसी किसी घटना' की  योजना बना रहे थे. वहीं कुछ चिट्ठियों में किसी 'बड़े एक्शन' की भी योजना थी ताकि लोगों का ध्यान खींचा जा सके. परमबीर सिंह ने कहा कि एक डिस्क से तो रॉकेल लॉन्चर का पैम्फ्लेट पाया गया है. 

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एडीडी के मुताबिक, 'दिल्ली में रहने वाले रोना विल्सन ने 30 जुलाई, 2017 को एक चिट्ठी में माओवादी नेता प्रकाश को लिखा है कि 4 हजार राउंड और ग्रेनेड लॉन्चर के लिये 8 करोड़ रुपये की जरूरत है.'  गौरतलब है कि वामपंथी विचारक वरवरा राव, वकील सुधा भरद्वाज, एक्टिविस्ट अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वरुण गोन्सालविस को पुलिस ने भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट में ने इनको घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया. 

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पुलिस का कहना है कि इन लोगों पर पिछले एक हफ्ते से नजर रखी जा रही थी और इनके खिलाफ छापा मारने से पहले महाराष्ट्र के सीएम को नये सबूतों के बारे में जानकारी दे दी गई थी. पुलिस का यह भी कहना है कि ये देश के 35 बड़े विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों से संपर्क में थे ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सके.


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